हटा प्रतिबंध, जोश दोगुना: गणेशोत्सव की तैयारी तेज, दिन-रात काम कर रहे मूर्तिकार - मंडलों में उत्साह

July 24th, 2022

डिजिटल डेस्क, नागपुर, चंद्रकांत चावरे| राज्य के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव के रूप में गणेशोत्सव की पहचान है। इस बार 31 अगस्त से गणेशोत्सव की शुरुआत होगी। बीते दो साल कोरोना के कारण इस उत्सव के प्रति उत्साह कम हो गया था। अब सरकार ने गणेशोत्सव पर लगे सारे प्रतिबंध हटा दिए हैं। इस कारण मूर्तिकार व मंडलों में उत्साह बढ़ा है। इस बार गणेशोत्सव दोगुने उत्साह से मनाए जाने की तैयारियां की जा रही है। गणेशोत्सव के दौरान वृंदावन के बांकेबिहारी के दर्शन हाेंगे, वहीं शिवसृष्टि और शिवराज्याभिषेक देखने को मिलेगा। इसके अलावा देश के प्रसिद्ध मंदिरों समेत पौराणिक घटनाओं पर आधारित झांकियों की प्रस्तुति देखने को मिलेगी।

22 फीट के भी होंगे विघ्नहर्त्ता : ऊंचाई की पाबंदी हटते ही शहर में 5 फीट से लेकर 22 फीट तक की गणेश मूर्तियां बनाने का काम तेजी से शुरू हो चुका है। शहर में बड़ी मूर्तियां बनाने वाले 50 मूर्तिकारों को डेढ़ महीने से भी कम समय में 5 से 22 फीट तक की 1000 मूर्तियां बनाने की चुनौती है। कोरोनाकाल के बाद आने वाले गणेशोत्सव ने मूर्तिकारों व मंडलों में नई ऊर्जा भर दी है। मूर्तिकार दिन-रात लगे हुए हैं।

दो साल के बाद जोरदार उत्साह : बरसों से धूमधाम से मनाया जाने वाला गणेशोत्सव पिछले दो साल तक फीका-फीका रहा है। शहर में 1000 छोटे-बड़े सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल हैं। इन मंडलों में 4 से 22 फीट तक की मूर्तियों की स्थापना होती है। इनमें से 250 बड़े मंडलों में गणेशोत्सव का भव्य स्वरूप होता हैं। जिसमें पौराणिक कथाओं पर आधारित झांकियां, देश के प्रसिद्ध मंदिरों की प्रतिकृति का समावेश होता है। 

समय कम, मूर्तियां बड़ी

31 अगस्त से गणेशोत्सव प्रारंभ होगा। सरकार ने गणेशोत्सव को लेकर प्रतिबंध हटाने में काफी विलंब किया है। डेढ़ महीने से कम समय बचा है। शहर में बड़ी मूर्तियां बनाने वाले 60 मूर्तिकार हैं। एक मूर्तिकार 40 से 50 मूर्तियां ही बना पाता है। यह भी तब जब समय दो महीने से अधिक हो। लेकिन अब समय कम होने के बावजूद इस साल मूर्तिकारों में जोश है।  

मनमोहक होंगी झांकियां

सार्वजनिक मंडलों ने भी इस बार दोगुने जोश से गणेशोत्सव मनाने का फैसला किया है। इसके लिए बैठकें लेकर अपने मंडल द्वारा गणेशोत्सव की भव्यता प्रस्तुत करने के लिए विचार मंथन किया जा रहा है। कुछ मंडलों ने मूर्तियों का ऑर्डर दे दिया है। वहीं कुछ मंडलों में मूर्तियों के साथ ही इस बार की विशेष झांकियों की प्रस्तुति की तैयारियां भी शुरू कर दी है।

बांकेबिहारी का मंदिर भी 

शहर के चर्चित मंडलों में से एक संती गणेशोत्सव मंडल व सांस्कृतिक मंडल द्वारा इस बार वृंदावन के प्रसिद्ध बांकेबिहारी के मंदिर की प्रतिकृति तैयार की जाने वाली है। 6000 वर्ग फीट जमीन पर इस मंदिर का निर्माण किया जाएगा। दो-तीन दिन में इसके निर्माण की शुरुआत होगी। मंदिर का सेट तैयार करने के लिए कोलकाता व मुंबई के कलाकार नागपुर पहुंचेंगे। बांके बिहारी मंदिर की दिनचर्या के अनुसार यहां कार्यक्रम हाेंगे। गणेशजी की मुख्य मूर्ति 11 फीट होगी। वहीं बांके बिहारी की मनोहारी मूर्ति विशेष आकर्षण होगी। बांके बिहारी की पूजा-अर्चना, प्रसाद व दिनचर्या पर आधारित कार्यक्रम के लिए वृंदावन से दो पंडितों को आमंत्रित किया गया है। यह पंडित गणेशोत्सव के समापन तक यहीं रहेंगे। हर रोज विविध कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। 

रोशनाई, बैंड, ढोल-ताशा-पथक तैयार

सेंट्रल एवेन्यू पर आकर्षक रोशनाई, गणेशजी के आगमन व विसर्जन के दौरान भव्य शोभायात्रा, विविध धार्मिक बैंड पथक आदि का समावेश होगा। महल का राजा गणेशोत्सव मंडल द्वारा शिव सृष्टि साकार की जाएगी। इसमें छत्रपति शिवाजी महाराज के कार्यकाल के विशेष अवसरों का दर्शन होगा। गणेशोत्सव में शिवराज्याभिषेक की विशेष झांकी तैयार की जा रही है। शहर के कलाकारों द्वारा शिव सृष्टि का सेट तैयार किया जाएगा। मंडल की तरफ से 11 फीट की मूर्ति स्थापित की जानेवाली है। मंडल द्वारा आकर्षक रोशनाई, बैंड, ढोल ताशा-पथक समेत कई तरह की तैयारियां की जा रही है। इसी तरह शहर के अन्य बड़े मंडलाें द्वारा विविध थीम पर गणेशोत्सव मनाने की तैयारियां शुुरू की गई है।