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अर्न एंड लर्न योजना से जरूरतमंद विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

अर्न एंड लर्न योजना से जरूरतमंद विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

डिजिटल डेस्क, नागपुर। नागपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। विश्वविद्यालय ने अपने सभी संबद्ध कॉलेजों में पढ़ने वाले जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए भी 'अर्न एंड लर्न' योजना लागू की है। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी कॉलेज में ही पार्ट टाइम काम कर सकते हैं। इसमें भी पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। विश्वविद्यालय को इस योजना के लिए कुल 7 करोड़ 50 लाख रुपए खर्च होने की उम्मीद है।  इसके लिए बजट मैं प्रावधान करने की तैयारी की जा रही है।

अब तक यूनिवर्सिटी के विभागों तक ही सीमित थी व्यवस्था
उल्लेखनीय है कि अब तक विश्वविद्यालय के विभागों तक ही यह योजना सीमित थी। इस वर्ष "अर्न एंड लर्न' योजना में पार्ट टाइम काम के लिए 314 विद्यार्थियों के आवेदन मिले थे। इसमें से यूनिवर्सिटी ने 200 जरूरतमंद विद्यार्थियों को अपने ही किसी विभाग या संचालित कॉलेज में नियुक्त गया था। पहली सूची में यूनिवर्सिटी ने 155 विद्यार्थियों का चयन किया था। बाद में दूसरी सूची में यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी कल्याण विभाग ने 45 विद्यार्थियों का नाम जारी किया था। इन विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के 46 शैक्षणिक व प्रशासनिक विभागों में ही नियुक्त किया गया था।

छह महीने चलेगी योजना 
कॉलेजों में 15 सितंबर से 15 मार्च तक और विश्वविद्यालय के विभागों मंे 15 सितंबर से अप्रैल माह तक अर्न एंड लर्न योजना चलेगी। दरअसल यूनिवर्सिटी में बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर तबके के विद्यार्थी भी पढ़ते हैं। उन्हें आर्थिक सहयोग करने की दृष्टि से यह योजना चलाई जाती है। इसके तहत विश्वविद्यालय कैंपस या संचालित कॉलेज के ही किसी विभाग में विद्यार्थी को पार्ट टाइम काम दिया जाता है। इससे विद्यार्थी को पढ़ाई के साथ कुछ आमदनी भी हो जाती है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी कल्याण विभाग ने इस योजना को विस्तार देकर आगामी शैक्षणिक वर्ष से यह योजना कॉलेजों में भी शुरू करने का निर्णय लिया है।  

गरीब बच्चों को आर्थिक मदद
कॉलेजों में भी गरीब बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें आर्थिक मदद की जरूरत होती है। ऐसे ही विद्यार्थियों के लिए "अर्न एंड लर्न' योजना को लागू किया गया है। पहले यह सिर्फ विश्वविद्यालय स्तर पर ही संचालित होती थी। अब इसे कॉलेज स्तर पर भी लागू किया गया है।
-डॉ. अभय मुद्गल, संचालक, विश्वविद्यालय विद्यार्थी कल्याण विभाग

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