बॉम्बे हाई कोर्ट का कड़ा रुख: मूलभूत सुविधाओं में देरी पर एमआईडीसी को फटकार, अनुदानित स्कूल से सेवानिवृत्त शिक्षिका को ओपीएस का लाभ देने का आदेश

मूलभूत सुविधाओं में देरी पर एमआईडीसी को फटकार, अनुदानित स्कूल से सेवानिवृत्त शिक्षिका को ओपीएस का लाभ देने का आदेश
  • जेएनपीटी प्रभावितों को पानी-बिजली उपलब्ध कराने पर 27 अक्टूबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
  • समय पर जवाब नहीं देने पर एमआईडीसी के वरिष्ठ अधिकारी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने की चेतावनी
  • 1990 से पेंशन योग्य सेवा में रही सेवानिवृत्त शिक्षिका को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का निर्देश

डिजिटल डेस्क, मुंबई. बॉम्बे हाई कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में नागरिकों के अधिकार और सरकारी दायित्व को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। एक मामले में अदालत ने जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीटी) परियोजना से प्रभावित लोगों को पीने का पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में देरी पर केंद्र सरकार और महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) को फटकार लगाई। दूसरे मामले में अदालत ने पूर्ण अनुदानित स्कूल से सेवानिवृत्त हुई पूर्व मुख्याध्यापिका को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ देने का राज्य सरकार को निर्देश दिया। जेएनपीटी परियोजना प्रभावित लोगों की याचिका पर न्यायमूर्ति मनीष पितले और न्यायमूर्ति श्रीराम वी. शिरसाट की पीठ ने एमआईडीसी को 27 अक्टूबर 2026 तक हलफनामा दाखिल कर अपना जवाब देने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय में जवाब दाखिल नहीं हुआ तो एमआईडीसी के कार्यकारी अभियंता को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि प्रभावित परिवारों को पीने के पानी और बिजली जैसी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। शवों के अंतिम संस्कार के दौरान भी बिजली की समस्या का सामना करना पड़ता है।

दूसरे मामले में न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और डॉ. नीला गोखले की पीठ ने पूर्व मुख्याध्यापिका विद्या विश्वनाथ फड़के की याचिका स्वीकार की। अदालत ने कहा कि पेंशन की पात्रता प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से तय होती है। फड़के 13 जून 1990 से पेंशन योग्य सेवा में थीं और 31 जुलाई 2025 को पूर्ण अनुदानित स्कूल से सेवानिवृत्त हुईं। अदालत ने शिक्षा निरीक्षक का पेंशन प्रस्ताव खारिज करने वाला आदेश रद्द कर ओपीएस और जीपीएफ के तहत लाभ देने का निर्देश दिया स्कूल प्रबंधन को दो सप्ताह में नया पेंशन प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा, जबकि संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह में पेंशन मंजूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

Created On :   2 Oct 2026 8:51 PM IST

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