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गडकरी का गोद लिया गांव आधा आदर्श, तो आधे में धूल का गुबार

गडकरी का गोद लिया गांव आधा आदर्श, तो आधे में धूल का गुबार

डिजिटल डेस्क, नागपुर। उमरेड रोड पर बसे पांचगांव को केंद्रीय मंत्री व सांसद नितीन गडकरी ने गोद लिया है। आधा गांव तो आदर्श लगेगा, लेकिन आधा गांव धूल के गुबार में नजर आता है। दरअसल पांच साल पहले जब इस गांव को गोद लिया था तो इसका चेहरा कुछ अलग था। गडकरी द्वारा गोद लिए जाने के बाद यहां की विकास योजनाओं के अनेक प्रस्ताव बने। सांसद व विधायक निधि के अलावा अलग-अलग विभागों से निधि मिलती गई और विकास की गंगा बहने लगी। गांव का कुछ हिस्सा आदर्श हुआ लेकिन एक हिस्सा आज भी सांसद के दिल में नहीं बस पाया है। इस हिस्से के लोग दिन-रात धूल के गुबार के बीच अपना जीवन बिता रहे हैं। ग्रामपंचायत प्रशासन और सांसद तक इसकी सुध नहीं ले रहे हैं। पांचगांव में पत्थरों की 10 से अधिक खदानें हैं। यहां दिन-रात खुदाई और क्रशर मशीन से बड़े पत्थरों को छोटे में तब्दील करने का काम होता है। बाद में इन्हें ट्रकों में भरकर गंतव्य तक पहुंचाया जाता है। पांचगांव की जिन सड़कों से हजारों ट्रकों की 24 घंटे आवाजाही होती है, वहां गड्ढे ही गड्ढे हैं। ट्रकों की आवाजाही के दौरान धूल का गुबार उठता है। जो इन सड़कों के किनारे बसी बस्तियों में पहुंचकर लोगों के शरीर में प्रवेश कर रहा है।

बड़ी समस्या से जूझ रहे ग्रामीण

गांव की शुुरुआत और भीतर के अनेक हिस्से भले ही चकाचक हो चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों को एक बड़ी समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। हालांकि इस समस्या के बारे में ग्रामीण खुलकर नहीं बोलते। समस्या यह है कि ग्रामीणों की सांसों के माध्यम से शरीर में धूल जा रही है। इसकी वजह यह है कि गांव के अंतिम छोर से पहले बाईं ओर जाने वाली सड़क कच्ची है। इस सड़क के किनारे ही पांचगांव की बस्ती है। यह सड़क आगे पत्थरों की खदान की ओर जाती है। सड़क पर एक-दो नहीं हजारों छोटे-बड़े गड्ढे हो चुके हैं। सड़क तो नजर ही नहीं आती। खदानों से पत्थर निकालकर उन्हें क्रशर मशीनों से छोटे आकार दिए जाते हैं। इसके बाद उन्हें ट्रकों के माध्यम से गंतव्य तक पहुंचाया जाता है। ये ट्रक पांचगांव बस्ती से सटी सड़क से ही गुजरते हैं। सूत्रों ने बताया कि यह काम दिन-रात शुरू रहता है। जब ट्रकें चलती हैं, तो धूल का गुबार उठता है। बरसों से यही हाल है।

बरसों से नहीं बनी पक्की सड़क

कच्ची सड़क के कारण धूल मिट्टी उड़ने से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामवासियों का कहना है कि ग्रामपंचायत प्रशासन और गांव गोद लेने वाले केंद्रीय मंत्री इसकी सुध नहीं ले रहे। गांव में सीमेंट की सड़कें बनायी गईं। लेकिन खदान की ओर जाने वाली सड़क को ज्यों का त्यों रखा गया है। हालांकि ग्रामीणों ने इस बारे में ग्रामपंचायत प्रशासन को बताया है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। ग्रामपंचायत प्रशासन का दावा है कि खदान संचालक उन रास्तों पर दिन में दो बार पानी का छिड़काव करते हैं जबकि ग्रामीण दबी जुबान में इस बात को गलत बताते हैं। ग्रामीणों के अनुसार बरसात के बाद से इन सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं किया गया है। जमीन पूरी सूख गई है और पहले के मुकाबले अब धूल अधिक उड़ने लगी है। सरपंच ने स्वयं इस बात को स्वीकार किया है कि उन्होंने खुद खदान संचालकों को चेतावनी दी है कि दो वक्त पानी का छिड़काव न करने पर सड़क बंद कर दी जाएगी।
नागपुर से उमरेड रोड पर 19 किलोमीटर की दूरी पर बसा है पांचगांव। मुख्य सड़क से सटे गांव के बाहर ही एक बड़ा प्रवेशद्वार नजर आता है, जिस पर लिखा है सुस्वागतम्। देखकर मन बड़ा प्रसन्न होता है। इसी प्रवेशद्वार पर लिखा है सांसद आदर्श ग्राम योजना। ऐसा इसलिए कि सरकार की सांसद आदर्श ग्राम योजना अंतर्गत इस गांव को सांसद व केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी ने गोद लिया है। गांव को गोद लेने के बाद सांसद महोदय ने अलग-अलग विकास निधि से यहां के विकास में चार चांद लगा दिए हैं। इसका प्रमाण यह है कि गांव में प्रवेश करने के बाद दिखायी देने वाला नजारा विकास की कहानी बयां करता है। लेकिन इस गांव के दूसरे हिस्से को देखा जाए तो स्थिति काफी भयावह दिखायी देती है। गांव का दूसरा हिस्सा खदानों की ओर जाने वाली सड़क किनारे बसा है। सड़क कहीं नजर नहीं आती, केवल गड्ढे ही गड्ढे दिखायी देते हैं। खराब सड़क और दुर्घटना की आशंका से जिला परिषद की स्कूल में दूसरे गांवों के पढ़ने वाले बच्चे अब दूसरी जगह पढ़ने जाने लगे हैं। जहां इस स्कूल में पहले दूसरे गांव के 100 बच्चे पढ़ते थे वहीं अब यह संख्या घटकर 3 रह गई है। वजह यह है कि गांव की सीमेंट सड़काें के बाद जो सड़क बन नहीं पायी उस पर से दिन-रात हजारों ट्रकों की आवाजाही होती है। ट्रकों के कारण सड़क गायब हो गई है। दिन-रात धूल का गुबार उठता रहता है। जब यहां के जिम्मेदार लोगों से इस बारे में पूछा गया तो बात हवा में उड़ा दी। सड़क किनारे बसे लोगों को भी स्वास्थ्य की चिंता नहीं। उनका कहना है कि हम तो बरसों से ऐसे ही जी रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।