बीमित का आरोप: जिम्मेदार कर रहे हमारे साथ धोखाधड़ी: पीलिया के इलाज का क्लेम नहीं दे रही आदित्य बिरला इंश्योरेंस कंपनी

September 30th, 2022

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। बीमारी कोई भी हो नियमानुसार क्लेम देने का दावा बीमा कंपनियाँ करती हैं पर जब जरूरत पड़ती है तो सारे दावों की पोल खुलकर सामने आ जाती है। बीमा कंपनियाँ अपने लिंक अस्पताल में भी कैशलेस नहीं कर रही हैं और जब पॉलिसी धारक बीमा कंपनी में सारे दस्तावेजों के साथ बिल सबमिट करते हैं तो उन्हें सर्वेयर टीम के साथ क्लेम डिपार्टमेंट के अधिकारी इस तरह पॉलिसी धारक पर धावा बोल देेते हैं, जैसे की उसने बीमा कंपनी की पॉलिसी लेकर अपराध कर दिया हो।

अनेक क्वेरी के साथ लंबे समय तक चक्कर लगवाना व मेल का जवाब नहीं देना जैसे अनेक प्रकार से परेशान करने का सिलसिला बीमा कंपनी के द्वारा किया जाने लगता है और फिर अचानक बीमा कंपनी सारे दस्तावेजों को झूठा बताकर या फिर पुरानी बीमारी का हवाला देकर नो क्लेम करने का लेटर ग्राहकों के घरों में भेज देती है। बीमित आरोप लगाते हुए माँग करने लगे हैं कि बीमा कंपनी के प्रबंधकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई प्रशासन के द्वारा की जानी चाहिए।

इन नंबरों पर बीमा से संबंधित समस्या बताएँ

स्वास्थ्य बीमा से संबंधित किसी भी तरह की समस्या आपके साथ भी है तो आप दैनिक भास्कर मोबाइल नंबर - 9425324184, 9425357204 पर बात करके प्रमाण सहित अपनी बात दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक रख सकते हैं। संकट की इस घड़ी में भास्कर द्वारा आपकी आवाज को खबर के माध्यम से उचित मंच तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।

अस्पताल में इलाज कराने की जरूर नहीं थी बीमित को

रीवा संजय नगर निवासी चंद्रिका प्रसाद पटेल ने अपनी शिकायत में बताया कि आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से स्वास्थ्य बीमा कराया हुआ था। पॉलिसी क्रमांक 007430616 का कैशलेस कार्ड भी बीमा कंपनी ने दिया है। जून 2022 में स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें इलाज के लिए रीवा के निजी अस्पताल में ही भर्ती होना पड़ा था। वहाँ पर चिकित्सकों के द्वारा इलाज किया गया। इलाज के दौरान बीमा कंपनी ने कैशलेस नहीं किया। बीमित को अपने इलाज का खुद ही पूरा भुगतान करना पड़ा। ठीक होने के बाद बीमा कंपनी में सारे दस्तावेज व बिल बीमा कंपनी में सबमिट किए गए तो क्लेम डिपार्टमेंट व सर्वेयर टीम के सदस्यों ने उसमें अनेक प्रकार की क्वेरी निकालीं। बीमित ने सबका जवाब दिया और जिम्मेदारों ने जल्द क्लेम देने का दावा तो किया पर महीनों बाद भी इलाज का भुगतान नहीं किया। बीमित लगातार संपर्क कर रहा है पर बीमा अधिकारी क्लेम के संबंध में कोई जवाब नहीं दे रहे हैं और अचानक यह कह दिया कि आपको घर पर रहकर इलाज कराना था। अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत ही नहीं थी। परेशान होकर बीमित कंज्यूमर कोर्ट व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में बीमा कंपनी के प्रबंधन के विरुद्ध आवेदन देकर कार्रवाई के लिए गुहार लगा रहा है।

खबरें और भी हैं...