दैनिक भास्कर हिंदी: मंत्री लखन घनघोरिया ने मांगी बिना शर्त माफी - हाईकोर्ट ने कहा पहले जनता के बीच जाओ , जा सकता है मंत्री पद

September 27th, 2019

डिजिटल डेस्क जबलपुर। सिद्धबाबा की पहाड़ी पर अतिक्रमण की कार्रवाई का विरोध करके वहाँ के लोगों को उकसाने पर सरकार के कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया का माफी नामा हाईकोर्ट ने लौटा दिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस आरएस झा और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने कहा है कि मंत्री जनता के बीच जाकर सभा करें और वहाँ यह स्पष्ट करें कि वे अतिक्रमण की कार्रवाई के पक्ष में हैं या फिर विरोध में। चार दीवारी के भीतर उनके द्वारा बिना शर्त माफी माँगना पर्याप्त नहीं है। गुरुवार को करीब डेढ़ घंटे तक चली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये को भी आड़े हाथों लेते हुए कड़ी नाराजगी जताई। युगलपीठ ने सरकार और मंत्री को फिर से जवाब पेश करने की मोहलत देकर अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को निर्धारित की है।
9 याचिकाओं पर हाईकोर्ट में एक साथ सुनवाई हो रही
गौरतलब है कि मदन महल की पहाडिय़ों पर काबिज अतिक्रमणों के खिलाफ वर्ष 2012 में एक जनहित याचिका किशोरी लाल भलावी की ओर से और शहर की सभी पहाडिय़ों पर  अतिक्रमणों के खिलाफ एक जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मंच की ओर से भी दायर की गई थी। पहाडिय़ों के अतिक्रमणों से संबंधित कुल 9 याचिकाओं पर हाईकोर्ट में एक साथ सुनवाई हो रही है। बीते मंगलवार को बिलहरी में रहने वाले आदित्य नारायण शुक्ला ने एक अर्जी दायर करके कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया पर सनसनीखेज आरोप लगा दिए। अर्जी पर आरोप है कि सिद्धबाबा की पहाड़ी पर आयोजित एक सभा में कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया ने न सिर्फ अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई का विरोध किया, बल्कि लोगों को उकसाने का भी काम किया। मंत्री के रवैये को कठघरे में रखते हुए उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई चलाए जाने की प्रार्थना हाईकोर्ट से की गई थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान मंत्री के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए युगलपीठ ने सरकार से पूछा था कि मंत्री के इस बयान पर वो अपना रुख साफ करे।
3 माह पहले भी यही मंत्री धमकी दे चुके
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता शशांक शेखर और कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ हाजिर हुए। युगलपीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा-3 माह पहले भी यही मंत्री ऑटो के मामले में आरटीओ को परमिट जारी करने के लिए धमका चुके हैं। पिछली बार उन्हें माफी दे दी गई थी, लेकिन अब फिर से उन्होंने वही पुनरावृत्ति की है। ऐसे में उनके द्वारा माँगी गई माफी नाकाफी है।
मुख्यमंत्री ने कहा- अब किया, तो जाएगा मंत्री पद
महाधिवक्ता ने युगलपीठ को बताया कि राज्य के मुख्यमंत्री ने भी इस मामले को काफी गंभीरता से लिया है, साथ ही उन्होंने कैबिनेट मंत्री को सख्तहिदायत दी है कि अब उन्होंने ऐसा कुछ किया तो उनका मंत्री पद छीन लिया जाएगा। इस पर युगलपीठ ने यहाँ तक कहा कि लगातार दूसरी बार ऐसी हरकत करने वाले व्यक्ति को मंत्री पद पर नहीं रहना चाहिए, क्यों न ऐसे मंत्री को हमेशा के लिए अयोग्य कर दिया जाए?

 

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