पेरिस से 5 गुना बड़ा प्रोजेक्ट: खावड़ा में आकार ले रहा दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, परियोजना पूरी होने पर 1.7 करोड़ से अधिक घर होंगे रोशन

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने में निजी कंपनियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अदाणी ग्रीन एनर्जी का वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। इसी कड़ी में गुजरात के कच्छ जिले में स्थित खावड़ा परियोजना से वर्ष 2029 तक 30 गीगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें सौर और पवन ऊर्जा, दोनों शामिल हैं।
11 गीगावाट से अधिक क्षमता से उत्पादन शुरू
भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में विकसित हो रहे खावड़ा ऊर्जा पार्क की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह लगभग 538 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसका क्षेत्रफल फ्रांस की राजधानी पेरिस से करीब 5 गुना बड़ा और मुंबई महानगर के लगभग बराबर है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद इस परियोजना से वर्तमान में 11 गीगावाट से अधिक सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता चालू हो चुकी है। पूरी क्षमता विकसित होने के बाद यह दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क बनने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगा।
खावड़ा जैसे शुष्क और बंजर क्षेत्र में विकसित हो रही इस परियोजना से पूरी क्षमता पर उत्पादन शुरू होने के बाद 1.7 करोड़ से अधिक घरों को बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। यहां सौर और पवन ऊर्जा की पूरी क्षमता विकसित होने पर सालाना 87.4 अरब यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। यह मात्रा बेल्जियम, चिली और स्विट्जरलैंड जैसे देशों की वार्षिक बिजली खपत के बराबर बताई जा रही है।
लगाए जाएंगे 6 करोड़ से अधिक सोलर पैनल
खावड़ा में 538 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे अदाणी के नवीकरणीय ऊर्जा पार्क में 6 करोड़ से अधिक सोलर पैनल और लगभग 770 विंड टर्बाइन लगाने की योजना है। इस परियोजना में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज को एकीकृत किया जा रहा है। बिजली उत्पादन और संचालन की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तथा डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सोलर ट्रैकर सूर्य की दिशा के अनुसार पैनलों का रुख बदलते हैं, जिससे सूर्य की रोशनी का अधिकतम उपयोग किया जा सके। वहीं, रोबोटिक तकनीक से युक्त एनर्जी नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर के माध्यम से संयंत्र की निगरानी की जाती है। पानी की कमी वाले कच्छ क्षेत्र में सोलर पैनलों की सफाई के लिए वाटरलेस रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पानी की खपत कम करने में मदद मिलती है।
6.6 गीगावाट-घंटे की बैटरी स्टोरेज क्षमता
परियोजना के वरिष्ठ पदाधिकारी एम. मुकेश के अनुसार, खावड़ा ऊर्जा पार्क में 6.6 गीगावाट-घंटे की बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित की जा रही है। इससे उत्पादित बिजली के भंडारण और जरूरत के अनुसार उसकी आपूर्ति में मदद मिलेगी। इस तरह खावड़ा केवल बिजली उत्पादन का केंद्र ही नहीं, बल्कि आधुनिक ऊर्जा संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास का भी बड़ा उदाहरण बन रहा है।
परियोजना के तहत अब तक लगभग 1,050 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, 200 किलोमीटर से अधिक लंबा ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क विकसित किया गया है। विशाल क्षेत्र में फैले इस ऊर्जा पार्क में परिवहन, संचार और डिजिटल निगरानी से जुड़ी सुविधाओं का विकास भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Created On :   22 Oct 2026 6:36 PM IST












