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फायबर के वर्मी कम्पोस्ट यूनिट में हो रहा सरकारी राशि का गोलमाल

फायबर के वर्मी कम्पोस्ट यूनिट में हो रहा सरकारी राशि का गोलमाल

स्वास्थ्य विभाग में खरीदी का पेंच सुलझा नहीं, उद्यानिकी में गड़बड़ी की शिकायत
डिजिटल डेस्क  कटनी ।
जिले में खनिज प्रतिष्ठान मद (डीएमएफ) की राशि   से स्वास्थ्य विभाग में 60 लाख रुपये से अधिक की खरीदी का पेंच अभी सुलझा नहीं है वहीं अब उद्यानिकी विभाग में  वर्मी कम्पोस्ट यूनिट खरीदी के लिए लाखों रुपये स्वीकृति का मामला सामने आया है। शासन स्तर पर शिकायत के बाद उद्यानिकी विभाग ने वर्मी कम्पोस्ट यूनिट की खरीदी टाल दी है। शिकायत में आरोप लगाया है कि जिस वर्मी कम्पोस्ट यूनिट, नाडेप का निर्माण पंच परमेश्वर योजना किया है, उतनी ही कीमत पर फायबर की वर्मी कम्पोस्ट यूनिट एक कंपनी से की जा रही है।
कम लागत में हो सकता है पक्का निर्माण
वर्मी कम्पोस्ट यूनिट का पक्का निर्माण  ईट सीमेंट/ गारे से किए जाने पर इसका उपयोग कई वर्षों तक किया जाता है। नाम मात्र के व्यय से  मरम्मत से दशकों तक लाभ लिया  जा सकता है। परंतु प्लास्टिक से निर्मित वर्मी बेड एचडीपीई की आयु अल्प होती है और क्षतिग्रस्त होने पर इसकी मरम्मत संभव नहीं है। साथ ही  इसकी लागत/ मूल्य,  ईट सीमेंट/ गारे से निर्मित पक्के वर्मी कम्पोस्ट यूनिट से कहीं ज्यादा होती है। जबकि केन्द्र और प्रदेश सरकार ने कोविड-19 के चलते प्रवासी मजदूरों को मनरेगा में कार्य दिए जाने के निर्देश दिए हैं। वर्मी कम्पोस्ट यूनिट का मनरेगा एवं पंच परमेश्वर योजनाओं से निर्माण कराए जाने के बजाय प्राइवेट कंपनी से खरीदी की जा रही है।
आनन-फानन में स्वीकृति
 शिकायत के अनुसार सहायक संचालक उद्यानिकी विभागए खनिज प्रतिष्ठान मद की राशि से हितग्राही किसानों को वर्मी कम्पोस्ट यूनिट (एचडीपीई) उपलब्ध कराये जाने हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था, जिस पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रशासकीय एव अन्य स्वीकृति प्रदान की गई है। शिकायत के अनुसार प्रभारी सहायक संचालक के पद पर कार्यरत श्री   पांडेय ने  सतना जिले में पदस्थ रहने के दौरान इसी कंपनी से खनिज प्रतिष्ठान मद(डीएमएफ) की राशि लगभग 10 करोड़ रुपये से वर्मी बेड एचडीपीई क्रय किए  थे। अब कटनी में पदस्थ होते ही खनिज प्रतिष्ठान मद की राशि से वर्मी बेड (एचडीपीई) क्रय किए जाने का प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृत करा लिया गया।
इनका कहना है
वर्मी कम्पोस्ट यूनिट खरीदी के लिए अभी कोई राशि स्वीकृत नहीं हुई है। इसलिए गड़बड़ी का सवाल ही नहीं है। पूर्व में प्रस्ताव दिया गया था लेकिन लॉक डाउन के कारण निर्णय नहीं हो पाया है।
-अरुण कुमार पांडेय, सहायक संचालक
 

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