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हाईकोर्ट: खुद को सिविल जज बताने वाले धोखाधड़ी के आरोपी को नहीं है जमानत पाने का हक

हाईकोर्ट: खुद को सिविल जज बताने वाले धोखाधड़ी के आरोपी को नहीं है जमानत पाने का हक


डिजिटल डेसक जबलपुर। शादी से संबंधित एक बेवसाईट पर खुद को एयरफोर्स का सीनियर ऑफीसर बताकर लोगों को ठगने वाले एक एयरक्रॉफ्ट इंजीनियर की जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस बीके श्रीवास्तव की एकलपीठ ने केस डायरी का अवलोकन करके पाया कि दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में आरोपी ने खुद को सिविल जज बताकर कई लोगों को ठगा है। ऐसे आरोपी को जमानत पाने का हक नहीं है।
यह जमानत अर्जी हैदराबाद के सिकंदराबाद में रहने वाले के. सागर की ओर से
दायर की गई थी। टीसीएस कंपनी में एयरक्रॉफ्ट इंजीनियर के रूप में काम करने वाले आरोपी पर आरोप है कि उसने शादी से संबंधित एक बेवसाईट पर खुद की प्रोफाईल गौरव शर्मा के नाम पर बनाकर कई लोगों को ठगा। इतना ही नहीं, होशंगाबाद में रहने वाली एक युवती से 65 हजार रुपए भी ठग लिए। मामले का खुलासा होने पर शिकायतकर्ता ने होशंगाबाद के सोहागपुर थाने में शिकायत दी, जहां पर जांच के बाद विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करके आरोपी को 13 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले पर जमानत पाने यह अर्जी दायर की गई थी।
सुनवाई के दौरान पैनल अधिवक्ता प्रकाश गुप्ता ने प्रकरण की केस डायरी का ब्यौरा अदालत के समक्ष पेश किया। अदालत ने पाया कि आरोपी के खिलाफ गौतमबुद्ध नगर, ग्रेटर नोयडा, साकारपुर पूर्वी नई दिल्ली और गुडग़ांव में भी मामले दर्ज हैं, जहां पर उसने कई लोगों को ठगा है। आरोपी के कृत्यों को देखते हुए अदालत ने उसे जमानत देने से इंकार करके उसकी अर्जी खारिज कर दी।
पेश करो अपहृत किशोरी को-
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकलपीठ ने छतरपुर में रहने वाले राधाचरण की  ंबंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए उसकी अपहृत किशोरी को पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित करते हुए अदालत ने यह भी कहा कि किशोरी को पेश न कर पाने की स्थिति में पुलिस स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। इस मामले में याचिकाकर्ता का आरोप है कि उसकी 17 वर्षीय पुत्री को अनुज नामक युवक ने अपहृत किया है और शिकायत देने के बाद भी पुलिस उसे नहीं खोज रही है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गौरव शर्मा पैरवी कर रहे हैं।

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