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मिला जुला रहा बंद का असर - महँगाई के विरोध में कांग्रस का आंदोलन 

मिला जुला रहा बंद का असर - महँगाई के विरोध में कांग्रस का आंदोलन 

डिजिटल डेस्क जबलपुर । बेहताशा बढ़ रही महँगाई के विरोध में शहर कांग्रेस द्वारा आज आधे दिन जबलपुर बंद के ऐलान का मिला जुला असर दिखाई दिया । मुख्य बाजारों में कहीं कहीं दुकानें बंद दिखीं जबकि अंदर बंद का असर कम ही दिखाई दिया लोगों का कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा । बंद के लिए महाकौशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स, जबलपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स के सभी पदाधिकारियों एवं सभी व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्र के व्यापारिक कारोबार को  दोपहर 2:00 बजे तक बंद रखने के लिए  सहयोग माँगा था । बावजुद इसके मदन महल चौक गोरखपुर बाजार पूरा खुला दिखाई दिया जबकि सदर मेन रोड का पूरा बाजार बंद रहा । सदर मेन रोड पर जहां एक तरफ कांग्रेसियों ने झांकी बनाकर जुलूस निकाला वही सदर पेट्रोल पंप में लाइन लगी रही । नॉर्दरा  ब्रिज का पूरा बाजार खुला था शराब दुकानों में आधे शटर खुले रहे ।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश यादव ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि विगत 2 माह से मोदी सरकार के द्वारा पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस में डेढ़ गुना से 2 गुना तक की मूल्य वृद्धि की गई।  वाहनों के ईंधन की लागत में भारी इजाफा हो रहा है, जिससे हर आवश्यक वस्तु का परिवहन महँगा होता जा रहा है। अनेक वस्तुएँ महँगी हो रही हैं। आम आदमी का बजट बिगड़ रहा है। आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन को सफल बनाने को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष  ने शहर के हर क्षेत्र में कांग्रेस पदाधिकारियों को  जिम्मेदारी सौंपी है । 
किसे कहाँ का सौंपा जिम्मा
शहर कांग्रेस कमेटी बड़ा फुहारा, कपड़ा बाजार, अंधेरदेव, सराफा बाजार, सुपर मार्केट, तुलाराम चौक क्षेत्र देखेगी। रांझी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी उपनगरीय क्षेत्र रांझी में सभी से जनसंपर्क करेगी। मिलौनीगंज, दमोहनाका मौलाना ब्लॉक कांग्रेस कमेटी,  सदर केंट ब्लॉक कांग्रेस कमेटी,  अधारताल रिद्धि चौक, बहोराबाग जाकिर हुसैन ब्लॉक कमेटी, रानीताल से गढ़ा रोड लेबर चौक कस्तूरबा ब्लॉक कमेटी,  विजय नगर, दीनदयाल चौक, आईटीआई युवक कांग्रेस के द्वारा,  गोरखपुर, मदन महल जवाहरलाल नेहरू ब्लॉक कमेटी,  रामपुर, पोलीपाथर, ग्वारीघाट का क्षेत्र,  गुप्तेश्वर, मेडिकल रोड मदन महल ब्लॉक,  त्रिपुरी चौक, धनवंतरी नगर, इंदिरा गांधी ब्लॉक, गोकलपुर, रिछाई अधारताल ब्लॉक कांग्रेस,  कांचघर शीतलामाई में मोतीलाल नेहरू ब्लॉक कमेटी को बाजार बंद कराने की जिम्मेदारी दी गई थी ।
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।