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मंदिरों में श्रद्धा के साथ स्वास्थ्य का संदेश, कई स्थानों पर खास आयोजन

मंदिरों में श्रद्धा के साथ स्वास्थ्य का संदेश, कई स्थानों पर खास आयोजन

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बढ़ते वायु प्रदूषण का प्रभाव शरद पूर्णिमा के दिन वितरित की जानेवाली आयुर्वेदिक दवाई के सेवन के लिए आने वाले रोगियों की बढ़ती संख्या में स्पष्ट दिखाई दिया। पोद्दारेश्वर राम मंदिर में 92 वर्ष पूर्व चित्रकूट से पधारे अज्ञात स्वामी ने तत्कालीन आयुर्वेदिक दवाखाने के माध्यम से प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा के दिन खीर के अनुपान सहित अस्थमा के रोगियों के लिए निशुल्क दवा वितरण की सेवा प्रारंभ की गई थी। तबसे आज तक अखंड रूप से जारी इस सेवा में इस वर्ष बाहर एवं नगर के 15 हजार रोगियों ने दवा ग्रहण की। गोबरी के कंडों पर मिट्टी की 41 हांडियों में गाय के दूध में लकड़ी के चम्मच से बिना धुले चावल से बिना शक्कर की खीर की व्यापक तैयारी दोपहर से ही प्रारंभ कर दी गई थी। रात 8 रोगियों में खीर वितरण कार्य प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर टेकड़ी गणेश मंदिर कमेटी के सचिव श्रीराम कुलकर्णी एवं शिव हनुमान मंदिर गांधीबाग बगीचा के सचिव शांतिलाल पुनयानी अतिथि रूप में उपस्थित थे। दूसरे शहरों से आए व  रात जागरण के पश्चात प्रात: 3 बजे दवा सेवन करने वाले रोगियों से मंदिर प्रांगण एवं संलग्न गोस्वामी तुलसीदास सत्संग स्थल का पटांगण भर गया था। नागपुर निवासी रोगियो ने एक कतार से दवा प्राप्त की। दोनो अतिथि ने रोगियों को केले के पत्ते पर खीर, दवाई एवं सेवन िवधि तथा पथ्य-अपथ्य संबंधी जानकारी देकर कार्य का शुभारंभ किया। अतिथियों ने इसे पूर्णत: प्रकृति से जुड़े उत्पादों का प्रभाव बताते हुए मंदिर के इस कष्टदायी रोग में लाभ पहुंचाने की सेवा की प्रशंसा की। ऐसा मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है अत रोगियों ने खीर मिश्रित दवा को चंद्रमा की किरणों से सिंचित कर भजन-संकीर्तन करते हुए रात भर जागरण किया। प्रात: 4 बजे दवा सेवन किया गया। 
 

गीता मंदिर में सुंदरकांड

सुभाष मार्ग स्थित गीता मंदिर में शरद पूर्णिमा कोजागिरी के अवसर पर दमा रोगियों को दवा का वितरण किया गया। प्रारंभ में रात 8 बजे से भक्ति गीतों व सुदरकांड की प्रस्तुति हुई। स्थानीय एवं बाहरगांव से बड़ी संख्या में रोगियो के साथ परिजनों का भी आगमन हुआ थ। रात 10 बजे केले के पत्ते पर विशेष रूप से बनाई खीर का वितरण किया गया। जिसे मिट्टी के पात्र में गोबरी कंडों की अग्नि में लकड़ी के चम्मच से बनाया गया था।सुंदरकांड की समाप्ति के बाद मंदिर संचालक व प्रबंध ट्रस्टी स्वामीजी निर्मलानंद महाराज ने परोसी गई खीर पर अपने हाथों से औषधि रूप में आयुर्वेदिक चूर्ण परोसा। लगातार चलते रहे संकीर्तन में सुबह 4 बजे तक दमा दवा युक्त खीर चंद्रमा के प्रकाश में रखी रही। स्वामीश्री निर्मलानंद महाराज ने उपस्थितों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि "विश्वासू फल दायकम' दवा को िवश्वास के साथ ग्रहण करने से लाभ जल्दी होगा। स्वामीजी ने सबके मंगलमय स्वास्थ्य की कामना की। 

 

सतीधाम में केसरिया 

रानी सती मंदिर, सतीधाम, न्यू नंदनवन में कोजागिरी का आयोजन संस्थाध्यक्ष रमादेवी खेमका की अध्यक्षता किया गया। इस अवसर पर केशरिया दूध बांटा गया। सतीदादी के भजनों की प्रस्तुति दी गई। आयोजन की सफलतार्थ अध्यक्ष रमा खेमका, अरुण खेमका, आशीश खेमका, पवन जाजोदिया, राजकुमार अग्रवाल, सुरेश खेमका, विनोद पोद्दार, राजेश खेतान, राजू गाडोदिया, विनोद जाजोदिया, गोपाल पचेरीवाला, डाॅ. सज्जन अग्रवाल, राकेश गोयनका, पुरुषोत्तम लिलडीया आदि ने प्रयास किए।

 

ईसासनी में वर्षावास समारोह का समापन

हिंगना में ईसासनी स्थित महाप्रजापति गौतम बुद्ध विहार में पंचशील सामाजिक बहुउद्देशीय संस्था के तत्वावधान में वर्षावास समारोह का समापन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार विनोदकुमार धाबर्डे ने उपस्थितों को मार्गदर्शन िकया। सधम्म प्रचार केंद्र के धम्म प्रवचनकार सुधीर वानखेडे ने वर्षावास का महत्व विषय की जानकारी दी। सफलता के लिए संस्था के पदाधिकारी संजय गणवीर, दिनेश राऊत, कैलाश धाकडे, श्रीकृष्ण खोब्रागड़े, सिद्धार्थ बागडे, जोत्सना रहांगडाले, रेखा चव्हाण ने प्रयास िकए।

 

सूर्यनगर में रंगारंग कार्यक्रम

सूर्यनगर वेलफेयर सोसायटी की ओर से  सूर्यनगर स्थित मैदान में शरद पूर्णिमा के उपलक्ष्य में कोजागिरी का रंगारंग कार्यक्रम शाम 7 बजे से मनाया गया। इस अवसर पर मनोरंजन कार्यक्रमों के अंतर्गंत महिलाओं ने रासगरबा एवं नये पुराने गीतों की संगीतमय प्रस्तुति दी।  केशरिया दूध का वितरण किया गया। आयोजन में सोसायटी के अध्यक्ष हजारीलाल अग्रवाल, दादाराव येरपुडे, सुरेश मित्तल, विमल मारोठिया, राधेश्याम भट्टड, अशोक बाहेती, किशोर भावलकर, रामचंद बावनकर, पुंडलिक बोलधन, पुरुषोत्तम अग्रवाल, प्रकाश चापले, प्रवीण हरडे, अमित परटक्के, महेन्द्र राडिया, पवन भालोटिया, श्यामसुंदर अग्रवाल, रमेश्श नाकाडे, किशोर सावरकर, पवनदेवी मारोठिया, डाॅ. सीमा मेंढेकर, शीतल बोलधन, माधुरी चापले, निशा येरपुडे, देवांगना पडोले, हेमा भट्टड, सारिका नाकाडे आदि की उपस्थिति थीं। संचालन प्रवीण हरडे ने एवं आभार प्रदर्शन महेन्द्र राडिया ने किया।

 

"भक्ति के रंग' कार्यक्रम का आयोजन

पुलक मंच परिवार की नंदनवन और शाखा महावीर वार्ड शाखा की ओर से संत शिरोमणी आचार्यश्री विद्यासागर एवं जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी गणिनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी के अवतरण दिवस शरद पूर्णिमा पर "भक्ति के रंग' कार्यक्रम का आयोजन वात्सल्यधारा जैन श्राविका पुलक आश्रय महावीरनगर में किया गया। प्रमुख अतिथि के रूप में भारतवर्षीय दिगंबर तीर्थक्षेत्र कमेटी के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री संतोष जैन पेंढारी, सम्मेद शिखरजी तीर्थयात्रा संघ के संघपति दिलीप शांतिलाल जैन, सर्व मानव सेवा संघ के अध्यक्ष सुभाष कोटेचा, उद्योगपति मनीष मेहता, नागपुर महानगरपालिका के जनसंपर्क अधिकारी मनीष सोनी, जगदीश गिल्लरकर व संजय नखाते उपस्थित थे। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। परतवाड़ा से आयी कोकिल कंठी गायिका डॉ. सारिका श्रावणे, डॉ. वृषाली देशमुख अमरावती, सुनील आगरकर, ऋषभ आगरकर, पंकज बोहरा, अमोल बारस्कर, शुभांगी लांबाडे, मनीषा पंडित, प्रणिता बोबडे, मनीषा नखाते, वैजयंती कापसे आदि गायक कलाकरों ने  एक से बढकर एक भजन प्रस्तुत किए। नागपुर के सुप्रसिद्ध जादूगर प्रशांत भावसार ने जादुई करिश्मा दिखाकर सबको मोहित किया।   इस अवसर पर सतीश जैन पेंढारी, राकेश पाटनी, सुरेश आग्रेकर, दिलीप शिवणकर, दिलीप राखे, चंद्रकांत वेखंडे, प्रकाश मारवडकर, विनय सावलकर, राजेन्द्र नखाते, दिनेश सावलकर, संदीप पोहरे का सत्कार किया गया।
 महिला और बच्चों के लिये विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया था। अंत में अमृतमयी दुग्धपान की व्यवस्था की गयी। कार्यक्रम का संचालन पुलक मंच परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष मनोज बंड ने तथा  आभार प्रदर्शन शाखा अध्यक्ष शरद मचाले ने किया। 


चिंता छोड़ो, चिंतन करो : आचार्य सुवीरसागर

चिंता छोड़ो, चिंतन पकड़ो। यह उद्गार आचार्य सुवीरसागर ने श्री चंद्रप्रभ दिगम्बर जैन मंदिर बाहुबलीनगर में अपने उद्बोधन में व्यक्त किए। जहां जन्म-मरण का चक्कर है, वह संसार है और जहां जन्म-मरण का चक्कर नहीं है वह मोक्ष है। सिद्ध भगवान के पर्याय का अंत नहीं है। वे अनंतकाल तक सिद्ध रहेंगे। मनुष्य ने अशुभ  परिणामों का बंध किया, तो तिर्यंच और नरक गति का बंध होगा। देव बनना सरल है, पर देव से देवेंद्र बनना महत्वपूर्ण है। शांति चाहिए, तो आत्म ध्यान में ही मिलेगी। आत्म ध्यान 12 भावना बार-बार भाने से होता है। धर्म आत्म शुद्धि का है। इसके लिए शरीर शुद्धि जरूरी है। चिंता छोड़ो, चिन्तन को पकड़ो। बारह भावना बार-बार चिंतन करने से सुख मिलेगा। अनादिकाल से यह जीव दुःख में सुख खोज रहा है। दुःख का मूल मन-वचन-काय की शुद्धि नहीं होना है। वचन की शुद्धि के लिए बोलना चाहिए, बाकी समय मौन रहना चाहिए। गृहस्थी में सभी काम करें, पर लक्ष्य न भूले। श्रावक को श्रावक के छः कर्तव्य का अवश्य पालन करना चाहिए। तीन प्रकार के श्रोता होते हैं। पहले प्रवचन एक कान से सुनते अौर दूसरे से निकाल देते हैं। दूसरे कान से सुनते और मंुह से निकाल देते हैं। तीसरे कान से सुनते और उसे हृदयंगम करके आचरण करते हैं। इस अवसर पर प्रमुखता से दिलीप शिवणकर, दिलीप राखे, शरद मचाले, प्रदीप काटोलकर, विजय सोईतकर, गिरीश हनुमंते, विक्रांत सावलकर, अरुणराव इन्दाने, बाला विटालकर, रवींद्र जैन, महेंद्र येलवटकर, मनीष विटालकर, मंगेश सावलकर, नितीन सावलकर, राहुल विटालकर, आशीष मोपकर, अनिल शहाकार, तेजस दर्यापुरकर, जयंत सोईतकर, राजंेद्र गड़ेकर, प्रकाश पलसापूरे, निलेश महात्मे, पवन जैन, सुशांत जैन, ज्योति दर्यापुरकर, मंगला भुसारी, पुष्पा सावलकर, ममता  सावलकर, निकिता दर्यापुरकर, क्षमा जैन, शीतल विटालकर, कुसुमबाई गवारे, स्नेहा सावरकर एवं चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष पवन जैन कान्हीवाड़ा, विवेक सोईतकर उपस्थित थे। 

 
नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महापूजन आयोजित

उधर पारडी महावीर स्वामी जैन मंदिर में  गुरुदेव श्री प्रशमरति विजयजी म.स. के सान्निध्य में नौ दिवसीय सिद्धचक्र महापूजन की भक्ति साधना सानंद सम्पन्न हुई। इस अवसर पर गुरुदेव ने बताया कि तप और मंत्रोच्चार के द्वारा आत्मा को उत्कृष्ट बल मिलता है। श्री सिद्धचक्र महायंत्र की वर्तमान आकृति योजना अनंत लब्धि निधान श्री गौतम स्वामी द्वारा की गई है। महापूजन तीन चरण में होता है। प्रथम चरण में पूर्व विधि एवं अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, दर्शन, ज्ञान, चारित्र, तप की पूजा होती है। द्वितीय चरण में व्यक्त मंत्र, अव्यक्त मंत्र, अड़तालीस लब्धि, आठ गुरु पादुका, १८ अधिष्ठायक देव, आठ देवी, सोलह विद्या देवी, चार द्वारपाल, चार वीर, चौबीस यक्ष-यक्षिणी, दश दिक्पाल, नव ग्रह और नव निधि का पूजन होता है। तृतीय चरण में दूध, दही, घृत, इक्षु रस और सुगंध रस से श्री नव कलश अभिषेक तथा अष्ट प्रकारी पूजा, चैत्य वंदन एवं शांति कलश विधान होता है। जहां धर्म आराधना है, वहां विविध-विविध रूप से श्री सिद्ध चक्र आराधना अवश्य होती है। नवपद की ओली के नव दिनों में सिद्धचक्र आराधना से विशेष लाभ होता है। १६५ वर्ष प्राचीन श्री सुपार्श्वनाथ भगवान से सुशोभित जिनालय मे प्रथम बार नौ दिवसीय सिद्ध चक्र महापूजन का आयोजन हुआ है।

 

मढी देवी का विसर्जन करने निकाली शोभायात्रा

कन्हान में अश्विन नवरात्र पर घोरपड रोड स्थित मढी देवी मंदिर में 9 दिवसीय नवरात्र महोत्सव के घट व ज्वारे विसर्जित किए गए थे। शरद पूर्णिमा को मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन रविवार को शाम 6 बजे मढी देवी मंदिर से सुसज्जित वाहन पर विराजित कर शाही शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा मढी देवी मंदिर से निकलकर जयस्तंभ चौक, गोयल टाकीज रोड, जूनी आेली, दाल ओली नं. 1, मोदी राम मंदिर, कांटी ओली, गुड़ ओली, सराफा ओली, मेन रोड, लाला ओली चौक, भाजीमंडी होते हुए महादेवघाट पहुंची।जहां सामूहिक रूप से मां दुर्गादेवी मूर्ति की पूजा-अर्चना, आरती कर नदी में प्रवाहित किया गया। मान्यता है कि, मां मढी देवी की शरद पूर्णिमा पर निकलने वाली विसर्जन शोभायात्रा का जो भी दर्शन और आराधना करता है वह सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है। इसी धारणा को लेकर शोभायात्रा मार्ग पर देवी भक्त मां की पूजा-अर्चना और दर्शन लाभ लेने भीड़ लगती है। बाजे-गाजे, आकर्षक रोशनाई मां की शोभायात्रा को भक्तिमय बना रहे थे। शोभायात्रा के सफलतार्थ मंदिर कमेटी के सभी पदाधिकारी व सदस्यों ने प्रयास किया।

 

साईं का महाप्रसाद ग्रहण करने उमड़ी भीड़

कामठी के आड़ा पुलिया स्थित साईं मंदिर में साईं महोत्सव के दौरान सोमवार को महाप्रसाद का आयोजन किया गया। जिसमें साईंबाबा का प्रसाद पाने के लिए लाखों भक्तों ने हाजिरी लगाई। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी साईं महोत्सव का आयोजन किया गया। 8 से लेकर 14 अक्टूबर तक चले साईं बाबा महोत्सव में रविवार को कोजािगरी शरद पूर्णिमा का प्रसाद वितरित किया गया। सोमवार काे महाप्रसाद का आयोजन किया गया। साईं मंदिर के गृभगृह व साईं प्रतिमा की विभिन्न पुष्पों की आकर्षक झांकी भक्तों को साईंभक्ति में लीन कर रही थी। सुबह से विभिन्न भजन मंडलियांे के संगीतमय भजन से मंदिर परिसर साईं भक्ति में गूंज रहा था। दाेपहर दो बजे बाबा की बनाई गई खिचड़ी का भोग लगाकर मंदिर के संत श्रीकृष्ण देवनाथ बाबा, सुदेश अग्रवाल व सभी पदाधिकारियों व साईं भक्तों की उपस्थिति में सामूहिक महाआरती कर महाप्रसाद का शुभारंभ किया गया। सोमवार को आयोजित महाप्रसाद का लाभ लेने लाखों भक्त साईं मंदिर पहंुच रहे थे। दोपहर से लेकर देर रात तक साईंबाबा की खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण करने शहर तथा ग्रामीण क्षेत्र के लाखों भक्तों की श्रद्धा व भक्ति का संगम साईं मंदिर में दिखाई दे रहा था। साईं बाबा के दर्शन और प्रसाद ग्रहण करने के लिए धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक पार्टियों के साथ अमीर और गरीब एक कतार में प्रसाद ग्रहण करते नजर आए। 7 दिवसीय साईं महोत्सव कार्यक्रम व महाप्रसाद के सफलतार्थ श्रीकृष्ण देवनाथ बाबा, सुदेश अग्रवाल, लाला खंडेलवाल, उमाशंकर सिंह, प्रा. सुदाम राखडे, गणेश यादव, दिलीप बड़वाईक, राजेश अग्रवाल, राजू भुटानी, राजू अग्रवाल, पवन रुंगठा, गोपाल चौहान, रवि कोतल्लीवार, मनोहर मसुरकर, नरेश बर्वे, सुरेश ठाकरे, जेता फुले, नंदलाल यादव, रामनारायण विश्वकर्मा, प्रमोद मानकर, अनिल नेवारे, गणेश चेऊर, तुषार मुकुटे, राहुल मंगल, जवाहर मोरिया, उत्तम शाहू सहित सैकड़ों साईंभक्तों ने अपनी सेवाएं प्रदान की। 


 

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