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साइंस फेस्टिवल विज्ञान से परिचित कराने का सशक्त माध्यम -डॉ. मांडे

साइंस फेस्टिवल विज्ञान से परिचित कराने का सशक्त माध्यम -डॉ. मांडे

हाईलाइट

  • पब्लिक ऑउटरिच प्रोग्राम

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  साइंस फेस्टिवल लोगों और विद्यार्थियों को विज्ञान से जोड़ने का माध्यम है। डॉ. शेखर सी मांडे ने कहा कि देश में अब भी गिनती के साइंस फेस्टिवल आयोजित किए जाते हैं, इसलिए इनकी संख्या बढ़ाने की जरूरत है। यह छात्रों को विज्ञान की ओर उन्मुख करने का सशक्त माध्यम है।

सीएसआईआर के डायरेक्टर जनरल और डीएसआईआर के सचिव डॉ. मांडे ने यह विचार प्रस्तुत किए। वे सीएसआईआर-नीरी की ओर से विज्ञान व तकनीकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और विज्ञान भारती के सहयोग से आयोजित पब्लिक ऑउटरिच प्रोग्राम में बोल रहे थे।

यह कार्यक्रम इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल-2019 के पूर्व आयोजन के रूप में किया गया। डॉ. मांडे ने संस्थान परिसर में स्थित स्मृति वन में पौधारोपण अभियान का औपचारिक उद्घाटन किया। वायु गुणवत्ता की जांच के लिए विशेष रूप से तैयार ड्रोन का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में विज्ञान भारती के संयुक्त सचिव नरेश चेफेकर, नीरी के निदेशक राकेश कुमार, डॉ. हेमंत पुरोहित, डॉ. जे.एस. पांडे उपस्थित थे। 

विज्ञान से जुड़े लोगों के लिए मंच

डॉ. मांडे ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल विद्यार्थी, रिसर्चर, अाविष्कारक और आम लोगों को एक मंच पर लाने वाला देश का सबसे बड़ा कार्यक्रम है। उन्होंने बताया कि सांसदों द्वारा देश के हर राज्य के  ग्रामीण इलाके से दत्तक लिए गए पांच-पांच विद्यार्थी कार्यक्रम में शामिल होंगे। 

वायु प्रदूषण की जांच करेगा कशान एक्यू 

सीएसआईआर नीरी ने वायु प्रदूषण की लंबवत जांच के लिए ड्रोन तैयार किया है। इसे नीरी करेगा और नाम कशान एक्यू दिया गया है। ईआरएमडी विभाग के वैज्ञानिक पीयूष कोकाटे ने बताया कि कशान एक्यू में कई तरह के सेंसर्स लगे हैं। यह ड्रोन ऐसे जगहों पर भी वायु प्रदूषण संबंधी आंकड़े जमा कर सकता है, जहां दूसरे उपकरणों से आंकड़े लेना कठिन होता है। बड़ी-बड़ी इमारतों और डंपिंग यार्ड के ऊपर वायु प्रदूषण संबंधी आंकड़ों को जमा करने के लिए यह ड्रोन उपयोगी साबित हो सकता है। 

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