दैनिक भास्कर हिंदी: जिन कोरोना पीडि़तों का फेफड़ा 35 प्रश. से ज्यादा संक्रमित उनको चाहिए रेमडेसिविर

April 12th, 2021

एक्सपर्ट व्यू - हाहाकार मचाने की बजाय विशेषज्ञ को तय करने दें यह किसके लिए  है जरूरी, 25 से 40 तक के उम्र के व्यक्ति को ज्यादातर जरूरत नहीं पड़ती शहर में इस इंजेक्शन के लिए हर तरफ अफरा-तफरी
डिजिटल डेस्क जबलपुर । पू
रे प्रदेश के साथ जबलपुर में रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए हाहाकार मचा हुआ है। इस इंजेक्शन के लिए  मची हायतौबा के बीच वैज्ञानिक आधारों के साथ एक सच्चाई यह भी है कि यह हर कोरोना मरीज के लिए जरूर नहीं है। खासकर  ऐसे कोरोना पीडि़त जिनकी उम्र 25 से 40 वर्ष यदि है, साथ ही कोई जटिल बीमारी नहीं तो अमूमन यह इंजेक्शन लगाने की नौबत आती  ही नहीं है। संक्रमण के बाद यदि फेफड़ा 35 प्रतिशत से ज्यादा संक्रमित हो गया है तब इसके इंजेक्शन का डोज दिया जाता है। इसी के साथ जिस व्यक्ति का ऑक्सीजन लेवल 94 से नीचे आ गया हो और श्वासन की दर 24 से ज्यादा है उसको भी यह जरूरी होता है। वैसे सामान्य हालातों में श्वसन दर 16 से 18 तक बेहतर माना जाता है।
कालाबाजारी, हालात बदतर  
शहर में कई तरह के वैज्ञानिक पहलुओं को दरकिनार कर बस इस एंटीवायरल इंजेक्शन की तलाश की जा रही है। अस्पतालों में हद दर्जे की कालाबाजारी है तो किसी को जरूरत न पड़ जाए इसके लिए गैर जरूरी खरीददारी भी हो रही है। जरूरतमंद को इन हालातों में यह समय पर नहीं मिल पा रहा है। लाख दावों के बाद भी जीवन और मौत के बीच यह इंजेक्शन अनेक लोगों को नहीं मिल पा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जिले में  हर मरीज के हिसाब से यह अस्पतालों को दिया जा रहा है, वहीं अस्पतालों में इंजेक्शन नहीं है यह उत्तर दे दिया जाता है। अनेक मरीज बिस्तरों में गंभीर हालत में इसके एक-एक डोज का इंतजार कर रहे हैं। 
इनको लगाने की जरूरत  
फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्र भार्गव व सीनियर मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. अजय तिवारी कहते हैं कि रेमडेसिविर माडरेट कोरोना पीडि़त को लगाना पड़ता है। इसमें गंभीर से पहले संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। माइल्ड और सीवियर के बीच की स्थिति को माडरेट कहा जाता है। उच्च रक्त चाप, मधुमेह पीडि़त व हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को जरूरी है। हर तरह की क्लीनिकल स्थिति को देखकर ही इसको विशेषज्ञ लगाने की सलाह देते हैं।