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राजनीतिक हलचल: विधान परिषद में उद्धव की वापसी के लिए मोर्चेबंदी, महिला आरक्षण पर मचे सियासी घमासान पर ठाकरे ने तत्काल लागू करने की मांग की

Mumbai News. महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (उद्धव) पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे की विधान परिषद में वापसी को लेकर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव) के वरिष्ठ नेताओं ने इसके लिए मोर्चेबंदी शुरू कर दी है और लगभग सभी की राय है कि ठाकरे को दोबारा विधायक बनना चाहिए। पार्टी के भीतर पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही है कि उद्धव ठाकरे स्वयं विधान परिषद जाने के इच्छुक नहीं हैं, लेकिन वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि उन्हें सदन में रहकर अपने विधायकों का नेतृत्व करना चाहिए। इस मुद्दे को उठाने वालों में कई सांसद, विधायक और पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
वापसी का रास्ता आसान?
राज्य में विधान परिषद की 10 सीटों के लिए 12 मई को चुनाव होना है। इनमें से 9 सीटें महायुति के खाते में जानी तय हैं जबकि महाविकास आघाड़ी के तीनो दलों को कुल एक सीट ही मिलने वाली है। ऐसे में एक मात्र सीट से उद्धव ठाकरे के लिए विधान परिषद में दोबारा पहुंचने का रास्ता अपेक्षाकृत आसान दिख रहा है। बताया जा रहा है कि राकांपा (शरद) ने पहले ही शिवसेना (उद्धव) को समर्थन देने का संकेत दे दिया है। दरअसल राज्यसभा चुनाव में उद्धव गुट से मिले समर्थन के बदले यह राजनीतिक समीकरण मजबूत माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक भले ही उद्धव विधान परिषद जाने के इच्छुक नहीं हों लेकिन उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने एक राय बना ली है कि उद्धव को विधान परिषद जाना चाहिए। जिस पर बहुत जल्द फैसला हो सकता है।
कांग्रेस का भी संकेत
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी साफ किया है कि अगर उद्धव ठाकरे स्वयं उम्मीदवार बनते हैं, तो कांग्रेस उनका समर्थन करेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर पार्टी किसी और उम्मीदवार को मैदान में उतारती है, तो समर्थन पर दोबारा विचार किया जाएगा। कुल मिलाकर महाविकास आघाड़ी के सहयोगियों के बीच सहमति बनती दिख रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि उद्धव ठाकरे खुद क्या फैसला लेते हैं।
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देशभर में राजनीतिक हलचल तेज
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देशभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच शिवसेना (उद्धव) पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी स्पष्ट भूमिका सामने रखते हुए केंद्र सरकार से 33 फीसदी महिला आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग की है। ठाकरे ने कहा कि वर्ष 2023 में संसद द्वारा महिला आरक्षण विधेयक पारित किया जा चुका है, ऐसे में इसके क्रियान्वयन में देरी का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार तत्काल मिलना चाहिए। उद्धव ठाकरे ने इसके साथ ही निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन यानी डिलिमिटेशन के मुद्दे पर फिलहाल रोक लगाने की बात कही है। उनके अनुसार यह विषय बेहद संवेदनशील और व्यापक प्रभाव वाला है, जिस पर जल्दबाजी में निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल के भविष्य का नहीं, बल्कि देश के भविष्य और राष्ट्रीय एकता का सवाल है। इसलिए इस पर गहन चर्चा और विस्तृत अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए आरक्षण को तुरंत लागू करना जरूरी है, जबकि डिलिमिटेशन जैसे मुद्दों पर सोच-समझकर कदम उठाना देशहित में होगा।
Created On :   16 April 2026 8:47 PM IST










