Exclusive Interview: महिलाओं के हाथों में सत्ता हो, तो ताकत की परिभाषा बदल जाती है: राधिका आप्टे

महिलाओं के हाथों में सत्ता हो, तो ताकत की परिभाषा बदल जाती है: राधिका आप्टे
नेटफ्लिक्स की आगामी सीरीज 'अक्का' में राधिका आप्टे एक बार फिर दमदार किरदार में नजर आने वाली हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अभिनेत्री ने ताकत और सत्ता के बदलते मायने, खूबसूरती के तय पैमानों, महिलाओं की स्वतंत्रता और कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि क्यों अपनी शर्तों पर जीना ही असली ताकत है और असफलता के डर से नए प्रयोग करना क्यों नहीं छोड़ना चाहिए। जानिए राधिका आप्टे ने सिनेमा, समाज और अपने अभिनय सफर को लेकर क्या कुछ कहा।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। सिनेमा में लंबे समय तक ताकत, सत्ता और हिंसा की कहानियां पुरुष किरदारों के इर्द-गिर्द बुनी जाती रही हैं। अब महिलाएं भी सत्ता के केंद्र में हैं, अपने फैसले ले रही हैं और टकराव से पीछे नहीं हट रहीं। 30 अक्टूबर को रिलीज हो रही नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘अक्का’ में राधिका आप्टे इसी बदली हुई दुनिया का हिस्सा हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने अपने किरदार, ताकत के मायने, खूबसूरती के तय पैमानों, कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी और नए प्रयोगों पर बात की।

‘ऐसी दुनिया में काम करना मेरे लिए नया अनुभव था’

‘अक्का’ की दुनिया मेरे लिए बिल्कुल नई थी। मैंने पहले भी मजबूत किरदार निभाए हैं, लेकिन इसका अंदाज अलग और स्टाइलिश है। इसमें एक्शन, टकराव और संवादों को खास तरीके से पेश किया गया है। बचपन में 80 और 90 के दशक की फिल्में देखते हुए ऐसे ताकतवर और हिंसक किरदार ज्यादातर पुरुषों को निभाते देखा था। ऐसे में खुद को इस दुनिया का हिस्सा बनते देखना रोमांचक अनुभव रहा।

‘ताकत का मतलब अपनी शर्तों पर जीना है’

मेरे लिए ताकत का मतलब है कि आप जो करना चाहती हैं, उसे कर सकें और जो कहना चाहती हैं, उसे कह सकें। आपको अपनी जिंदगी के फैसले लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और अपनी शर्तों पर जीने का अधिकार होना चाहिए। ताकत का एक अर्थ संयम भी है। सिर्फ इसलिए कि आप कुछ कर सकते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि आपको वह करना ही चाहिए। इंसान अक्सर जरूरत से ज्यादा हासिल करने की कोशिश करता है। हमें समझना चाहिए कि वास्तव में कितने पैसे, कितनी जगह और कितनी चीजों की जरूरत है। अपनी जरूरतों को पहचानना और उन पर नियंत्रण रखना भी ताकत है।

‘बचपन में लगता था कि मैं सुंदर नहीं हूं’

जब मैं बड़ी हो रही थी, तब कई बार मुझे लगता था कि मैं सुंदर नहीं हूं या मुझमें कुछ कमी है। इसकी एक वजह पर्दे पर दिखाई जाने वाली खूबसूरती की छवि भी थी। किसी कलाकार को सुंदर दिखाने के लिए मेकअप, हेयरस्टाइल, कपड़े, लाइटिंग और कैमरे का इस्तेमाल होता है, लेकिन दर्शक अक्सर यह भूल जाते हैं। छोटी लड़कियां कलाकारों को देखकर प्रेरित होती हैं और कई बार खुद की तुलना उनसे करने लगती हैं।

कलाकारों को जिम्मेदार रहना चाहिए

कलाकारों को सोचना चाहिए कि वे किस तरह की सोच को बढ़ावा दे रहे हैं। आज महिलाएं सुंदरता के तय पैमानों पर खरा उतरने के लिए कई तरह के बदलाव करवा रही हैं। अगर हम उम्र को लेकर भेदभाव करते हैं या अपने शरीर को लेकर शर्मिंदगी जताते हैं, तो नई पीढ़ी भी उससे प्रभावित हो सकती है। हमारी जिम्मेदारी सिर्फ अच्छा अभिनय करने तक सीमित नहीं है। हमें अपने शब्दों और व्यवहार के प्रति भी सजग रहना चाहिए।

‘अलग लोगों की कहानियों को मिलनी चाहिए जगह’

मुझे लगता है कि सिनेमा में अब अलग-अलग तरह की कहानियों के लिए जगह बढ़ रही है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लेखक और फिल्मकार अपनी संस्कृति, अनुभव और नजरिया लेकर आते हैं। इससे कहानियां कुछ चुनिंदा लोगों की जिंदगी तक सीमित नहीं रहतीं। हर इंसान चाहता है कि पर्दे पर उसे अपनी जिंदगी और संघर्षों की झलक दिखाई दे। जब आप किसी ऐसे किरदार को देखते हैं, जिसकी परिस्थितियां आपसे मिलती-जुलती हैं, तो आपको लगता है कि अगर वह ऐसा कर सकता है, तो आप भी कर सकते हैं। यही कहानी कहने की ताकत है। सिनेमा हमें अपनी जिंदगी और संभावनाओं को नए नजरिए से देखने का अवसर देता है।

‘असफलता के डर से नए प्रयोग नहीं छोड़ सकती’

मैंने हमेशा ऐसे प्रोजेक्ट करने की कोशिश की है, जिनमें कुछ नया करने का मौका मिले। ‘ओके कंप्यूटर में भी हमने अलग तरह का प्रयोग किया था। वह उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हुआ, लेकिन मुझे इसका अफसोस नहीं है। अगर आप कुछ नया करना चाहते हैं, तो जोखिम लेना पड़ेगा। हर प्रयोग सफल नहीं होगा, लेकिन असफलता के डर से कोशिश करना बंद नहीं कर सकते। मैं बार-बार वही नहीं करना चाहती, जो पहले से करती आई हूं। एक कलाकार के तौर पर मेरे लिए जरूरी है कि मैं अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलूं और ऐसी भूमिकाएं चुनूं, जो मुझे चुनौती दें। नए प्रयोग ही आगे बढ़ने और खुद को एक कलाकार के रूप में बेहतर समझने का मौका देते हैं।

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