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डीएनए रिपोर्ट पेश करने में सरकार की नाकामी के कारण देनी पड़ रही जमानत
डिजिटल डेस्क जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक आपराधिक प्रकरण में डीएनए रिपोर्ट पेश करने में हीलाहवाली करने और हर बार मोहलत लेने के रवैये पर सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस वीरेन्द्र िसंह की एकलपीठ ने कहा िक सरकार की नाकामी के कारण कथित आरोपी को जमानत का लाभ देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, संचालक फॉरेन्सिक साइंस सागर, महानिदेशक अभियोजन और महाधिवक्ता को निर्देश दिए हैं िक दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करें। कोर्ट ने सभी अधिकारियों को ऐसे प्रकरणों में सुधारात्मक उपाय भी सुनिश्चित करने कहा, ताकि किसी भी दोषी को अधिकारियों की गलती की वजह से जमानत नहीं देनी पड़े। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने एक साल 10 माह से जेल में बंद आवेदक को जमानत दे दी।
प्रकरण के अनुसार नरसिंहपुर निवासी आवेदक हरिओम कौरव पर आरोप है िक उसने अपने बड़े भाई रामकुमार की 15 फरवरी 2020 को हत्या कर दी। हरिओम पर आरोप है िक उसने खेत में लगे बिजूका (क्रोबार) से हमला कर भाई को मौत के घाट उतार दिया था और बाद में लाश को तिरपाल में लपेटकर सड़क किनारे फेंक दी। जाँच के दौरान मृतक के नाखून में कुछ बाल भी मिले थे। पुलिस ने हरिओम के खिलाफ भादंवि की धारा 302 का प्रकरण पंजीबद्ध किया। आवेदक की ओर से अधिवक्ता सौरभ भूषण श्रीवास्तव ने दलील दी िक इस मामले में सरकार डीएनए िरपोर्ट पेश करने एक साल से भी ज्यादा समय से केवल मोहलत ले रही है। कोर्ट ने 29 नवंबर को भी सरकार को अंतिम अवसर देते हुए चेतावनी दी थी। इसके बावजूद सरकार ने न तो जवाब पेश किया और न ही डीएनए िरपोर्ट पेश की। सरकार पुन: मोहलत माँगने लगी। कोर्ट ने सरकार के इस रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उक्त निर्देश जारी किए।
Created On :   22 Dec 2021 11:18 PM IST