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दो करोड़ सेंट्रल जीएसटी जमा नहीं करने का खुलाशा - स्टोन क्रेसर कारोबारी के कार्यालय व घर में दबिश

दो करोड़ सेंट्रल जीएसटी जमा नहीं करने का खुलाशा - स्टोन क्रेसर कारोबारी के कार्यालय व घर में दबिश

डिजिटल डेस्क सतना। सेंट्रल एक्साइज एवं कस्टम ड्यूटी विभाग की डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) रिजनल यूनिट जबलपुर की टीम ने मैहर के एक ही परिवार के द्वारा संचालित स्टोन क्रेसर कारोबारी के घर व दफ्तर में एक साथ दबिश दी है। प्राथमिक तौर पर लगभग दो करोड़ की सेंट्रल जीएसटी नहीं जमा किए जाने का मामला सामने आया है। सतना के किसी के स्टोन क्रेसर कारोबारी के यहां डीजीजीआई की यह पहली कार्रवाई है। जानकारी के मुताबिक मंगलवार की सुबह 11 बजे डीजीजीआई जबलपुर के एक दर्जन से अधिक अधिकारियों की टीम ने स्टोन क्रेसर कारोबारी आलोक अग्रवाल के घंटाघर स्थित कार्यालय और कटनी रोड स्थित घर में दबिश दी। मैहर के तिलौरा में बजरंग स्टोन क्रेसर और बटिया में संचालित दो और स्टोन क्रेसरों की जांच की गई जो इन्हीं के द्वारा किराए पर लिए गए थे। सूत्रों के मुताबिक जुलाई 2017 से जीएसटी प्रभावी है। मगर इनके द्वारा सीजीएसटी जमा नहीं की गई जो प्रारंभिक जांच में करीब दो करोड़ के आसपास है। जांच टीम के हाथ लगे कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं। हालांकि इस संबंध में अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन नहीं हो पाई
किराए पर लिए थे दो स्टोन क्रेसर 
सूत्रों के मुताबिक आलोक अग्रवाल तिलौरा में बजरंग स्टोन क्रेसर संचालित करते थे। जबकि इन्ही के परिवार के सदस्य अमन अग्रवाल और अजय अग्रवाल भी स्टोन क्रेसर के कारोबार से जुड़े हैं। जांच में मैहर के भटिया में किराए पर दो स्टोन क्रेसर लिए गए थे।  
5 दिन की मोहलत
स्टोन क्रेसर कारोबारी को दो करोड़ की सीजएसटी जमा किए जाने के लिए पांच दिन की मोहलत दी गई है। सूत्रों की माने तो निर्धारित समय पर टैक्स नहीं जमा किए जाने पर 48 लाख की पेनाल्टी लगाई जाएगी।   
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।