केंद्रीय कक्ष: उपराष्ट्रपति ने कहा - समृद्ध विरासत के कारण मायने में लोकतंत्र की जननी है भारत

उपराष्ट्रपति ने कहा - समृद्ध विरासत के कारण मायने में लोकतंत्र की जननी है भारत
  • वैश्विक सहयोग के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित हुआ है ब्रिक्स
  • भारत के लिए लोकतंत्र कोई नई अवधारणा नहीं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली. राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग लेने आए ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडलों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के लिए लोकतंत्र कोई नई अवधारणा नहीं है। इतिहास गवाह है कि उत्तर में वैशाली जैसी जगहों पर लोकतंत्र मौजूद था, जबकि दक्षिण में चोल शासकों ने 'कुडावोलाई' प्रणाली को अपनाया था। इसी गहरी विरासत के कारण भारत को सही मायने में 'लोकतंत्र की जननी' कहा जाता है।

उपराष्ट्रपति ने सदस्य और साझेदार देशों के पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के लिए दोपहर के भोज का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, ब्रिक्स और साझेदार देशों की संसदों के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी, केंद्रीय मंत्री राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश;,राज्यसभा और लोकसभा के महासचिव, ब्रिक्स और साझेदार देशों के अधिकारी तथा अन्य गणमान्य अतिथि शामिल हुए।

राधाकृष्णन ने इस दौरान ब्रिक्स के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंच वैश्विक सहयोग के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित हुआ है। उन्होंने ब्रिक्स को एक ऐसे मंच के रूप में वर्णित किया, जहाँ विविध संस्कृतियाँ, समृद्ध इतिहास और गतिशील अर्थव्यवस्थाएँ एक साथ आती हैं। इनका साझा उद्देश्य एक संतुलित, समावेशी और समृद्ध विश्व व्यवस्था का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान हुई चर्चाएँ और विचार-विमर्श, सदस्य और साझेदार देशों के उस सामूहिक संकल्प को दर्शाते हैं, जिसके तहत वे एकजुटता, संवाद और आपसी विश्वास के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का सामना करना चाहते हैं।

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