बॉम्बे हाई कोर्ट के अहम फैसले: टैटू पर चयन रद्द करने पर रोक, फर्जी सोशल मीडिया पेज के खिलाफ मुकदमे की अनुमति

टैटू पर चयन रद्द करने पर रोक, फर्जी सोशल मीडिया पेज के खिलाफ मुकदमे की अनुमति
  • टैटू को अयोग्यता का आधार बनाने पर सवाल, फर्जी प्रोफाइल से धोखाधड़ी का आरोप
  • हिंदी ट्रांसलेटर भर्ती में उम्मीदवार को राहत, योग्यता के आधार पर परिणाम घोषित करने का आदेश

डिजिटल डेस्क, मुंबई. बॉम्बे हाई कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। संयुक्त हिंदी अनुवादक परीक्षा-2025 के जरिए हिंदी ट्रांसलेटर पद पर चयन के मामले में अदालत ने कहा कि नियमों के तहत अनुमति प्राप्त स्थान पर बने छोटे टैटू के आधार पर उम्मीदवार को पूरी चयन प्रक्रिया से बाहर करना कठोर कदम है। वहीं, उद्योगपति एवं समाजसेवी लीना गांधी तिवारी को उनके नाम पर फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनाने वाले अज्ञात व्यक्ति और मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक के खिलाफ कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ाने की अनुमति दी है। हिंदी ट्रांसलेटर पद के उम्मीदवार राकेश मनोज प्रतिहस्त को दाहिने हाथ की कोहनी और कलाई के बीच टैटू होने के कारण कर्मचारी चयन आयोग ने चिकित्सा आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया था। उन्होंने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति डॉ. नीता गोखले की पीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि उम्मीदवार के अग्रबाहु पर 3 से 3.5 सेंटीमीटर का टैटू था। संबंधित विज्ञापन के नियमों में इस स्थान पर टैटू की अनुमति है। मेडिकल बोर्ड ने भी टैटू को अश्लील या आपत्तिजनक नहीं बताया था। पीठ ने समीक्षा मेडिकल बोर्ड के निर्णय को सही नहीं माना और आयोग को उम्मीदवार को चिकित्सा की दृष्टि से योग्य मानते हुए उसकी पात्रता एवं योग्यता के आधार पर परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया। साथ ही अंतिम चयन प्रक्रिया में उसकी उम्मीदवारी शामिल करने और एक पद सुरक्षित रखने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी। उम्मीदवार ने अदालत को बताया कि वह टैटू हटवाने की प्रक्रिया में है और इसके 2 सत्र पूरे हो चुके हैं।

लीना गांधी तिवारी को कानूनी कार्रवाई की अनुमति

दूसरे मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने यूएसवी फार्मा की चेयरपर्सन लीना गांधी तिवारी को अज्ञात व्यक्ति और फेसबुक-इंस्टाग्राम की संचालक कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ाने की अनुमति दी। न्यायमूर्ति राजेश एस. पाटील की एकल पीठ ने लेटर्स पेटेंट, 1865 के क्लॉज 12 के तहत उनकी याचिका स्वीकार की। याचिका के अनुसार, 1 सितंबर 2026 से फेसबुक पर लीना गांधी तिवारी के नाम, तस्वीर और व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल कर फर्जी प्रोफाइल बनाए गए। आरोप है कि इनके जरिए लोगों को गुमराह कर आर्थिक लाभ उठाने की कोशिश की गई। उन्होंने 17 सितंबर 2026 को मेटा को कानूनी नोटिस भेजकर फर्जी पेज हटाने की मांग की थी। इस मामले में मुंबई के गोवंडी पुलिस स्टेशन में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। अब हाई कोर्ट की अनुमति के बाद वह संबंधित पक्षों के खिलाफ मुख्य मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ा सकेंगी।

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