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12 एकड़ में सोयाबीन के 10% ही बीज अंकुरित

12 एकड़ में सोयाबीन के 10% ही बीज अंकुरित

डिजिटल डेस्क, नागपुर। तहसील अंतर्गत ग्राम भिष्णुर के किसान अनिल धनराज रेवतकर ने अपने 12 एकड़ खेत में महाबीज कंपनी के सोयाबीन के बीजों की बुआई की, जो केवल 10 फीसदी ही अंकुरित हुए। शेष 90 फीसदी जमीन में ही दब रह गए। इस नुकसान को लेकर किसान रेवतकर अदालत जाने की तैयारी में है। किसान के अनुसार भिष्णुर शिवार में अच्छी बारिश को देख ग्राम के दिनेश बीज भंडार से उन्होंने महाबीज के 2,250 रुपए के हिसाब से 30 हजार रुपए के 15 बैग सोयाबीन बीज खरीदे। साथ ही 30 हजार रुपए का रासायनिक खाद खरीदकर 14, 15 तथा 17 जून को 12 एकड़ खेत में  बुआई की है। बीज बुआई पर 15 हजार रुपए का खर्च आया। यानी कुल बुआई पर 78 हजार 750 रुपए खर्च हुआ। कुछ दिन बाद खेत में जाकर देखा तो समूचे 12 एकड़ में बुआई किए हुए बीज में से केवल 10 फीसदी ही अंकुरित हुए थे। शेष 90 फीसदी बीज जमीन में ही दबे हुए दिखाई दिए। वहीं पड़ोसी किसान ने घरेलू बीज की बुआई की, वह अच्छी तरह अंकुरित हुए हैं। इसकी शिकायत करने पर पंस के उप-सभापति वैभव दलवी, तहसील कृषि अधिकारी डॉ. योगीराज जुमड़े, पंस कृषि अधिकारी सरोदे ने खेत का मुआयना किया। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय की टीम को बुलाया। टीम ने बीज नकली होने की पुष्टि की। बाद में महाबीज के 5-6 आला अधिकारियों ने भी निरीक्षण करने पर  इस बात को स्वीकार किया।

महाबीज ने मुफ्त बीज देने का वादा किया 

महाबीज के अधिकारियों ने खेत का निरीक्षण करने के बाद किसान को बुआई करने उतना ही बीज मुफ्त में देने का वादा किया है। बुआई खर्च और खाद के पैसे देने से इंकार किया है। किसान ने स्पष्ट तौर पर इंकार कर केवल संपूर्ण नुकसान भरपाई देने की मांग की है। जिसे कंपनी के अधिकारियों ने अस्वीकार कर दिया है। अब किसान अदालत जाने की तैयारी में है। 

किसान ने कहा-बुआई का समय निकल गया है

किसान का कहना है कि, सोयाबीन बुआई का सही समय अब निकल गया है। 12 एकड़ में जितने बीज की बुआई की थी उससे 150 क्विंटल सोयाबीन होने का अनुमान था। प्रति क्विंटल सोयाबीन का भाव 4,500 रुपए के हिसाब से छह लाख 75 हजार की फसल होनी थी। यदि, इतना नुकसान भरपाई महाबीज कंपनी देगी, तो ठीक नहीं वरना अदालत में जाने की बात कही है। 

आर.आर. राठोड़, जिला प्रबंधक, महाबीज के मुताबिक जिले में महाबीज की बिक्री सर्वाधिक है, इसलिए शिकायतें भी ज्यादा हैं। बीज अंकुरित नहीं होने का कारण बारिश का प्रमाण, थायरम लगाकर बुआई नहीं करने पर जमीन में मौजूद फफूंद से बीज सड़ जाना, ट्रैक्टर से बुआई करने पर बीज गहराई में जाना आदि कारणों से अंकुरण क्षमता पर प्रतिकूल परिणाम हो सकता है। किसानों की शिकायतों का निवारण करने तहसील स्तर पर कृषि समिति के माध्यम से पंचनामा बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जांच में बीज सदोष पाए जाने पर संबंधित किसानों को नुकसान भरपाई देने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
    

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