बॉम्बे हाई कोर्ट: 18 वर्षों से बीएमसी के सफाई कर्मचारियों को आवास उपलब्ध कराने की सरकारी नीति पर अमल नहीं होने गंभीर चिंता जताई

18 वर्षों से बीएमसी के सफाई कर्मचारियों को आवास उपलब्ध कराने की सरकारी नीति पर अमल नहीं होने गंभीर चिंता जताई
  • सफाई कर्मचारी महानगरपालिका के कर्मचारियों की श्रेणी में सबसे निचले स्तर पर आते हैं
  • केवल इस कारण से उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता
  • अदालत ने बीएमसी आयुक्त को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने और उपलब्ध भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का दिया निर्देश
  • 9 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि सफाई कर्मचारी महानगरपालिका के कर्मचारियों की श्रेणी में सबसे निचले स्तर पर आते हैं, केवल इस कारण से उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है। अदालत ने 18 वर्षों से मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के सफाई कर्मचारियों को आवास उपलब्ध कराने की सरकारी नीति पर अमल नहीं होने गंभीर चिंता जताई और बीएमसी आयुक्त को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने और उपलब्ध भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। 9 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई रखी गई है।

न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले की पीठ ने चंदन शरद पवार समेत अन्य कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहा कि महानगरपालिका की बड़ी मात्रा में भूमि विभिन्न कारणों से उसके भूमि-संग्रह से बाहर हो गई है। कुछ भूमि पर झुग्गियां बनने दी गई और बाद में उन्हें निजी विकासकर्ताओं के माध्यम से झुग्गी पुनर्विकास योजनाओं में उपयोग किया गया। इसके विपरीत महानगरपालिका के अपने सफाई कर्मचारी 18 वर्षों से आवास के अधिकार से वंचित हैं।

पीठ ने बीएमसी आयुक्त पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब न्यायालय के आदेश स्पष्ट हों, तो उनका अक्षरशः और उनकी भावना के अनुरूप पालन किया जाना चाहिए। 10 अगस्त 2026 के आदेश के बावजूद बीएमसी आयुक्त द्वारा 31 अगस्त 2026 को प्रस्तुत किया गया नया हलफनामा न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप पर्याप्त नहीं था। पहले बीएमसी आयुक्त ने यह उचित रुख अपनाया था कि महानगरपालिका की भूमि का आकलन किया जाएगा और ऐसी भूमि की पहचान की जाएगी, जिसका उपयोग वर्ष 2008 की सरकारी नीति को लागू करने के लिए किया जा सके, लेकिन वर्तमान हलफनामा में अपेक्षित स्पष्टता नहीं थी।

पीठ ने बीएमसी आयुक्त को नया एवं विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें महानगरपालिका की सभी संबंधित भूमियों के बारे में भूमि का पूरा विवरण, वर्तमान उपयोग, भूमि की वर्तमान स्थिति और कौन-सी भूमि आवास निर्माण के लिए उपयुक्त हो सकती है। इन सभी बातों की स्पष्ट जानकारी देनी होगी। पीठ ने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ, तो वह एक स्वतंत्र समिति गठित कर महानगरपालिका की भूमि की उपयोगिता और स्थिति की जांच करा सकता है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2008 में ऐसी नीति बनाई थी, जिसके अनुसार महानगरपालिका के सफाई कर्मचारियों को स्वामित्व के आधार पर आवास उपलब्ध कराया जाना था। बीएमसी आयुक्त के हलफनामा में बताया गया कि महानगरपालिका के पास 4176 संपत्तियां पट्टे के आधार पर आवंटित हैं। इसके अलावा 3505 महानगरपालिका-किरायेदारी वाली संपत्तियां हैं, जिनमें कर्मचारी आवास भी सम्मिलित हैं। 3668 रिक्त भूमि-संबंधी किरायेदारियां हैं और विकास योजना में लगभग 8000 मौजूदा सार्वजनिक सुविधाएं हैं। 6000 भूखंड विभिन्न सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए आरक्षित हैं।

Created On :   1 Sept 2026 8:58 PM IST

Tags

Next Story