चरम पर कालाबाजारी : महाजेनको में भेजा जा रहा बिना वॉश किया मिलावटी कोयला 

November 2nd, 2021

डिजिटल डेस्क, चंद्रपुर। बिजली उत्पादन बढ़ाने और प्रदूषण कम करने के लिए कोयला वॉश करने का काम एसीबी इंडिया लिमिटेड वॉशरी को दिया गया है, किंतु इस वॉशरी की हालत इस कदर खराब हो चुकी है कि कई बार ब्रेक डाउन होने के कारण बगैर वॉश किया हुआ कोयला ही सीधे महाजेनको में भिजवाया जा रहा है। साथ ही अच्छे कोयले में घटिया स्तर के कोयले की मिलावट कर बिजली केंद्र को भेजने का गोरखधंधा बेखौफ चल रहा है जिसका खामियाजा बिजली केंद्र को भुगतना पड़ रहा है। इसका सीधा असर अप्रत्यक्ष रूप से नागरिकों पर पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार जिले के पांढरपवनी स्थित एसीबी इंडिया लिमिटेड की वॉशरी बरसों से बंद थी। हाल ही में इसे शुरू किया गया किंतु निरंतर नहीं चल पा रही है। वॉशरी की कोयला धोने की क्षमता 2 से 2.5 हजार टन है। कामगारों के मुताबिक वॉशरी एक-दो दिन चलती है फिर ब्रेक डाउन के कारण काम ठप पड़ जाता है। इस कारण ज्यादातर कोयला बगैर वॉश किए ही रेलवे साइडिंग पर पहुंचाया जा रहा है। साथ ही अधिकांश कोयला िनजी कंपनियों को भी बेचा जा रहा है। वर्धा तथा नागपुर की कुछ कंपनियों के साथ ही जिले की डालमिया सीमेंट कंपनी तथा अलग-अलग राज्यों में भी यहां से बड़े पैमाने पर कोयला भिजवाया जा रहा है। बताया जाता है कि, खदान से आए हुए कोयले को मजदूर लगाकर उसकी छंटनी की जाती है। बड़ा कोयला अलग गाड़ियों में लोड किया जाता है तथा प्रोसेसिंग कोयला (चूरीवाला) रेलवे साइडिंग के बाजू में डंप किया जाता है। यह गोरखधंधा जब से वॉशरी शुरू हुई तब से चल रहा है। अप्रैल से लेकर अक्टूबर माह तक लाखों टन कोयला एसीबी इंडिया लिमिटेड, वॉशरी द्वारा महाजेनको को भेजा जा चुका है। 

वेकोलि की रेलवे साइडिंग से ही चल रहा गोरखधंधा

30 दिसंबर 2020 को तत्कालीन सीएमडी राजीव रंजन मिश्र ने रेलवे साइडिंग का उ्दघाटन किया था। लेकिन वेकोलि ने अपने कार्य के लिए इस रेलवे साइिडंग का इस्तेमाल न करते हुए वॉशरी एसीबी इंडिया को इसका जिम्मा क्यों सौंपा यह समझ से परे है। वहां मौजूद एक वेकोलि कामगार के अनुसार जबसे रेलवे साइडिंग शुरू हुई है तब से अब तक वेकोलि की स्वयं की एक भी रैक नहीं गई। वॉशरी इसे सिर्फ अपने गोरखधंधे के लिए इस्तेमाल करती आ रही है।

सू्त्रों के अनुसार विदर्भ में 5 कोल वॉशरी सिर्फ कागजों पर शुरू है। वहीं दो वॉशरी का काम आरंभिक दौर में है किंतु एक भी वाॅशरी िनयमित रूप से रोजाना कोयला वॉश नहीं कर पा रही है। ज्यादातर वॉशरी कबाड़ हो चुकी है और पिछले 7 सालों से बंद भी पड़ी थी। कोई भी वॉशरी नियमित रूप से नहीं चल पा रही है। रोजाना किसी न किसी तरह के मेंटेनेंस की जरुरत पड़ ही जाती है।  वॉशरी को 430 रुपए  प्रति टन कोयला वॉश करने के लिए मिलते हंै परंतु वॉश के नाम पर करोड़ों रुपए का खेल चल रहा है। रोजाना मिक्स कोयला बगैर वॉश किए ही महाजेनको को पहुंचाया जा रहा है।

कमीशन के लिए तेरी भी चुप मेरी भी चुप

विशेष सूत्रों के अनुसार महाजेनको, वेकोिल व एमएसएमसी अधिकारियों की मिलीभगत से यह गोरखधंधा चल रहा हैै। सभी अधिकारियों का कमिशन टन के हिसाब से फिक्स है। बताया जाता है कि, सीएमडी के सेक्रेटेरी की छत्रछाया में कोल वॉशरी का धंधा फलफूल रहा है, जिससे वेकोलि के नागपुर मुख्यालय, वणी वेकोलि क्षेत्र तथा बल्लारपुर के अधिकारी मालामाल हो चुके हैं। 

निरीक्षण के लिए टीम भिजवायी है 

संजय. पी. रहाटे, अधीक्षक अभियंता ( कोल प्रोक्योरमेंट यूनिट) नागपुर का कहना है कि एसीबी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की वॉशरी शुरू है। मैंने अपनी टीम को वहां भेजा है। 80 हजार टन हर महीने का कोयला वॉश हो रहा है। अप्रैल माह से लेकर अब तक लगभग 100 रैक कोयला महाजेनको को प्राप्त हो चुका है। 

वॉशरी प्रबंधक ने नहीं उठाया फोन 

इस संबंध में एसीबी इंडिया लिमिटेड का पक्ष जानने के लिए प्रबंधक प्रदीपकुमार वर्मा से कई बार उनके मोबाइल पर संपर्क साधने का प्रयास किया गया परंतु उन्होंने अपना फोन ही नहीं उठाया। उन्हें मोबाइल पर मेसेज भी भेजा गया परंतु उन्होंने इसका भी कोई रिप्लाय नहीं दिया।

संचालक नहीं दे रहे जवाब

इस विषय को लेकर एसीबी इंडिया नागपुर के डायरेक्टर अजय मीर्ग को  निरंतर फोन लगाया गया, किंतु उनकी ओर से किसी भी तरह का कोई जवाब नहीं आया।

 

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