दैनिक भास्कर हिंदी: हाईकोर्ट ने म्हाडा से पूछा - क्या लोगों के जीवन का कोई मोल नहीं?

July 5th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। दक्षिण मुंबई में 150 साल पुरानी इमारत (इसप्लांडे मेंशन) को गिराने से पहले सुरक्षा के जरुरी इंतजाम अब तक पूरे न किए जाने को लेकर बांबे हाईकोर्ट ने म्हाडा को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि क्या मानव जीवन का कोई मोल नहीं है? हाईकोर्ट ने पिछले महीने म्हाडा को इमारत परिसर की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम करने का निर्देश दिया था। शुक्रवार को न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति गौतम पटेल के सामने इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान म्हाडा के वकील प्रकाश लाड ने कहा कि हमने इमारत के चारों ओर बैरिकेटिंग की है। राहगीरों के लिए अलग रास्त बनाया है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि क्या 150 साल पुरानी जर्जर इमारत का कोई हिस्सा लटक रहा है? यदि लटक रहा तो क्या वह हिस्सा रोड पर गिरेगा या फिर बैरिकेट के भीतर। हम चाहते है कि इमारत के चारों ओर जाल लगाया जाए। अदालत ने कहा कि क्या म्हाडा की नजर में मानव जीवन का कोई मोल नहीं है?

औरंगाबाद हाईकोर्ट में पालना घर की जगह पालनाघर ही बने 

बांबे हाईकोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट प्रशासन आश्वस्त करे कि औरंगाबाद हाईकोर्ट परिसर में पालना घर बनाने के लिए उपलब्ध जगह का इस्तेमाल पालना घर के लिए ही किया जाए। हाईकोर्ट ने यह बात पेशे से वकील चैताली चौधरी व औरंगाबाद के एडवोकेट एसोसिएशन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद कही। याचिका में वकीलों के बच्चों के लिए औरंगाबाद हाईकोर्ट के परिसर में डे केयर सेंटर व पालना घर बनाने की मांग की गई थी। ताकि  खास तौर से महिला वकील अपने बच्चों को कोर्ट परिसर में बने पालनाघर में छोड़ सकें। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नांदराजोग व न्यायमूर्ति एनएम जामदार की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान खंडपीठ को बताया गया कि औरंगाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (प्रशासन) ने कोर्ट परिसर में पालना घर के लिए जगह की पहचान कर ली है और इसकी जानकारी 21 फरवरी 2019 को एडवोकेट एसोसिएशन को दे दी है।  इस पर खंडपीठ ने कहा कि जिस स्थान को पालन घर के लिए चुना गया है वह जगह पालना घर के लिए उपलब्ध करा दी जाए। साथ ही कोर्ट प्रशासन इस बात को सुनिश्चित करे कि इस जगह का इस्तेमाल सिर्फ पालना घर के लिए ही किया जाएगा। खंडपीठ ने कहा कि चूंकी अब एसोसिएशन को पालन घर के लिए जगह उपलब्ध करा दी गई है। इसलिए अब यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। लिहाजा इसे समाप्त किया जाता है। 

बेस्ट ऑफ फाईव के खिलाफ याचिका खारिज 

बांबे हाईकोर्ट ने कक्षा 11 वीं में प्रवेश को लेकर राज्य सरकार द्वारा बेस्ट आफ फाइव नीति को लेकर जारी की गई अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका को स्वीकार करने से इंकार कर दिया है।  यह याचिका अधिवक्ता एसबी तलेकर के माध्यम से आईसीएसई बोर्ड के एक छात्र के पिता ने दायर की थी। याचिका में सरकार की ओर से बेस्ट आफ फाइव के संबंध में 29 जून 2019  को जारी अधिसूचना मनमानीपूर्ण व भेदभावपूर्ण  व संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ बताया गया था। और सरकार की ओर से बेस्ट आफ फाइव को लेकर जारी अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई थी। शुक्रवार को न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी की खंडपीठ इस याचिका को खारिज कर दिया और कक्षा 11 वीं के एडमिशन में हस्तक्षेप करने की मांग को अस्वीकार कर दिया। 

 

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