मुंबई क्राइम ब्रांच: साउथ गोवा में छापेमारी, बड़े साइबर ठगी सिंडिकेट का हुआ भंडाफोड़, 7 आरोपी गिरफ्तार

साउथ गोवा में छापेमारी, बड़े साइबर ठगी सिंडिकेट का हुआ भंडाफोड़, 7 आरोपी गिरफ्तार
  • मुंबई समेत कई राज्यों से हुई ठगी के 400 करोड़ रुपए एप के ज़रिए विदेशों में भेज चुके थे आरोपी
  • 1.50 लाख रुपए किराए के विला में बैठकर करते थे ठगी की रकम का मनी लॉंड्रिंग
  • मिलती थी 35-40 हज़ार सैलरी, विदेशों में मनी ट्रांसफर करने के लिए सिंडिकेट ने बनाया था ख़ुद का एप

डिजिटल डेस्क, मुंबई. डिजिटल युग में देश भर के निर्दोष नागरिकों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वाले एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच की यूनिट-5 ने दक्षिण गोवा के तटीय इलाके वारका स्थित एक बेहद आलीशान रिसॉर्ट के विला में दबिश देकर 7 शातिर साइबर अपराधियों को धर दबोचा। यह गिरोह देश के विभिन्न हिस्सों से ठगी गई करीब 400 करोड़ रुपए की विशाल राशि को अपने विशेष ऐप और हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेशों में ट्रांसफर कर चुका है।

गोपनीय सूचना से खुला फर्जीवाड़े का जाल

मामले का खुलासा 11 सितंबर 2026 को हुआ, जब क्राइम ब्रांच को फर्जी सिम कार्डों और कई बैंक खातों का उपयोग कर ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के बारे में सटीक गोपनीय सूचना मिली। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 61, 45, 3(5) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया। इस दौरान शुरुआती जांच में पुलिस ने 3 आरोपियों किया था और उनके कब्जे से साइबर अपराध में प्रयुक्त भारी मात्रा में सामग्री जब्त की, जिसमें 88 विभिन्न बैंकों की पासबुक, 143 चेकबुक, 100 एटीएम सह डेबिट कार्ड, 24 मोबाइल फोन और 167 एक्टिवेटेड सिम कार्ड शामिल थे।

1.50 लाख के विला में बना था साइबर वॉर रूम

पहले पकड़े गए आरोपियों के पास से मिले सुरागों, तकनीकी विश्लेषण और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम 13 सितंबर 2026 को गोवा पहुँची। वारका स्थित एक रिसॉर्ट के विला में छापेमारी के दौरान पुलिस भी हैरान रह गई। आरोपियों ने पुलिस की नजरों और जांच एजेंसियों की रडार से बचने के लिए 1.50 लाख रुपए प्रति माह के भारी-भरकम किराए पर एक लग्जरी विला ले रखा था। इसी विला को उन्होंने अपना साइबर ऑपरेशन्स सेंटर बनाया हुआ था। पुलिस ने मौके से मुख्य ऑपरेशन्स संभाल रहे 7 आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान तेजसकुमार डाबघर, पीयूष चावड़ा, जितेन्द्र सिंह राजपूत,दलपत सिंह राजपूत,वनराज सिंह वाघेला,योगेशकुमार पटेल और गौतम माली के रूप में हुई है। विला से पुलिस ने हाई-टेक उपकरणों का जखीरा बरामद किया, जिसमें 59 आधुनिक स्मार्टफोन, 19 विभिन्न कंपनियों के सिम कार्ड, 09 हाई-स्पीड लैपटॉप, 51 एटीएम कार्ड और 12 पासबुक शामिल हैं। पुलिस उपायुक्त राजतिलक रौशन ने बताया कि साइबर ठगी में इस्तेमाल होने बैंक खाते मुंबई में खुलवाकर उनकी वेलकम किट बसों के ज़रिए गोवा भेजी जाती थी और इसके बाद उसका इस्तेमाल ठगी के पैसों को घुमाने में किया जाता था। इस मामले में कुछ फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस भी रडार पर हैं, जिनकी जाँच की जा रही है।

मनी लॉन्ड्रिंग का अनोखा तरीका, खुद का ऐप और फिक्स सैलरी

जांच में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि इस गिरोह ने ठगी के 400 करोड़ रुपए की अवैध कमाई को बिना किसी बैंकिंग रुकावट के विदेश भेजने के लिए अपना एक खुद का एप्लिकेशन तैयार किया था। इस ऐप के जरिए मिनटों में भारतीय करेंसी को अंतरराष्ट्रीय खातों, हवाला और क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था। यह सिंडिकेट फर्जी या किराए के बैंक खातों का नियंत्रण अपने हाथ में रखता था। विला में काम करने वाले इन 7 आरोपियों को गिरोह के मुख्य आकाओं द्वारा 35,000 से 40,000 रुपए प्रतिमाह की फिक्स सैलरी दी जाती थी। अदालत ने गिरफ्तार आरोपियों को 24 सितंबर 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। मुंबई क्राइम ब्रांच अब इस सिंडिकेट के अंतरराष्ट्रीय तारों और मुख्य सरगना को बेनकाब करने में जुटी है।

..

Created On :   16 Sept 2026 8:52 PM IST

Tags

Next Story