सलाह: एनएचआरसी का महिला कैदियों और उनके बच्चों के मानवाधिकारों के संरक्षण पर जोर, 9 मंत्रालय - सरकारों और डीजीपी को जारी परामर्श

एनएचआरसी का महिला कैदियों और उनके बच्चों के मानवाधिकारों के संरक्षण पर जोर, 9 मंत्रालय - सरकारों और डीजीपी को जारी परामर्श
  • संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता
  • सर्वोत्तम हितों की सुरक्षा, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण के लिए सार्थक अवसरों की मांग

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 'महिला कैदियों और उनके बच्चों के मानवाधिकारों के संरक्षण' को लेकर नौ केंद्रीय मंत्रालयों, मुख्य सचिवों सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) को एक परामर्श जारी किया है।

एनएचआरसी ने जारी परामर्श में कहा है कि कैदियों के अधिकारों और जरूरतों, जिनमें महिला कैदी और उनके बच्चे शामिल हैं, इन पर विशेष ध्यान और लैंगिक समानता को मद्देनजर में रखते हुए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। हिरासत संबंधी सुरक्षा उपायों के अलावा यह मानवीय जेल स्थितियों, पर्याप्त मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, न्याय तक पहुंच, पारिवारिक संबंधों के संरक्षण, बच्चों के सर्वोत्तम हितों की सुरक्षा, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण के लिए सार्थक अवसरों की मांग करता है।

इस परामर्श में कार्रवाई के लिए दस व्यापक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इनमें प्रवेश पूर्व प्रक्रिया, गिरफ्तारी और कारागार प्रणाली में प्रवेश, प्रवेश रिकॉर्ड, बाल डेटाबेस और दस्तावेज़ीकरण, स्वास्थ्य, चिकित्सा देखभाल महिला कैदी के रहने की स्थिति, स्वच्छता, कल्याण और संवेदीकरण, कैदियों के साथ रहने वाले या उनसे अलग रहने वाले बच्चे, संचार, मुलाक़ात और परिवार से संपर्क के अलावा कई बिंदु शामिल हैं। आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे परामर्श में दी गई सिफारिशों को लागू कर दो महीने के भीतर एक कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने को कहा है।

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