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 खतरनाक हो चुकी है जर्जर पानी की टंकी - स्कूल के 250 मासूमों की जान संकट में

 खतरनाक हो चुकी है जर्जर पानी की टंकी - स्कूल के 250 मासूमों की जान संकट में

डिजिटल डेस्क कटनी । जिस टंकी से लोगों की प्यास बुझती थी, अब वही पानी की टंकी  मासूमों के ऊपर खतरा बनीं हुई है। माध्यमिक शाला नदीपार स्कूल के बीचों-बीच बनीं टंकी को तकनीकी दल भी अनुपयोगी बता चुका है। इसके बावजूद नगर निगम के अफसर हादसे के इंतजार में हाथ पर हाथ रखकर बैठे हुए हैं, जिससे स्कूल प्रशासन सख्ते में है। यहां पर वर्तमान समय में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में दो सौ से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं,इसी परिसर में आंगनबाड़ी केन्द्र में 50 मासूम दर्ज हैं।   इस स्थिति में वर्ष भर खतरों के साया में मासूम पढऩे को विवश हैं। दो वर्ष के अंतराल में स्कूल प्रशासन अनुपयोगी टंकी को हटाने के लिए कई बार नगर निगम को पत्र भी लिख चुका है। इसके बावजूद अफसर सब कुछ जानते हुए भी अंजान है। कुछ दिन पहले यहां पर शहर सरकार आपके द्वार का शिविर लगाया गया था। जिसमें निगम के अफसर पहुंचे थे। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनीं हुई है।
एक हटाई दूसरे से मुंह मोड़ा
भोपाल में जर्जर टंकी गिरने के कारण हुए हादसे के बाद नगर निगम ने भी पानी टंकियों की जांच कराई। जिसमें कई टंकी ऐसे रहे। जिसमें सुधार कार्य करते हुए उसे दुरुस्त कराया गया। आजाद चौक और नदीपार स्कूल की टंकियों की भी जांच तकनीकी अधिकारियों ने की। टंकियों की जर्जर हालात को देखते हुए अधिकारियों ने दोनों टंकियो को भविष्य के लिए खतरनाक बताया। इसके बावजूद निगम के अफसर आजाद चौक के समीप की जर्जर टंकी को तो हटा दिए, लेकिन नदीपार स्कूल की टंकी की तरफ मुंह मोड़ लिए।
इसलिए बना है खतरा
वर्तमान समय में स्कूल परिसर के बीचों-बीच यह पानी की टंकी बनीं हुई है। टंकी के चारों तरफ सुरक्षा को लेकर किसी तरह के इंतजाम नहीं किए गए हैं।टंकियों की सीढ़ी ऊपरी हिस्से में जर्जर है। प्लेटफार्म से लोहे के राड दिखाई दे रहे हैं। सीढ़ी भी इस तरह से बनीं हुई है कि बच्चे खेल-खेल में सीढिय़ों में भी चढऩे से नहीं चूकते। इसके पहले एक बच्चा सीढ़ी से गिरकर घायल भी हो चुका है। इसकी जानकारी स्कूल प्रधान अध्यापिका श्रीमती ज्योति वर्मा ने नगर निगम को लिखित में भी दी, फिर भी निगम के अफसर नहीं चेते।
तीन संस्थाओं की सुरक्षा
यहां पर तीन-तीन संस्थाओं की सुरक्षा को प्रशासन ने ताक में रख दिया है। नदीपार प्राथमिक विद्यालय में करीब सौ विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। माध्यमिक स्कूल में 107 बच्चे अध्ययनरत हैं। संभवत: जिले का एक ऐसा यह स्कूल होगा। जहां पर सबसे अधिक बच्चे अध्ययनरत हैं। आंगनबाड़ी में भी रोजाना दर्जनों
बच्चे पहुंचते हैं। इसके बावजूद तीन-तीन संस्थाओं में दर्ज मासूमों की सुरक्षा को प्रशासन ने ताक में रख दिया है। टंकी के अनुपयोगी होने पर समीप में ही एक टंकी का निर्माण करते हुए उससे वार्डों में पानी की सप्लाई की जाती है। इसके बावजूद इस टंकी को शो-पीस बनाकर निगम के अफसर रखे हुए हैं।
इनका कहना है
टंकी से किसी तरह से खतरा क्षेत्र में नहीं है। टंकी की स्थिति को देखते हुए उसे अनुपयोगी घोषित कर दिया गया है। साथ में उसमें पानी भी नहीं भरा
जा रहा है।
 राकेश शर्मा, ईई नगर निगम कटनी
 

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डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला टीम ने क्वार्टर फाइनल में विश्व की नंबर 2 टीम ऑस्ट्रेलिया को हरा कर सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाकर एक नया इतिहास रच दिया है। 41 सालों के बाद भारतीय टीम सेमीफाइनल तक पहुची है। अब जानते है उन महिला खिलाड़ियो के बारे में जिन्होंने टीम को जिताने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।  

रानी रामपाल ( कैप्टन)

रानी रामपाल भारतीय हॉकी टीम की कैप्टन हैं। जिन्हें भारतीय हॉकी टीम की रानी भी कहा जाता है। रानी रामपाल हरियाणा के शाहबाद मारकंडा की रहनी वाली हैं। रानी एक मिडिल क्लास फैमिली से हैं और उनकी जिन्दगी संघर्ष भरी रही है। रानी के घर में उनके पिता और दो बड़े भाई हैं।सबसे बड़े भाई बढ़ई हैं और दूसरे भाई किसी दुकान पर काम करता हैं। इसके साथ ही रानी के पिता एक तांगा चलाते हैं। बता दें कि रानी ने 14 साल की उम्र में ही अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेल लिया था। और हाल ही में रानी की कप्तानी में भारतीय हॉकी टीम ने फिर कमाल कर दिखाया है।  

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सविता पूनीया
हरियाणा की सविता पूनीया भारतीय हॉकी टीम की गोलकीपर हैं। सोमवार को टोक्यो ओलंपिक में अपना शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खड़ी रहीं और भारत को जीत दिलाई। दुनिया की दूसरे नंबर पर आने वाली महिला हॉकी टीम ऑस्ट्रेलिया के सामने भारत ने अपना उच्च प्रदर्शन दिखाते हुए पहले क्वार्टर में ऑस्ट्रेलिया को आगे नही बढ़ने दिया और दूसरे क्वार्टर में अच्छा प्रदर्शन करते हुए गोल भी मारा। सविता पूनीया मैच की हीरो रहीं क्योंकि उन्होंने सात पेनल्टी कॉर्नर के बावजूद ऑस्ट्रेलिया का गोल नहीं करने दिया। 

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वंदना कटारिया 
टोक्यो ऑलंपिक में दक्षिण अफ्रीका के साथ हुए मुकाबले में फॉर्वर्ड खिलाड़ी वंदना कटारिया ने जोरदार परफॉर्मेस दिया और 3 गोल दागकर भारत की जीत को तय किया। वंदना कटारिया पहली ऐसी महिला बन गई हैं जिन्होंने ओलंपिक मैच में हैट्रिक जमाई और शानदार खेल का प्रदर्शन कर भारतीय महिला हॉकी टीम के क्वालीफाई की उम्मीद को जिंदा रखा। वंदना के साथ नेहा ने भी भारत की जीत के लिए नींव रखी। 

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मोनिका मलिक 
मोनिका मलिक ने 2013 में जूनियर विश्व कप में कांस्य पदक जीता और 2013 में ही आयोजित तीसरी एशियन चैम्पियनशिप ट्रॉफी में रजत पदक जीता। 2014 में भोपाल में हुए चौथे सीनियर नेशनल गेम्स में रजत पदक जीता। इस प्रतियोगिता में उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब भी मिला। 2014 में दक्षिण कोरिया में आयोजित 17वें एशियन गेम्स में उन्होंने कास्य पदक जीता। मोनिका ने कहा था कि यह पहली बार है जब भारतीय टीम को ओलंपिक में खेलने का मौका मिला। और अब टीम ने ओलंपिक का अनुभव भी हासिल कर लिया है, जिसका फायदा उन्हें टोक्यो ओलंपिक में मिल सकता है। मोनिका इस ओलंपिक में उसी तजुर्बे का फायदा उठाती नजर आ रही हैं। मोनिका मलिक अर्जेंटीना की प्रसिद्ध खिलाड़ी आइमर को अपनी आदर्श मानती हैं। 

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तारा का यह लहंगा डिजाइनर ऋतू कुमार के लेबल का है। इस लहंगे के ब्लाउज में डीप नैकलाइन और मैट गोल्ड कढ़ाई का भी काम हुआ है। इसकी स्लीव्स छोटी और डिजाइनर हैं। इसके दुपट्टे में भी कढ़ाई का खूबसूरत काम किया गया है। 

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तारा सुतारिया के अगर करियर की बार करें तो इन्होंने बॉलीवुड में अभी तक दो फिल्में की हैं। तारा की पहली फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर थी और दूसरी फिल्म थी मरजावां जिसमें तारा अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ नजर आई थीं।

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 खबर है कि तारा जल्द ही अपनी नई फिल्म एक विलेन रिटर्न्स और तड़प में नजर आने वाली हैं। बता दें कि फिल्म एक विलेन रिटर्न्स में तारा के साथ जॉन अब्राहम और अर्जुन कपूर दिख सकते हैं। जबकि फिल्म तड़प में तारा के साथ सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी दिख सकते हैं।