बॉम्बे हाई कोर्ट: वर्सोवा और मढ़ द्वीप को जोड़ने वाले प्रस्तावित पुल के निर्माण का रास्ता साफ, दूरी 22 से घटकर हो सकती है डेढ़ किलो मीटर

वर्सोवा और मढ़ द्वीप को जोड़ने वाले प्रस्तावित पुल के निर्माण का रास्ता साफ, दूरी 22 से घटकर हो सकती है डेढ़ किलो मीटर
  • अदालत ने बीएमसी को मालाड क्रीक पर 2064 मीटर लंबे पुल के निर्माण के लिए 1237 मैंग्रोव वृक्षों को काटने की दी अनुमति
  • सार्वजनिक हित की महत्वपूर्ण परियोजना और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जाना चाहिए

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने वर्सोवा और मढ़ द्वीप को जोड़ने वाले प्रस्तावित पुल के निर्माण का रास्ता साफ करते हुए कहा कि सार्वजनिक हित की महत्वपूर्ण संरचना, परियोजना और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि हमने केवल यह मानकर 1237 मैंग्रोव वृक्षों काटने की अनुमति नहीं दी कि परियोजना सार्वजनिक है, बल्कि परियोजना की सार्वजनिक उपयोगिता, पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन, सक्षम प्राधिकारियों की अनुमतियां और बड़े पैमाने पर मैंग्रोव पुनर्स्थापन और प्रतिपूरक रोपण की ठोस व्यवस्था के इन सभी बातों को संयुक्त रूप से देखते हुए अनुमति दी।

मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेथना की पीठ ने मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि मैंग्रोव अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र हैं। वे समुद्री तट को कटाव, ज्वारीय लहरों और बाढ़ से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनका संरक्षण आवश्यक है। विकास कार्य पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए, बल्कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जाना चाहिए।

पीठ ने पाया कि प्रारंभिक पर्यावरण प्रभाव आकलन में लगभग 2.80 हेक्टेयर मैंग्रोव क्षेत्र और 560 मैंग्रोव वृक्षों के प्रभावित होने का अनुमान था। बाद में संशोधित प्रस्ताव और पर्यावरणीय अध्ययन किया गया। संशोधित योजना के अनुसार लगभग 2.7515 हेक्टेयर क्षेत्र निर्माण के दौरान प्रभावित हो सकता है, लेकिन लगभग 2.5 हेक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव का उसी स्थान पर पुनर्स्थापन प्रस्तावित था। पुल के खंभों और पाइलनों से लगभग 2005 वर्गमीटर अर्थात 0.20 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थायी नुकसान होने का अनुमान है।

बीएमसी ने पीठ के समक्ष कई पर्यावरणीय उपायों का आश्वासन दिया, जिसमें प्रभावित मैंग्रोव के बदले लगभग 39,000 मैंग्रोव पौधों का रोपण, लगभग 9 हेक्टेयर क्षतिग्रस्त मैंग्रोव वन भूमि पर प्रतिपूरक रोपण, मैंग्रोव के लिए 1 हजार करोड़ 42 लाख 2 हजार 808 रुपए जमा करना, रोपण, संरक्षण, संचालन और रखरखाव की व्यवस्था 10 वर्षों तक करना, प्रभावित क्षेत्र में यथास्थान मैंग्रोव पुनर्स्थापन करना, निर्धारित अवधि में प्रगति और स्थिति की निगरानी संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करना प्रमुख है।

बॉम्बे एनवायरनमेंट एक्शन ग्रुप ने परियोजना का विरोध किया। उनकी मुख्य दलील थ कि मैंग्रोव की कटाई से पर्यावरणीय क्षति तथा जलीय एवं समुद्री जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और केवल प्रतिपूरक वृक्षारोपण पर्याप्त नहीं है।

पीठ ने इस पर्यावरणीय आपत्ति को गंभीरता से विचार किया, लेकिन यह भी देखा कि परियोजना का पर्यावरणीय मूल्यांकन किया गया था और सक्षम वैधानिक प्राधिकारियों ने विभिन्न शर्तों के साथ परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति एवं अनुशंसा की थी।

बीएमसी ने पीठ को यह भी बताया कि यह पुल मुंबई के सड़क तंत्र की एक महत्वपूर्ण कड़ी होगा। इससे वर्सोवा और मढ़ के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। यातायात का भार मौजूदा सड़कों से कम होगा। यात्रा की दूरी लगभग 22 किमी से घटकर 1.5 किमी हो सकती है। यात्रा में लगने वाला समय काफी कम होगा। यातायात की भीड़ और उससे होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव में कमी आने की संभावना है। आपातकालीन परिस्थितियों में वायुसेना और नौसेना के लिए भी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा।

बीएमसी के अनुसार परियोजना पूर्ण होने पर कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 93 प्रतिशत कमी आने का अनुमान है। पीठ ने इस दावे को अभिलेख पर उपलब्ध सामग्री के संदर्भ में नोट किया और कहा कि इसके विपरीत कोई सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं लाई गई।

पीठ ने पाया कि यह परियोजना

निजी या व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक अवसंरचना के विकास के लिए है।

मुंबई के नागरिकों को बेहतर यातायात संपर्क प्रदान करेगी। यात्रा दूरी और समय में महत्वपूर्ण कमी ला सकती है। यातायात की भीड़ तथा उससे होने वाले पर्यावरणीय भार को कम करने में सहायक हो सकती है। पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन किया गया है।

मैंग्रोव के पुनर्स्थापन एवं प्रतिपूरक रोपण के ठोस उपाय प्रस्तावित हैं।

पीठ ने कहा कि बीएमसी को संबंधित प्राधिकारियों द्वारा लगाई गई सभी शर्तों तथा मैंग्रोव संरक्षण और पुनर्स्थापन संबंधी सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन करना होगा। विशेष रूप से बीएमसी द्वारा दिए गए पर्यावरणीय आश्वासन और 10 वर्षों तक निगरानी एवं यथास्थान पुनर्स्थापन की प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण आधार बनी। पीठ ने स्पष्ट किया कि इस आश्वासन का उल्लंघन होने पर बीएमसी दीवानी तथा आपराधिक दोनों प्रकार के परिणामों के लिए उत्तरदायी हो सकती है।

Created On :   18 Sept 2026 9:18 PM IST

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