महाराष्ट्र में सूखे का संकट: औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किए बिना तत्काल सूखा घोषित करें मुख्यमंत्री फडणवीस

औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किए बिना तत्काल सूखा घोषित करें मुख्यमंत्री फडणवीस
  • पवार ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
  • फडणवीस बोले- एनडीआरएफ का इंतजार नहीं
  • पहले राज्य सरकार देगी मदद

डिजिटल डेस्क, मुंबई। राज्य के कई हिस्सों में बारिश की कमी से पैदा हुए कृषि संकट को लेकर राकांपा (शरद) अध्यक्ष शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर तत्काल राहत पैकेज की मांग की है। पवार ने कहा है कि कई क्षेत्रों में खरीफ की खड़ी फसलें बारिश के अभाव में सूख रही हैं और किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा रहा है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किए बिना तत्काल सूखा घोषित करने की मांग की है। पवार ने मांग की है कि फसल नुकसान झेल रहे किसानों को कम से कम 50 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की आर्थिक सहायता सरकार को तुरंत देनी चाहिए। पवार की मांगों पर फडणवीस ने कहा है कि सूखे और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सरकार पहले से तैयारी कर रही है। उनके मुताबिक 5 अक्टूबर के बाद होने वाले पंचनामों के आधार पर केंद्र से एनडीआरएफ के तहत सहायता मांगी जाएगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र की सहायता का इंतजार किए बिना राज्य सरकार अपने कोष से किसानों को तत्काल मदद देगी।

पवार की 9 सूत्रीय मांगें

शरद पवार ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए व्यापक पैकेज की मांग की है। पवार ने मांग की है कि गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों को तुरंत सूखा प्रभावित घोषित किया जाए। जिन तहसीलों में हालात बेहद खराब हैं, उन्हें सूखाग्रस्त घोषित कर संबंधित रियायतें तत्काल लागू की जाएं। इसके साथ ही फसल नुकसान झेल रहे किसानों को कम से कम 50 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की आर्थिक सहायता देने की मांग की गई है। साथ ही खेती पर निर्भर खेत मजदूर परिवारों के लिए 25 हजार रुपए की विशेष सहायता मांगी गई है। आर्थिक संकट में फंसे किसानों के लिए तत्काल कर्जमाफी योजना लागू करने और उन्हें नए फसल ऋण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों की प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 1 लाख रुपए करने की मांग भी पत्र में शामिल है।

पवार ने किसानों के लिए एक रुपए वाली फसल बीमा योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने तथा पूर्व में हटाए गए संबंधित प्रावधानों को भी बहाल करने की मांग की है। पिछले वर्ष बेमौसम बारिश से हुए नुकसान के लिए घोषित सहायता भी किसानों के खातों में तत्काल पहुंचाने की मांग की गई है। सूखाग्रस्त तहसीलों में रोजगार गारंटी योजना के तहत विशेष अभियान चलाने की मांग की गई है। जलसंधारण, कृषि और अन्य ग्रामीण कार्य शुरू होने से एक तरफ रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ भविष्य के लिए जल स्रोत मजबूत किए जा सकेंगे। फलों के बगीचों को बचाने के लिए जरूरत वाले क्षेत्रों में टैंकरों से पानी उपलब्ध कराने और पेयजल संकट वाले गांवों में तत्काल सरकारी टैंकर शुरू करने की मांग की गई है। पशुओं के लिए पर्याप्त पानी और चारा उपलब्ध कराने तथा जरूरत के अनुसार चारा शिविर शुरू करने की मांग भी की गई है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों के स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की केवल परीक्षा फीस नहीं, बल्कि संपूर्ण शैक्षणिक फीस माफ करने की मांग की गई है।

फडणवीस का जवाब- एनडीआरएफ का इंतजार नहीं करेंगे

पवार के पत्र के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लिया है और आवश्यक राहत की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत 5 अक्टूबर के बाद पंचनामे किए जाएंगे और उसके आधार पर केंद्र से एनडीआरएफ से सहायता मांगी जाएगी। लेकिन किसानों को मदद देने के लिए राज्य सरकार केंद्र की राशि का इंतजार नहीं करेगी। फडणवीस के अनुसार प्रभावित किसानों को सीधे आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ पेयजल और चारे की व्यवस्था भी की जाएगी। यानी सरकार की ओर से फिलहाल दो स्तरों पर तैयारी की जा रही है, एक तरफ नुकसान का आधिकारिक आकलन और दूसरी तरफ राज्य के संसाधनों से तत्काल राहत। गौरतलब है कि इस वर्ष मराठवाड़ा और विदर्भ में काफी कम बारिश हुई है जिससे इन दोनों क्षेत्रों में सूखे के आसार बढ़ गए हैं।

Created On :   18 Sept 2026 9:22 PM IST

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