तय समय पर राम मंदिर निर्माण: चुनाव से ठीक पहले दिसंबर 2023 तक जनता के लिए खुलने की संभावना

September 9th, 2021

हाईलाइट

  • अयोध्या में राम मंदिर के लिए निर्माण स्थल पर फिलिंग वर्क पूरा
  • दिसंबर 2023 तक जनता के लिए खुलने की उम्मीद
  • अयोध्या में मंदिर निर्माण पर एक समीक्षा बैठक 27-29 अगस्त को हुई थी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर के लिए निर्माण स्थल पर फिलिंग वर्क पूरा हो गया है। मंदिर के 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले दिसंबर 2023 तक जनता के लिए खुलने की उम्मीद है।

मंदिर के निर्माण से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, अयोध्या में मंदिर निर्माण पर एक समीक्षा बैठक 27-29 अगस्त को हुई थी, जहां यह नोट किया गया था कि निर्माण कार्य निर्धारित समय के अनुसार चल रहा है। समीक्षा बैठक में कोषाध्यक्ष-न्यास स्वामी गोविंददेव गिरिजी; चंपत राय, महासचिव-ट्रस्ट; और ट्रस्ट के सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा और डॉ अनिल मिश्रा; कंस्ट्रक्शन चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने भाग लिया। टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स और लार्सन एंड टुब्रो की समिति और अधिकारी भी अन्य लोगों के बीच उपस्थित थे।

अधिकारी ने कहा, 'फिलिंग का काम रिकॉर्ड समय में लगभग पूरा हो गया है। स्पेसिफाइड रॉ मटेरियल की खरीद में जिला अधिकारियों और राज्य सरकार का सहयोग महत्वपूर्ण था।' स्ट्रक्चर की स्ट्रक्चरल लॉन्गेटिविटी सुनिश्चित करने के लिए सॉइल टेस्टिंग के बाद कंस्ट्रक्शन टीम ने नींव बनाने के लिए 12 मीटर गहरी खुदाई करने का फैसला किया था। इसके बाद, विशेषज्ञ समिति के विनिर्देशों के अनुसार फाउंडेशन की 18,500 वर्ग मीटर साइट को 'इंजीनियर्ड फिल' (रोलर कॉम्पैक्ट कंक्रीट) से भर दिया गया था।

एक अधिकारी ने कहा, 'इंजीनियर्ड फिल की कुल मात्रा लगभग 44.5 लाख क्यूबिक फीट है। परिधि को उच्च गुणवत्ता वाली मिट्टी से भरा जा रहा है।' सूत्रों ने कहा कि सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट (सीबीआरआई), रुड़की ने 2500 साल के किसी भी भूकंप ट्रैक के लिए कम्प्यूटरीकृत सिमुलेशन के बाद अंतिम डिजाइन विकसित किया है।' सूत्रों ने बताया कि इंजीनियर फिल के ऊपर पांच फीट मोटाई का राफ्ट बिछाया जाएगा। उन्होंने कहा कि डिजाइन और ड्रॉइंग का काम पूरा कर लिया गया है और लगभग 3 लाख क्यूबिक फीट कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाएगा।

अधिकारी ने कहा, 'राफ्ट वर्क जल्द ही शुरू होगा और अक्टूबर 2021 तक पूरा होने की संभावना है। राफ्ट के ऊपर प्लिंथ का निर्माण किया जाना है। प्लिंथ की ऊंचाई 16 फीट होगी। मंदिर के प्लिंथ में मिर्जापुर पत्थर का प्रयोग करने का निर्णय लिया गया है। प्लिंथ के वॉटरप्रूफिंग के लिए, प्लिंथ के चारों ओर ग्रेनाइट स्टोन की तीन परतें लगाई जाएंगी।' 

सूत्रों ने बताया कि परकोटा के बाहर पूरे परिसर के लिए प्रारंभिक मास्टरप्लान तैयार कर लिया गया है। इसमें तीर्थयात्रा सुविधा केंद्र, संग्रहालय, अभिलेखागार, अनुसंधान केंद्र, सभागार, गौशाला, यज्ञ शाला, प्रशासनिक भवन आदि शामिल हैं। मास्टरप्लान में कुबेर टीला और सीता कूप जैसे हैरिटेज स्ट्रक्चर के संरक्षण और विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि कॉम्प्लेक्स को जीरो डिस्चार्ज कॉन्सेप्ट और ग्रीन बिल्डिंग फीचर्स पर डिजाइन किया गया है।