मंत्रालय आने की जरूरत नहीं: बावनकुले ने कहा - शासकीय भूमि के शर्तभंग मामलों के निपटारे का जिलाधिकारी को है अधिकार

बावनकुले ने कहा - शासकीय भूमि के शर्तभंग मामलों के निपटारे का जिलाधिकारी को है अधिकार
  • शासकीय भूमि से जुड़े शर्तभंग मामलों के निपटारे का बड़ा निर्णय
  • मंत्रालय तक जाने की आवश्यकता नहीं
  • मामलों का निपटारा स्थानीय स्तर पर शिविर लगाकर किया जा सकेगा

Nagpur News. राज्य सरकार ने शासकीय भूमि से जुड़े शर्तभंग मामलों के निपटारे का बड़ा निर्णय लिया है। पहले इन मामलों के निपटारे का अधिकार राजस्व मंत्री के पास था, लेकिन अब यह अधिकार संभागीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को सौंप दिया गया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इस निर्णय से नदी किनारे, शासकीय स्वामित्व वाली तथा अन्य सरकारी जमीनों से जुड़े शर्तभंग मामलों का निपटारा स्थानीय स्तर पर शिविर लगाकर किया जा सकेगा। इससे नागरिकों को मंत्रालय तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था की मांग पिछले दस वर्षों से की जा रही थी। शर्तभंग मामलों में लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि में भी बड़े पैमाने पर कमी की गई है। इससे आम नागरिकों को आर्थिक राहत मिलेगी और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।

10 प्रतिशत रेत आरक्षित

नई रेत नीति के तहत कुल रेत भंडार का 10 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय उपयोग के लिए आरक्षित रखा गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना, घरकुल योजना तथा निजी निर्माण कार्यों के लिए यह रेत 600 रुपये प्रति ब्रास की दर से उपलब्ध कराई जाएगी। अगले पांच वर्षों में प्राकृतिक नदी रेत के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से बंद कर कृत्रिम रेत (एम-सैंड) को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रत्येक जिले में स्टोन क्रशर स्थापित करने का आह्वान किया गया है। ताप विद्युत परियोजनाओं की राख से भी रेत निर्माण के विकल्प विकसित किए जाएंगे।

बंद खदानों को बनाया जाएगा ग्रीन जोन

जिले की बंद पड़ी पत्थर खदानों में कोराडी और खापरखेड़ा ताप विद्युत परियोजनाओं की राख भरकर गड्ढों को समतल किया जाएगा। इसके बाद वहां बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर ग्रीन जोन विकसित किया जाएगा।

परिषद चुनाव को निर्विरोध कराने के लिए भाजपा के दबाव के आरोप को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने निराधार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि किसी भी उम्मीदवार पर दबाव नहीं बनाया गया। जहां निर्विरोध चुनाव हुए हैं, वहां सभी संबंधित लोगों का उन्होंने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा है कि जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां अनावश्यक चुनाव खर्च से बचने के लिए निर्विरोध चुनाव उचित व स्वागत योग्य है। राज्य में विधान परिषद की 6 सीटों के लिए निर्विरोध चुनाव हुए हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाए हैं कि भाजपा ने उम्मीदवारों पर दबाव डाला। दबाव के कारण उम्मीदवार ने नाम वापस लिए। इस विषय पर बावनकुले ने कहा कि राज्य में किसी भी उम्मीदवार पर दबाव डालने का एक भी उदाहरण नहीं है। नामांकन वापस लेने वाले उम्मीदवारों ने अपने राजनीतिक आकलन के आधार पर निर्णय लिया है।

Created On :   5 Jun 2026 9:15 PM IST

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