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कोरोना से ज्यादा अन्य बीमारियों से मौत, शिविरों में लोगों ने कराई जांच 

कोरोना से ज्यादा अन्य बीमारियों से मौत, शिविरों में लोगों ने कराई जांच 

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कोरोना संकट में रोजाना मौत के .आंकड़े देखकर शायद आप असहज हो रहे होंगे। लेकिन घबराएं नहीं, कोरोना की अपेक्षा शहर में अन्य सामान्य बीमारियों से मरने वालों की ज्यादा संख्या है। पिछले साल और इस साल के तुलनात्मक आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। शहर में मार्च 2020 से कोरोना का संकट शुरू हुआ था। संकट के दौरान मार्च से लेकर अगस्त तक शहर में 11 हजार 572 मौतें दर्ज की गई हैं। इसमें कोरोना सहित सामान्य बीमारियों से मरने वाले भी शामिल हैं, लेकिन पिछले साल के आंकड़े देखें तो कोरोना का खौफ जरूर कम हो जाता है। गत वर्ष मार्च से लेकर अगस्त तक 13 हजार 840 मौतें दर्ज की गई हैं। यह कोरोनाकाल में डरा रहे आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। अभी सितंबर महीने में मौते के आंकड़े आधिकारिक रूप से सामने नहीं आए हैं। 

मिली यह जानकारी 

पिछले साल की बात करें तो सितंबर में 2391 मौतें दर्ज हुई थीं। इस साल सितंबर में कोरोना से 1465 मौतें हुई हैं, इसमें अब सामान्य मौतों का आंकड़ा जुड़ा नहीं है। फिर भी मौटे तौर पर मनपा में पूर्व गटनेता वेदप्रकाश आर्य द्वारा आरटीआई में मांगी गई जानकारी में जारी किए आंकड़े बताते हैं कि कोरोना की अपेक्षा सामान्य बीमारियों से मरने वालों की संख्या ज्यादा है। ऐसे में नागरिकों को डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है। 

2 बड़े कारण...मौत के आंकड़ों में कमी का बने आधार 

-पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम मौतों की अनेक वजह बताई जा रही है। सरकार द्वारा लॉकडाउन लगाने के बाद लोगों का बाहर आना-जाना कम हो गया। लोगों ने घरों में ही सतर्कता बरतते हुए खान-पान पर नियंत्रण किया। बाहरी खाद्य पदार्थ से दूर रहे। स्वास्थ्य-सेहत को अधिक महत्व दिया गया। घरों में घरेलू नुस्खे अपनाकर छोटी-मोटी बीमारियों को भी काबू में रखा। इस वजह से अस्पतालों में जाने की जरूरत नहीं पड़ी और घरों में उपाय योजना कर या अपने फैमिली डॉक्टर से सलाह-मशविरा कर बीमारी पर नियंत्रण किया। 

-एक बड़ी वजह और भी है। लॉकडाउन के कारण बाहरी जिले या पड़ोसी राज्य से आने वाले मरीजों की संख्या में भी गिरावट आई। खासकर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ या तेलंगाना से आने वाले मरीजों की संख्या अधिक होती है। गंभीर स्थिति में आने के कारण उनकी मौतें भी यहीं दर्ज की जाती हैं, लेकिन लॉकडाउन के कारण उनकी संख्या में भारी कमी आई है। ऐसे में मौतें कम होने का यह भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

मिली यह जानकारी 

गत सितंबर में 2391 मौतें दर्ज हुई थीं। इस साल सितंबर में कोरोना से 1465 मौतें हुई हैं, इसमें अब सामान्य मौतों का आंकड़ा जुड़ा नहीं है। मनपा में पूर्व गटनेता वेदप्रकाश आर्य द्वारा आरटीआई में मांगी गई जानकारी में जारी किए आंकड़े बताते हैं कि कोरोना की अपेक्षा सामान्य बीमारियों से मरने वालों की संख्या ज्यादा है।

बाहर निकलना कम : पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम मौतों की अनेक वजह बताई जा रही है। सरकार द्वारा लॉकडाउन लगाने के बाद लोगों का बाहर आना-जाना कम हो गया। लोगों ने घरों में ही सतर्कता बरतते हुए खान-पान पर नियंत्रण किया। बाहरी खाद्य पदार्थ से दूर रहे। स्वास्थ्य-सेहत को अधिक महत्व दिया गया। घरों में घरेलू नुस्खे अपनाकर छोटी-मोटी बीमारियों को भी काबू में रखा। इस वजह से अस्पतालों में जाने की जरूरत नहीं पड़ी और घरों में उपाय योजना कर या अपने फैमिली डॉक्टर से सलाह-मशविरा कर बीमारी पर नियंत्रण पाया। 

अन्य स्थानों के कम मरीज : लॉकडाउन के कारण बाहरी जिले या पड़ोसी राज्य से आने वाले मरीजों की संख्या में भी गिरावट आई। खासकर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ या तेलंगाना से आने वाले मरीजों की संख्या अधिक होती है। गंभीर स्थिति में आने के कारण उनकी मौतें भी यहीं दर्ज की जाती हैं, लेकिन लॉकडाउन के कारण उनकी संख्या में भारी कमी आई है। मौतें कम होने का यह भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। 

सरकार ने निर्माण की भ्रम की स्थिति 

वेदप्रकाश आर्य, मनपा में पूर्व राकांपा गटनेता के मुताबिक पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष कोरोना महामारी होने के बावजूद  1633 लोगों की  मृत्यु कम हुई। पिछले वर्ष अप्रैल 2019 से अगस्त 2019 तक 1633 अधिक लोगों की मृत्यु  हुई थी। राज्य सरकार और भारत सरकार ने संपूर्ण देश में जो भ्रम की स्थिति निर्माण की है, उसका खुलासा करना चाहिए। जनता के मन मे कोरोना महामारी का  भय है। लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। 

मौत सिर्फ कोरोना से नहीं, अन्य कारण भी 

डाॅ. अविनाश गावंडे, अधीक्षक, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल का कहना है कि 70 से 90 प्रतिशत मरीजों की मौत का कारण दूसरी बीमारियां भी रही हैं। इसमें हार्ट के मरीज, किडनी, शुगर सहित अन्य बीमारियां हैं। दूसरी बीमारियां अापके शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देती हैं। इस कारण काेरोना ही नहीं, दूसरे वायरस का असर भी ज्यादा होता है।

प्रभाग-32 में कोविड-19 जांच शिविर

उधर "मेरा परिवार, मेरी जिम्मेदारी' अभियान के तहत शनिवार को प्रभाग-32 के खानखोजे नगर स्थित महाकाली मंदिर प्रांगण में दक्षिण नागपुर भाजपा की ओर से नि:शुल्क कोविड-19 जांच शिविर का आयोजन किया गया। विधायक मोहन मते के मार्गदर्शन व परशु ठाकुर, नगरसेवक रूपाली ठाकुर के नेतृत्व में आयोजित शिविर में क्षेत्र के नागरिकों की आरटी-पीसीआर जांच की गई। शिविर का शुभारंभ भारत माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। नागरिकों की सुविधा के लिए सैनिटाइजर, पीने का पानी की व्यवस्था के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा गया।

छापरू नगर में आरटीपीसीआर शिविर में लोगों ने कराई जांच 

कोरोना संक्रमण नागरिकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। कई बार लापरवाही व अज्ञानता के चलते लोग जांच कराने से घबराते हैं। मनपा द्वारा शहर में जोन अनुसार मोबाइल जांच केंद्र बनाए गए। इसके तहत नि: शुल्क आरटी-पीसीआर जांच की जा रही है। रविवार को सुबह करीब 10 बजे छापरू नगर कॉलोनी क्रमांक-1 में विधायक कृष्णा खोपड़े, चंदन गोस्वामी द्वारा छापरू समाज के सदस्यों की जांच के उद्देश्य से शिविर का आयोजन किया। आईसीएमआर के नियमों का पालन करते हुए अपना नाम रजिस्टर्ड कर जांच कराई गई। शिविर में सभी को टोकन नंबर दिया गया था, इससे लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ी। सफलतार्थ जमनादास वाघवानी, भूपेंद्र जोशी, नानक नाथानी, ईश्वर जुम्मानी, दया वेनस्यनी, गोपाल, अशोक वाघवानी, जेठा खंडवानी, मूलचंद वाघवानी आदि ने प्रयास किया। 

दयानंद पार्क में भी लगा शिविर 

महानगरपालिका के सहयोग से दयानंद पार्क स्थित स्वास्थ्य सभापति वीरेंद्र कुकरेजा के कार्यालय में नि:शुल्क आर-टीपीसीआर टेस्ट  कैम्प का आयोजन किया गया। मेयो अस्पताल के डाक्टरों की टीम ने नागरिकों की जांच की। सफलतार्थ वार्ड अध्यक्ष जगदीश वंजानी, राजेश धनवानी, विजय तांबे, राजेश स्वामनानी, अर्जुन गंगवानी, प्रशांत घोरडाकर, चिराग गोधानी, नीता कांबडे आदि ने प्रयास किया।

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