शहडोल न्यूज: अंतर्राष्ट्रीय टाइगर लैंडस्केप कार्यशाला में बाँधवगढ़ मॉडल की सराहना

जंगल केवल बचाने की चीज नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए सतत आय का स्रोत भी बन सकते हैं
डिजिटल डेस्क शहडोल अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट अलायंस (IBCA), एशियाई विकास बैंक (ADB) तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ( MoEF&CC), भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में 2 से 3 सितंबर तक "टाइगर लैंडस्केप: संरक्षण, जैव-अर्थव्यवस्था और इकोटूरिज्म" विषय पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन गंगा सभागार इंदिरा पर्यावरण भवन नई दिल्ली में किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का मुख्य विषय _"टाइगर लैंडस्केप: संरक्षण, जैव-अर्थव्यवस्था और इकोटूरिज्म को आजीविका और आय सृजन के स्तंभ के रूप में स्थापित करना"रहा, जिसका मूल मंत्र है जंगल केवल बचाने की चीज नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए सतत आय का स्रोत भी बन सकते हैं। कार्यशाला में टाइगर लैंडस्केप को प्राकृतिक पूंजी (Natural Capital) के रूप में देखते हुए, ईकोसिस्टम सेवाओं के मूल्यांकन, समुदाय-आधारित संरक्षण, नॉन-टिम्बर वन उत्पाद, कार्बन क्रेडिट, ब्लू इकोनॉमी, होम-स्टे व रेवेन्यू-शेयरिंग जैसे इकोटूरिज्म मॉडल और ब्लेंडेड फाइनेंस, नेचर बॉन्ड व PES जैसे अभिनव वित्त पोषण तंत्रों पर गहन मंथन किया गया, ताकि संरक्षण के साथ-साथ मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और स्थानीय आजीविका दोनों को एक साथ मजबूत किया जा सके। यहां भारत सहित भूटान, बांग्लादेश, कंबोडिया, नेपाल, वियतनाम, मलेशिया व अन्य देशों के प्रतिनिधियों, भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ सदस्यों तथा WWF, IUCN, UNDP के विशेषज्ञों ने भाग लिया। केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव द्वारा कार्यशाला का उद्घाटन किया गया तथा IBCA-ADB के बीच MoU का आदान-प्रदान हुआ। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व एफडी ने बाँधवगढ़ की इकोटूरिज्म की अवधारणा से कराया अवगत- कार्यशाला के द्वितीय दिन आयोजित थिमेटिक सत्र "इकोटूरिज्म एवं सामुदायिक भागीदारी, होम-स्टे, गाइडिंग, रेवेन्यू-शेयरिंग और विजिटर मैनेजमेंट मॉडल" में डॉ. अनुपम सहाय IFS क्षेत्र संचालक बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को एक्सपर्ट पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के शुभरंजन सेन, IFS प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख ने की। डॉ. सहाय ने बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के सफल इकोटूरिज्म मॉडल को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कैसे बाँधवगढ़ के प्रशिक्षित गाइड तथा वाहन चालक बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन के साथ मिल कर सभी देशी विदेशी पर्यटकों को संवेदनशील इकोटूरिज्म के पहलुओं से अवगत कराते हुए न केवल वन तथा वन्यजीवों का अवलोकन कराते हैं अपूति वे पर्यटकों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण से भी जोड़ते है. साथ ही बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उदाहरण के माध्यम से मध्य प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व के पर्यटन से प्राप्त राजस्व साझाकरण की व्यवस्था जिससे पर्यटन से प्राप्त आय की एक तिहाई राशि को सीधे स्थानीय समुदाय तक पहुँचाया जा रहा है। जिसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने तथा अन्य राज्य के प्रतिभागियों ने रुचि से समझा. मध्य प्रदेश के विभिन्न इकोटूरिज्म के पहलों से ना केवल वन पर दबाव कम हुआ है और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व मजबूत हुआ है बल्कि जन समुदाय स्वंम आगे आ कर इस पूरी व्यवस्था को सम्भाल रहा है. उनके द्वारा प्रस्तुत समुदाय आधारित संरक्षण के अनुभवों जैसे स्थानीय समुदाय द्वारा होम स्टे का विकास, जिप्सी संचालन, पारंपरिक खान पान स्टॉल, गाइडिंग कार्य, स्थानीय होटल रिसोर्ट में स्किल्ड कर्मी के रूप में कार्य आदि को ADB और अन्य देशों तथा राज्यों के प्रतिनिधियों ने अत्यंत उपयोगी बताया। अंत में डॉ. सहाय ने सभी देशी विदेशी प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश आने का आत्मीय आमंत्रण देते हुए कहा - "We are just a roar away from you, any day, anytime."

Created On :   6 Sept 2026 12:24 PM IST

Tags

Next Story