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मनोरोगियों को उपचार के साथ दिया जा रहा आत्म निर्भरता का प्रशिक्षण

मनोरोगियों को उपचार के साथ दिया जा रहा आत्म निर्भरता का प्रशिक्षण

डिजिटल डेस्क, नागपुर । मानसिक विकार किसी को भी हो सकता है लेकिन समाज में किसी व्यक्ति के बारे में ऐसा होने पर उसकी परेशानी को न समझ उल्टा उसे दिमागी संतुलन बिगड़ने का लेबल लगा दिया जाता है। ऐसे समय में यदि उचित उपचार और अच्छाा माहौल मिले, तो मरीज स्वस्थ्य होकर समाज का हिस्सा बन सकता है। इसी कड़ी में प्रादेशिक मनोरुग्णालय व टाटा ट्रस्ट साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उपचार के साथ ही आत्म निर्भरता का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वह खुद के पैरों पर खड़ा हो समाज का हिस्सा बन सके। 

पुनर्वसन वार्ड में रखकर आत्म निर्भरता का प्रशिक्षण
प्रादेशिक मनोरुग्णालय में हाल ही में पुनर्वसन वार्ड (रिफार्म वॉर्ड) बनाया गया है। इस वार्ड में 10 मरीजों को रखा गया है। इन मरीजों को उपचार के बाद उनमें हो रहे सुधार के आधार पर अलग किया गया है। ऐसे मरीजों अस्पताल की ड्रेस नहीं, बल्कि सामान्य कपड़े पहनते हैं। वे सुबह जागने के बाद नित्य क्रिया से निवृत्त होकर आपस में मिलकर अपने कमरे की सफाई करते है। अपने कपड़े खुद धोते हैं और खुद खाना लेने के लिए जाते है। यह सब उनको आत्म निर्भर बनाने के लिए किया जा रहा है।

सबको परोसते हैं नाश्ता
मनोरुग्णालय में  टाटा ट्रस्ट के सहयोग से एक ट्रक में रेस्टोरेंट चलता है जो वहां आने वाले डॉक्टर, स्टॉफ, मरीज और उनके परिजनों को चाय-नाश्ता उपलब्ध करवाता है। यहां चाय नाश्ता बनाने के अलावा नोन-स्किल काम अस्पताल में उपचाररत मरीज करते है। इन मरीजों को उनमें हो रहे सकारात्मक सुधार के बाद चुना जाता है। ग्राहकों से ऑर्डर लेने से लेकर उनको नाश्ता परोसने तथा सफाई का काम करते है। यह काम उनके प्रशिक्षण के साथ ही आय का जरिया भी बन गया है। यदि लगातार अच्छा प्रदर्शन रहा, तो टाटा ट्रस्ट इनके लिए किराए पर घर लेकर देख-रेख में किसी निजी संस्थान में नोन-स्किल काम के लिए प्रेरित करेगी, जिससे वह समाज का हिस्सा बन सकें।  

ऐसी है इनकी कहानी
नरेश कुमार (परिवर्तित नाम) खुद को गोरखपुर का बताता है। हालांकि पुलिस के माध्यम से की गई जांच में उसके परिजन वहां नहीं मिले। 2015 में उसे मनोरुग्णालय में लाया गया था तब वह बहुत काम बोलता था। अब उपचार के बाद वह सवालों का जवाब देता है और बताया गया काम करता है। ऐसी ही स्थिति दिनेश कुमार (परिवर्तित नाम) की है। उसे 2017 में चंद्रपुर से लाया गया था। अभी जो भी काम बोलो] वह काम करता है। विवेक कुमार (परिवर्तित नाम) की भी यही कहानी है। उसे 2011 में यहां लाया गया था। उसमें काफी सुधार है और वह बाहर निकलकर काम करना चाहता है।  स्टॉफ से पूछता भी है कि मुझे बाहर जाना है, कौन ले जाएगा? यह तीनों रेस्टोरेंट में काम करते है।

ठीक होने वाले मरीजों के लिए रिफार्म वार्ड बनाया

रिफार्म वार्ड बनाया है, जिसमें ठीक होने वाले मरीजों को रखते है। नान-स्किल काम उनको सिखाया जा रहा है, जिससे वह अपने परिवार में लौटें, तो उन पर बोझ न बनें। वह खुद ही अपना सारा काम करते है। चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता और स्टॉफ सभी का उन पर ध्यान रहता है और वह उन्हें प्रेरित करते है। इस काम के बदले में मानदेय के रूप में उनके खाते में भुगतान किया जाएगा।  -डॉ.माधुरी थोरात, अधीक्षक, प्रादेशिक मनोरुग्णालय

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।