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प्रदूषण नहीं खुशियों को दें दावत : धुआं बढ़ा सकता है अस्थमा के मरीजों की परेशानी

प्रदूषण नहीं खुशियों को दें दावत : धुआं बढ़ा सकता है अस्थमा के मरीजों की परेशानी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाले विषैले धुएं के कारण अस्थमा व अन्य प्रकार के श्वास रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। देश में हुए अध्ययन के अनुसार पटाखों से निकलने वाले धुएं से 31.2 फीसदी लोगों को खांसी, गले में घरघराहट एवं सांस फूलने जैसी परेशानी बढ़ जाती है। इसके साथ ही ऐसे लोगों काे भी परेशानी होती है, जिन्हें पहले से कोई श्वास संबंधी परेशानी नहीं है। श्वास संबंधी परेशानी के अलावा फटाखों से जलने, कान तथा आंख को नुकसान का भी खतरा रहता है। श्वास रोग विशेषज्ञों के अनुसार पटाखों में 75 प्रतिशत पोटैशियम नाइट्रेट, 15 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड, 10 प्रतिशत सल्फर होता है। इन्हंे जलाने पर कई तरह के खतरनाक गैस निकलते हैं।

पहले से ही रखें तैयारी

दिवाली के दौरान अस्थमा व अन्य प्रकार के श्वास संबंधी रोगियों को पहले से तैयारी रखनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार वातावरण में धुएं व विषैली गैसों के बढ़ने से अस्थमा अटैक या श्वास की परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में मरीजों को अपने इनहेलर यंत्र हमेशा साथ रखना चाहिए। 

प्रदूषण को नहीं, खुशियों को दें दावत

धुएं के कारण शहर की आबोहवा खराब हो जाती है। कुछ क्षेत्रों में तो खतरनाक स्थिति तक पहुंच जाती है। देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंच जाने के कारण पटाखों पर आंशिक प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। वहां केवल ग्रीन पटाखे को ही अनुमति मिली है। भले ही नागपुर में स्थिति इतनी खराब नहीं हो, पर यहां भी ध्यान देने की जरूरत है। महाराष्ट्र पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आकड़ों से साफ है कि दिवाली के बाद शहर में वायु प्रदूषण का स्तर लगभग दो गुना हो जाता है। पर्यावरणविदों ने शहरवासियों से इस दिवाली खुशियों को दावत देने और प्रदूषण बढ़ाने वाले गतिविधियों से दूर रहने की अपील की है।  

रोशनी और साज-सज्जा करें

दिवाली पर पटाखों के बजाय रोशनी और साज-सज्जा पर ध्यान देने की जरूरत है। पटाखों के कारण न सिर्फ वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि बड़ी संख्या में पशु-पक्षियों को भी परेशानी होती है। बाजार में ग्रीन पटाखे के नाम पर मिल रहे पटाखे भी 30 फीसदी ही कम प्रदूषण करते हैं, पर प्रदूषण तो करते ही हैं, ऐसे में पटाखों से दूरी ही बेहतर है।

पर्यावरण अनुकूल हो दिवाली, स्वच्छता पर ध्यान दें

दिवाली रोशनी, स्वच्छता और सजावट का त्योहार है। हमें घर व आस-पास के परिसर की स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही दीयों की रोशनी से दुनिया और मन का अंधेरा दूर करना चाहिए। कुछ पल की खुशी के लिए पटाखे छोड़कर सांस लेना दूभर करने से अच्छा है दिवाली मनाने का अन्य विकल्पों को अपनाया जाए। यह हम सभी के लिए उत्तम होगा।

 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।