comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष बोले भोपाल-रीवा में भी हो हाईकोर्ट की बैंच

September 29th, 2019 22:24 IST
स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष बोले भोपाल-रीवा में भी हो हाईकोर्ट की बैंच


डिजिटल डेस्क जबलपुर। मप्र स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष शिवेन्द्र उपाध्याय के उस भाषण का वीडियो शनिवार को वायरल हुआ, जिसमें भोपाल में आयोजित एक समारोह में उन्होंने हाईकोर्ट की बैंच भोपाल और रीवा में होने की बात कही। आगामी 2 दिसंबर को होने वाले बार काउंसिल चुनाव को लेकर अध्यक्ष के इस बयान ने चुनावी माहौल को गरम कर दिया है। हालांकि श्री उपाध्याय का कहना है कि उन्होंने हाईकोर्ट के विखण्डन की नहीं, वरन प्रदेश के हर संभाग में अपीलीय कोर्ट बनाने की बात कही है।
यह कहा भाषण में-
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व कार्यकारिणी सदस्य व अधिवक्ता सीएम
तिवारी द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार भोपाल में आयोजित सेमीनार में एसबीसी चेयरमेन शिवेन्द्र उपाध्याय भी पहुंचे थे। उनके भाषण के पहले कुछ अधिवक्ताओं ने भोपाल बेंच को लेकर मुद्दा छेड़ दिया। जिस पर श्री उपाध्याय ने कहा कि वह उनके विरोध में नहीं है, बल्कि समर्थन में है। वायरल हुए वीडियो में अधिवक्ता तिवारी ने उमरिया में भी हाईकोर्ट की बैंच खोलने की आवाज लगाई। भाषण में श्री उपाध्याय ने कहा कि हाईकोर्ट में करीब साढ़े तीन लाख मामले लंबित है, मामलो का जल्द निराकरण हो, इसके लेकर संभागों में अपीलीय कोर्ट का गठन किया जाना चाहिये और सुको व हाईकोर्ट को सिर्फ संवैधानिक मामलों में सुनवाई करनी चाहिये। श्री तिवारी ने एसबीसी अध्यक्ष के बयान को निंदनीय बताते हुए उनसे तत्काल बार काउंसिल अध्यक्ष पद से स्तीफा देने की माँग की है।
मैंने अपीलीय कोर्ट खोलने की बात कही-
हाईकोर्ट के जजों की मौजूदगी में मेरा भाषण शुरू होने से पहले ही कुछ वकीलों ने मेरे विरोध किया क्योंकि भोपाल बैंच का मैंने पहले विरोध किया था। अभी हाल ही में देश के उप राष्ट्रपति का एक बयान आया है, जिसमें सुकों की चार बेंच गठित किये जाने की बात कही गई है। इसी कड़ी में मैने
संभागों में अपीलीय कोर्ट गठित करने की बात कही, क्योंकि हाईकोर्ट में लंबित साढ़े तीन मामलों की सुनवाई समय पर नहीं हो पा रही है। वैसे भी मैं न तो हाईकोर्ट के विखण्डन के पक्ष में हूं और न ही विरोध में।
शिवेन्द्र उपाध्याय, अध्यक्ष स्टेट बार काउंसिल

कमेंट करें
AyU16
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।