दैनिक भास्कर हिंदी: इंडोनेशिया में फेंकी गई सुपारी नागपुर पहुंच रही, विदेशों तक फैला है माफियाओं का जाल

August 30th, 2019

डिजिटल डेस्क,नागपुर। संतरानगरी को सुपारी का सबसे बड़ा हब माना जाता है। यहां पर सुपारी का अवैध कारोबार करने वाले सुपारी माफियाओं और तस्करों पर हाथ डालने से पुलिस और एफडीए के अधिकारी भी डरते हैं। सुपारी कारोबारी बताते हैं कि सुपारी यानी ‘अरेका कटेचु' नामक पौधे के फल का बीज है जो दक्षिणी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा अफ्रीका के अनेक भागों में पैदा होता है। सूत्रों के अनुसार, नागपुर में विदेशी सुपारी का सबसे बड़ा कारोबार चल रहा है। यहां की सामान्य मंडी में इसे असम के सुपारी उत्पादकों की सुपारी बताकर बेचने का भी गोरखधंधा शुरू होने की चर्चा जोरों पर है। नागपुर में इंडोनेशिया से अवैध तरीके से आने वाली सुपारी बर्मा देश के रंगून पोर्ट से कुछ खुफिया रास्तों से होते हुए गुवाहाटी पहुंचती है। उसके बाद अन्य मार्गों से यह माल नागपुर के सुपारी माफियाओं के गोदामों तक पहुंचाया जाता है। कुछ सुपारी नेपाल के गुप्त रास्ते से भारत में आती है। 

शहर के दर्जनों कारोबारी अवैध कारोबार में

नागपुर में दर्जनों सुपारी माफिया विदेशी सुपारी के अवैध कारोबार से जुड़े हैं। सूत्रों के अनुसार इंडोनेशिया की सुपारी को असम के सुपारी उत्पादकों का माल बताकर उसे सुपारी माफिया बाजारों में बेच रहे हैं। नागपुर में खत्री, टुटेजा, गोयल, गनी, माेरवानी, जतिन, नितीन, पटवा, मेहता, राजू, कोठारी, अल्ताफ मामू उर्फ भोपाली, आसिफ सहित अन्य कई नाम ऐसे नाम हैं, जो विदेशी सुपारी के अवैध कारोबार में लिप्त बताए जाते हैं। इन पर आज तक न तो एफडीए ने और न ही पुलिस विभाग ने शिकंजा कसा है। विदेशी सुपारी के इस अवैध कारोबार ने असम, कर्नाटक व अन्य राज्यों में पैदा होने वाली गुणवत्ता वाली सुपारी की कीमत को बेहद कमजोर बना दिया है।

अवैध तरीके से लाने पर 4 प्रतिशत खर्च आता हैं

सूत्र बताते हैं कि इंडोनेशिया से भारत में सुपारी लाने के लिए नियम के अनुसार 108 प्रतिशत टैक्स (कस्टम) लगता है। यही सुपारी अवैध तरीके से बर्मा के अलग- अलग रास्तों से भारत में लाने के लिए 4 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी देनी पड़ती है। इंडोनेशिया से भारत में बबलू खान नामक सुपारी तस्कर द्वारा बर्मा में माल मंगाए जाने की जानकारी सूत्रों ने दी  है। यह माल समुद्री रास्ते से आता है। नागपुर में यह माल लकी उर्फ इरशाद नामक व्यक्ति द्वारा मंगाए जाने की चर्चा है। शहर में अवैध सुपारी के कारोबार से राजस्व को करोड़ों का पलीता लगते रहता है।

ऊंचे दामों पर बिक  रही विदेशी सुपारी

सूत्रों के अनुसार, इंडोनेशिया में सुपारी की कीमत काफी कम है। खराब सुपारी को वहां फेंक दिया जाता है। विदेशी सुपारी इंडोनेशिया से बर्मा के रंगून पोर्ट से होते हुुए मोरे-चंपाई व टियाहू नामक अंतरराष्ट्रीय सीमा से भारत में आने की जानकारी सूत्रों ने दी है। सूत्र बताते हैं कि मोरे से इंफाल, दीमापुर (भारतीय सीमा अंतर्गत) में चंपाई व टियाहू बार्डर से मिजोरम (भारतीय सीमा) के कुछ गुप्त रास्तों, जिसमें एक विशेष नाला भी शामिल है, के जरिए इन सीमाओं के पास भारत में छोटे मालवाहक वाहनों में भेज दी जाती है। टियाहू (मिजोरम) से यह विदेशी सुपारी हैलाकांडी यानी की हाइलाकांढि (सिंलचर), करीमगंज, लालाबाजार में तक पहुंचती है। यहां पर गुप्त स्थानों पर 90 किलो की बोरी को 50 किलो की बनाई जाती है और फिर असम की सुपारी बताकर देश के सामान्य मंडी में यह पहुंचा दी जाती है।

फर्जी बिल्टी बनाने की चर्चा

सूत्रों की मानें तो सुपारी उत्पादक किसानों से इसे खरीदने की जानकारी मंडियों में दी जाती है। नियम के अनुसार टैक्स भर दिया जाता है, जो काफी कम होता है। ट्रांसपोर्टर भी बोगस फर्म बनाकर नियम के अनुसार लगने वाले दस्तावेज तैयार करवा लेते हैं। सुपारी के इस अवैध कारोबार में धर्मकांटा वालों की भूमिका भी संदिग्ध है। बंगाल से ओड़िशा के सीमा से होते हुए छत्तीसगढ़ और फिर नागपुर में यह अवैध सुपारी बोगस फर्म में पहुंच जाती है। सूत्र बताते हैं कि इंडोनेशिया से विदेशी सुपारी को भारत में लाने पर 108 प्रतिशत कर लगता है। स्मलिंग के जरिए इतना टैक्स देने की जरुरत नहीं पडती है। सूत्र यह भी बताते हैं कि विदेशी से अवैध तरीके से सुपारी लाने के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता है। पहले भारत में रमी नामक कोडवर्ड उपयोग कर माल मंगाया जाता था। अब यह कोडवर्ड बदल दिया गया है।

राजस्व की चोरी

सूत्रों की मानें तो असम में पांडेजी, जाकिर, बिलाल, श्याम जिसे कैप्टनजी भी कहते हैं। यह ऐसे नाम हैं, जो सुपारी के कारोबार में टैक्स की चोरी करते हैं। ये नाम सुपारी माफियाराज में गिने जाते हैं। विदेश से अवैध तरीके से आने वाली सुपारी को दिल्ली, कानपुर, कोलकाता, हैदराबाद, मध्यप्रदेश सहित अन्य कई शहरों में गुटखा और मीठी सुपारी बनाने के लिए भेजी जाती है।

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