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महाराष्ट्र सूखा: शरद पवार ने कहा - मांगें नहीं मानीं तो सड़क पर उतरकर संघर्ष करेंगे, सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी

डिजिटल डेस्क, मुंबई. महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को लेकर राकांपा (शरद) ने राज्य सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में हुई पार्टी की बैठक में सूखा राहत और किसानों की समस्याओं पर चर्चा हुई। पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि सरकार के सामने पहले बातचीत के जरिए मांगें रखी जाएंगी। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो पार्टी सड़क पर उतरकर संघर्ष करेगी। पवार ने कहा कि हमें लड़ाई नहीं करनी है, लेकिन अगर मांगें नहीं मानी गईं तो सड़क पर उतरेंगे। अगले दो-चार दिनों में सरकार के सामने इन मांगों को मजबूती से रखा जाएगा।
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265 तहसीलें सूखाग्रस्त, कई फसलें राहत से बाहर
पवार ने कहा कि राज्य में 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, लेकिन कई क्षेत्र और फसलें अभी भी राहत के दायरे से बाहर हैं। उन्होंने केले की फसल को पर्याप्त सहायता नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों को सरकारी योजनाओं और राहत उपायों की जानकारी देने के लिए बड़े स्तर पर जन जागरण जरूरी है। उन्होंने अपने केंद्रीय मंत्रिमंडल के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि सूखे के समय किसानों को तत्काल मदद पहुंचाने के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। पवार ने जालना में मोसंबी उत्पादकों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय मोसंबी की फसल के लिए 25 हजार रुपये की सहायता घोषित की गई थी।
पवार ने किसानों के कर्ज को लेकर भी जागरूकता की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि यदि किसान कर्ज का बकाया चुका नहीं पाता है तो उसे नया कर्ज मिलने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे मामलों में किसानों को नियमों और उपलब्ध राहत उपायों की जानकारी होना जरूरी है। पवार ने बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि बारामती में एआई की शिक्षा के लिए संस्था स्थापित की गई है और आने वाले समय में एआई कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से एआई से जुड़े लेख पढ़ने और इस तकनीक को समझने की मानसिकता विकसित करने की अपील की।
Created On :   28 Sept 2026 10:15 PM IST








