शहडोल न्यूज: मध्यप्रदेश में अब आरएफ टैग लगाए बिना वाहनों से नहीं होगा खनिज परिवहन

मध्यप्रदेश में अब आरएफ टैग लगाए बिना वाहनों से नहीं होगा खनिज परिवहन
स्कैन में सर्वर जैसी समस्या नहीं आए इसके लिए भोपाल के अलावा चिन्हित जिलों में छोटा कंट्रोल रूम 20 दिन में तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।
डिजिटल डेस्क शहडोल मध्यप्रदेश में खनिज परिवहन करने वाले वाहनों पर अब आरएफ (रेडियो फ्रिक्वेंसी) टैग लगाना अनिवार्य होगा। सात अक्टूबर को जारी आदेश में खनिज परिवहन करने वाले सभी वाहन मालिकों व ठेकेदारों को नई व्यवस्था अपनाने के लिए कहा गया है। यह नया प्रयोग खनिज का अवैध परिवहन करने वाले वाहनों के द्वारा ई-चेक गेट से बचने के दौरान अपनाए जाने वाले तरह-तरह के हथकंडों पर विराम लगाने के लिए किया गया है। इसमें कई बार वाहन चालक नंबर प्लेट पर मिट्टी लगा लेते थे। कोई नंबर प्लेट बदलकर खनिज विभाग व किसी अधिकारी के वाहन का डुप्लीकेट नंबर ही लगा लेता था तो कई वाहन चालक नंबर प्लेट ही निकाल देते थे। इससे ई-चेक गेट पर खनिज का अवैध परिवहन करने वाले वाहनों की पहचान करना मुश्किल हो गया था। जानिए पूरी बात - मध्यप्रदेश में 25 जिलों में 40 स्थान पर लगे हैं ई-चेक गेट। इनमें भोपाल, जबलपुर, मुरैना, ग्वालियर, अलीराजपुर, रीवा, भिंड, सिंगरौली, मैहर, सीहोर, रायसेन, टीकमगढ़, इंदौर, शहडोल, अनूपपुर, सीधी, कटनी, उमरिया, छिंदवाड़ा, छतरपुर, सागर, निवाड़ी, दतिया, देवास और बालाघाट जिले शामिल हैं। - 3 फरवरी 2023 को ई-चेक गेट लगाने की योजना बनी। वर्ष 2025 में 40 स्थानों पर ई-चेक गेट स्थापित कर कंट्रोल रूम से जोड़ा गया। - शुरूआत में तय होने वाली जुर्माने की राशि को वैध नहीं मानकर कोर्ट में चुनौती दी गई। - प्रदेश सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर इस व्यवस्था में लगने वाले जुर्माने को वैध करार दिया। - ई-चेक गेट से जुर्माना वैध होने के 6 माह में ही खनिज के अवैध परिवहन के 1200 केस रजिस्टर्ड हुए, इसमें जुर्माने की राशि 34 करोड़ रूपए है। जिसमें अब सुनवाई चल रही है। - मध्यप्रदेश में खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की संख्या ढाई लाख से ज्यादा है। आरएफ आईडी से ऐसे पकड़ में आएगी गड़बड़ी: kआरएफ आईडी जिस वाहन के नाम जनरेट होगा उसमें खनिज लोड होने के दौरान ईटीपी जनरेट होगी तो आरएफ आईडी और ईटीपी आपस लिंक्ड रहेगी। ई-चेक गेट पर आरएफ आईडी, खनिज की मात्रा व प्रकार स्कैन होते ही डाटा भोपाल कंट्रोल रूम जाएगी। भिन्नता पाए जाने पर जुर्माना तय होगा। स्कैन में सर्वर जैसी समस्या नहीं आए इसके लिए भोपाल के अलावा चिन्हित जिलों में छोटा कंट्रोल रूम 20 दिन में तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।

Created On :   14 Oct 2026 5:32 PM IST

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