बॉम्बे हाई कोर्ट: छात्रा से छेड़छाड़ मामले में कॉलेज प्रबंधन के सहायक प्राध्यापक को बर्खास्त करने की कार्रवाई को वैध बताया

छात्रा से छेड़छाड़ मामले में कॉलेज प्रबंधन के सहायक प्राध्यापक को बर्खास्त करने की कार्रवाई को वैध बताया
  • अदालत ने विश्वविद्यालय एवं कॉलेज ट्रिब्यूनल के सहायक प्राध्यापक की बर्खास्तगी को अवैध बताने के आदेश को किया रद्द
  • परीक्षा के दौरान छात्रा से छेड़छाड़ का मामला

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने परीक्षा के दौरान छात्रा से छेड़छाड़ करने के मामले में सहायक प्राध्यापक को बर्खास्त करने के स्कूल प्रबंधन की कार्रवाई को वैध बताया। अदालत ने विश्वविद्यालय एवं कॉलेज ट्रिब्यूनल के सहायक प्राध्यापक की बर्खास्तगी को अवैध बताने के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि विभागीय जांच में आरोप सिद्ध हुए थे और ट्रिब्यूनल ने तथ्यों के निष्कर्षों पर कोई गंभीर त्रुटि नहीं बताई थी।

न्यायमूर्ति शर्मिला यू. देशमुख की एकल पीठ ने स्कूल एवं कालेज संचालित करने वाली संस्था नासिक की ‘मराठी विद्या प्रसारक समाज’ की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि छात्रा को जिरह के लिए प्रस्तुत किया गया था, लेकिन कर्मचारी (सहायक प्राध्यापक) ने स्वयं उस समय जिरह करने से इंकार किया था। बाद में वकील नियुक्त होने के बाद गवाहों को पुनः बुलाने की मांग की गई, जिसे जांच अधिकारी ने सही रूप से अस्वीकार किया। दूसरे गवाह (डॉ. चव्हाणे) से कर्मचारी ने स्वयं दो प्रश्न पूछकर जिरह समाप्त की थी। जिरह की गुणवत्ता या गहराई कम होना, जिरह के अवसर से वंचित किए जाने के बराबर नहीं है। दस्तावेज उपलब्ध न कराए जाने की कोई शिकायत जांच के दौरान या अपील मेमो में नहीं की गई थी। इसलिए प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का निष्कर्ष गलत था।

विश्वविद्यालय एवं कॉलेज ट्रिब्यूनल ने कॉलेज प्रबंधन के 25 जनवरी 2024 को नौकरी से बर्खास्तगी के आदेश रद्द करते हुए कहा कि कर्मचारी को छात्रा और एक महत्वपूर्ण गवाह से प्रभावी जिरह का अवसर नहीं मिला। कुछ दस्तावेज कर्मचारी को उपलब्ध नहीं कराए गए। इसलिए प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन हुआ।

ट्रिब्यूनल ने स्कूल प्रबंधन को नई जांच कराने का निर्देश दिया था। पीठ ने ट्रिब्यूनल के कर्मचारी के नौकरी से बर्खास्तगी को रद्द करने के आदेश गलत ठहराया गया और उसकी बर्खास्तगी को वैध घोषित कर दिया।

क्या है पूरा मामला

प्रतिवादी कर्मचारी को 2016 में सहायक प्राध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया था। 14 अक्टूबर 2016 को विश्वविद्यालय परीक्षा के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि परीक्षा कक्ष में ड्यूटी पर रहते हुए कर्मचारी ने उसके साथ अनुचित शारीरिक व्यवहार किया। छात्रा और उसके पिता ने इसकी लिखित शिकायत की। उसी दिन कर्मचारी ने भी अपने व्यवहार के लिए खेद व्यक्त करते हुए पत्र दिया। प्रबंधन ने विभागीय जांच शुरू की। जांच अधिकारी ने छात्रा, वरिष्ठ पर्यवेक्षक तथा प्राचार्य के बयान दर्ज किए और कर्मचारी को आरोप सिद्ध मानते हुए रिपोर्ट दी। इसके आधार पर 26 मई 2017 को कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

Created On :   21 Jun 2026 9:03 PM IST

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