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प्रधानमंत्री ने बिहार में पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़ी तीन प्रमुख परियोजनाएं राष्‍ट्र को समर्पित की

September 15th, 2020 10:16 IST
प्रधानमंत्री ने बिहार में पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़ी तीन प्रमुख परियोजनाएं राष्‍ट्र को समर्पित की

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज बिहार में पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़ी तीन प्रमुख परियोजनाओं को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश को समर्पित किया। परियोजनाओं में पारादीप-हल्दिया-दुर्गापुर पाइपलाइन विस्तार परियोजना का दुर्गापुर-बांका खंड और दो एलपीजी बॉटलिंग संयंत्र शामिल हैं। उन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तत्वावधान में इंडियनऑयल और एचपीसीएल, पीएसयू द्वारा अधिकृत किया गया है। इस अवसर पर प्रधान मंत्री ने कहा कि कुछ साल पहले बिहार के लिए घोषित विशेष पैकेज ने राज्य के बुनियादी ढांचे पर ध्यान केन्‍द्रित किया। उन्होंने कहा कि बिहार के लिए दिए गए विशेष पैकेज में पेट्रोलियम और गैस से संबंधित 21 हजार करोड़ रुपये की 10 बड़ी परियोजनाएँ थीं। इनमें से आज यह सातवीं परियोजना है जो बिहार के लोगों को समर्पित की जा रही है। उन्होंने अन्य छह परियोजनाओं की भी सूची दी जो बिहार में पहले पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि वह एक महत्वपूर्ण गैस पाइपलाइन परियोजना दुर्गापुर-बांका खंड (लगभग 200 किमी) का उद्घाटन कर रहे हैं, जिसकी उन्होंने लगभग डेढ़ साल पहले आधारशिला रखी थी। उन्होंने चुनौतीपूर्ण इलाका होने के बावजूद इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए इंजीनियरों और मजदूरों की कड़ी मेहनत और राज्य सरकार की सक्रिय सहायता की सराहना की। उन्होंने बिहार को कार्य संस्कृति से बाहर लाने में एक बड़ी भूमिका निभाने के लिएबिहार के मुख्यमंत्री की बड़ी भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि पहले एक पीढ़ी काम शुरू करती थी और दूसरी पीढ़ी इसे पूरा करती थी। उन्होंने कहा कि इस नई कार्य संस्कृति को मजबूत करने की जरूरत है और यह बिहार और पूर्वी भारत को विकास के पथ पर ले जा सकती है। प्रधानमंत्री ने शास्त्रों से उद्धृत किया, "सामर्थ्य मूलं स्वातंत्र्यम्, श्रम मूलं वैभवम्।" अर्थ शक्ति जिसका अर्थ है शक्ति स्वतंत्रता का स्रोत है और श्रम शक्ति किसी भी राष्ट्र के विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि बिहार सहित पूर्वी भारत में न तो श्रम शक्ति की कमी है, और न ही इस स्थान पर प्राकृतिक संसाधनों की कमी है और इसके बावजूद, बिहार और पूर्वी भारत दशकों तक विकास के मामले में पीछे रहे और राजनीतिक, आर्थिक और अन्‍य प्राथमिकताओं के कारणों से उन्‍हें अंतहीन देरी का सामना करना पड़ा। और अन्य प्राथमिकताएं। उन्होंने कहा कि चूंकि सड़क संपर्क, रेल संपर्क, हवाई संपर्क, इंटरनेट कनेक्टिविटी पहले प्राथमिकता नहीं थी, इसलिए बिहार में गैस आधारित उद्योग और पेट्रो-कनेक्टिविटी की कल्पना नहीं की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि भूमिबद्ध राज्‍य होने और पेट्रोलियम और गैस से संबंधित संसाधनों का अभाव होने के कारण गैस आधारित उद्योगों का विकास बिहार में एक बड़ी चुनौती था जो अन्यथा समुद्र से सटे राज्यों में उपलब्ध हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि गैस आधारित उद्योग और पेट्रो-कनेक्टिविटी का लोगों के जीवन पर, उनके जीवन स्तर पर सीधा प्रभाव पड़ता है और लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं। उन्होंने आज कहा, जब बिहार और पूर्वी भारत के कई शहरों में सीएनजी और पीएनजी पहुंच रही है, तो यहां के लोगों को ये सुविधाएं आसानी से मिल जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा योजना के अंतर्गत पूर्वी समुद्र तट और पश्चिमी समुद्री तट पर कांडला पर पूर्वी सागर पर पूर्वी भारत को पारादीप से जोड़ने का भगीरथ का प्रयास शुरू हुआ और सात राज्यों को इस पाइपलाइन के माध्यम से जोड़ा जाएगा, जो लगभग 3000 किलोमीटर लंबी है, जिसमें बिहार की भी प्रमुख भूमिका है। पारादीप - हल्दिया से जाने वाली लाइन को अब पटना, मुज़फ़्फ़रपुर तक बढ़ाया जाएगा और कांडला से आने वाली पाइपलाइन जो गोरखपुर तक पहुँच चुकी है, उसे भी इससे जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि जब पूरी परियोजना तैयार हो जाएगी, तो यह दुनिया की सबसे लंबी पाइपलाइन परियोजनाओं में से एक बन जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन गैस पाइपलाइनों के कारण, बिहार में बड़े बॉटलिंग प्लांट लगाए जा रहे हैं। जिनमें से बांका और चंपारण में आज दो नए बॉटलिंग प्लांट शुरू किए गए हैं। इन दोनों संयंत्रों में हर साल 125 मिलियन से अधिक सिलेंडर भरने की क्षमता है। ये संयंत्र गोड्डा, देवघर, दुमका, साहिबगंज, पाकुड़ जिलों और झारखंड में उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों की एलपीजी आवश्यकताओं को पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि गैस पाइपलाइन के

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