काक्रोच पार्टी के बाद अब ईजेपी का आंदोलन: ई-20 पेट्रोल को लेकर केंद्र के खिलाफ खुलने जा रहा है बड़ा मोर्चा, सोशल मीडिया से सड़क तक भारी विरोध की तैयारी

ई-20 पेट्रोल को लेकर केंद्र के खिलाफ खुलने जा रहा है बड़ा मोर्चा, सोशल मीडिया से सड़क तक भारी विरोध की तैयारी
  • ई-20 पेट्रोल पर सियासत गरम
  • नितीन गडकरी के इस्तीफे की मांग
  • ई-20 जनता पार्टी' ने छेड़ा अभियान

Nagpur News. नीट पेपर लीक मामले में काक्रोच पार्टी के आंदोलन से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी केंद्र सरकार की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही। अब इथेनॉल मिश्रित ई-20 पेट्रोल को लेकर जारी विरोध अब सोशल मीडिया से निकलकर संगठित आंदोलन का रूप लेने लगा है। "ई-20 जनता पार्टी (ईजेपी)" नाम से सक्रिय एक नए संगठन ने केंद्र सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितीन गडकरी के इस्तीफे की मांग की है। इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है।

संगठन का दावा है कि मौजूदा इथेनॉल मिश्रण नीति में कई व्यावहारिक खामियां हैं। उसका कहना है कि यदि सरकार नीति में बदलाव करे तो पेट्रोल की कीमतों में कमी लाई जा सकती है। ईजेपी का आरोप है कि वाहन मालिकों पर केवल ई-20 पेट्रोल खरीदने का दबाव नहीं होना चाहिए। उपभोक्ताओं को अपने वाहन की तकनीकी क्षमता और जरूरत के अनुसार ईंधन चुनने की आजादी मिलनी चाहिए।


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इसी मांग को लेकर संगठन ने देशभर के पेट्रोल पंपों पर ई-0 (100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल), ई-20 और ई-85 तीनों प्रकार के ईंधन उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। साथ ही तीनों ईंधनों की कीमतों में स्पष्ट अंतर रखने की भी वकालत की है, ताकि उपभोक्ताओं को वास्तविक विकल्प मिल सके। संगठन लगातार 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी कर रहा है।

ईजेपी का दावा है कि उसे देश के कई शहरों के परिवहन संगठनों और वाहन चालकों का समर्थन मिल रहा है। संगठन अब देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाने के साथ संसद तक मार्च की तैयारी में भी जुट गया है। इसके लिए विभिन्न राज्यों में संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।

इस बीच एक्स और इंस्टाग्राम पर "ई-20 जनता पार्टी" के नाम से अभियान तेजी से फैल रहा है। समर्थक लगातार पोस्ट और वीडियो साझा कर ई-20 नीति का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, संगठन के संस्थापक और शीर्ष नेतृत्व की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, ईजेपी का कहना है कि वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने की स्वतंत्रता भी मिलनी चाहिए।


Created On :   27 July 2026 8:32 PM IST

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