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Shahdol news: नौ दिन तक चलता है मां कंकाली का भंडारा

डिजिटल न्यूज़ शहडोल
जिले के अंतरा गांव में विराजमान मां कंकाली का दरबार आस्था के साथ अपनी प्राचीन मूर्तिकला और अनूठी धार्मिक परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। शारदेय नवरात्र में यहां नौ दिन तक भक्तों का मेला लगता है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। पूरे नवरात्र में भंडारे का आयोजन होता है और मां का हर दिन विशेष शृंगार किया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में मां कंकाली की 18 भुजाओं वाली दुर्लभ प्रतिमा विराजमान है। प्रतिमा की बनावट, गले में मुंडमाला और प्राचीन शिल्पकला श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। मां कंकाली के साथ मंदिर में मां शारदा और अष्टभुजी सिंहवाहिनी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। प्रतिमाओं की बारीक नक्काशी इस मंदिर को ऐतिहासिक दृष्टि से भी खास बनाती है। नवरात्र के नौ दिनों में मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का विशेष माहौल रहता है। भक्त मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं और मन्नत पूरी होने पर दोबारा मत्था टेकने पहुंचते हैं। लाल कपड़े में नारियल बांधकर मांगते हैं मन्नत मंदिर में भक्त लाल कपड़े में नारियल बांधकर अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। नवरात्र के दौरान यहां पूजा-अर्चना, जवारा स्थापना, हवन और भंडारे सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होते हैं। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर केवल दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि पीढिय़ों से चली आ रही आस्था और परंपरा का केंद्र है। कलचुरी काल से जुड़ी मानी जाती है प्रतिमा स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मां कंकाली की प्रतिमा 10वीं से 11वीं शताब्दी के कलचुरी काल की मानी जाती है। मंदिर में मां के उग्र स्वरूप, चरणों के पास योगिनियों जैसी आकृतियों और विशिष्ट मूर्तिकला के कारण इसे रहस्यमयी शक्तिधाम के रूप में भी देखा जाता है। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में इस स्थान का संबंध शाक्त उपासना और तंत्र साधना से भी जोड़ा जाता है।
Created On :   14 Oct 2026 2:50 PM IST












