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ICC ने किया पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को याद, शेयर की चैंपियन ट्रॉफी 2013 की तस्वीर

June 23rd, 2021 18:39 IST
ICC ने किया पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को याद, शेयर की चैंपियन ट्रॉफी 2013 की तस्वीर

हाईलाइट

  • ICC ने किया पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को याद
  • शेयर की चैंपियन ट्रॉफी 2013 की तस्वीर

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज की तारीख यानी 23 जून क्रिकेट प्रेमियो के लिए काफी मायने रखती हैं, सिर्फ इसलिए नहीं कि भारतीय टीम साउथहैम्पटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला WTC फाइनल खेल रही हैं बल्कि आज ही के दिन 2013 में एक टिकट कलेक्टर,आईसीसी ट्रॉफी कलेक्टर बन गया था।

आज ही के दिन महेंद्र सिंह धोनी (Dhoni) की कप्तानी में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। इसके लिए भारत ने मेजबान इंग्लैंड को फाइनल में 5 रन से मात देकर भारत ने ये खिताबी जीत अपने नाम की थी। इस जीत के साथ ही धोनी दुनिया के पहले कप्तान बन गए थे, जिन्होंने आईसीसी के सभी इवेंट्स में भारत को खिताब जिताए। अब 8 साल पुराने इस ऐतिहासिक मौके को याद करते हुए एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें इंग्लिश तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड रोते नजर आए हैं।

आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी जीतने के साथ ही धोनी तीनों आईसीसी ट्रॉफी- वर्ल्ड कप (2011), टी-20 वर्ल्ड कप (2007) और आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी (2013) अपने नाम करने वाले इतिहास के पहले कप्तान बने थे। अभी तक भी यह रिकॉर्ड सिर्फ धोनी के ही नाम हैं। इसके अलावा 2009 में धोनी की कप्तानी में ही भारत पहली बार आईसीसी टेस्ट रैंकिग में नं-1 पायदान पर पहुंचा था। 

आईसीसी द्वारा शेयर किए गए पोस्ट को क्रिकेट फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। कई क्रिकेटर्स भी इसपर रिएक्शन देते नजर आ रहे हैं। इस बीच इंग्लैंड के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड भी आईसीसी के इस पोस्ट पर कमेंट करते नजर आए। मगर उनके कमेंट ने सभी का ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि उन्होंने पिच पर टिप्पणी की। उन्होंने भारत की जीत पर तंज कसते हुए लिखा- ‘जिस तरह टेस्ट के पांचवें दिन गेंद स्पिन कर रही थी।’

दरअसल, मैच बारिश से प्रभावित हुआ था और उस मैच में भारत के लिए स्पिनर्स ने बेहतरीन गेंदबाजी की थी, क्योंकि बारिश से पिच पर स्पिनर्स के लिए काफी मदद थी। बताते चलें, 50 ओवर की चैंपियंस ट्रॉफी को बारिश के चलते 20 ओवर में खेला गया था, जिसमें Dhoni की कप्तानी में भारत ने 5 रन से जीत दर्ज कर इतिहास रचा था।

धोनी के कुछ चौंकाने वाले फैसले
धोनी द्वारा कुछ बेहद अहम मौकों पर ऐसे फैसले लिए गए जिसने सबको चौंका दिया था और उन फैसलो का नतीजा भी भारत के पक्ष में ही आया।

2007 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल
भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए टी20 वर्ल्ड कप के रोमांचक  फाइनल का निर्णायक ओवर अनुभवी हरभजन सिंह को न देकर युवा जोंगिदर शर्मा को दिया। और जोंगिदर शर्मा ने धौनी के इस फैसले को मिस्बाह-उल- हक का विकेट लेकर सही साबित किया और भारत की झोली में वर्ल्ड कप डाल दिया।

2011 वर्ल्ड कप फाइनल
भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए वर्ल्ड कप फाइनल में इनफॉर्म युवराज सिंह की जगह नं-4 पर खुद को प्रमोट किया और 91 रन की शानदार पारी खेलकर भारत के 28 साल के वर्ल्ड कप सूखे को खत्म किया।

2013 आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी फाइनल
भारत और इग्लैड के बीच खेले गए 2013 आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी के रोमांचक फाइनल में धौनी ने इशांत शर्मा को निर्णायक ओवर सौंपा, इशांत शर्मा का प्रदर्शन उस मैच में कुछ खास नहीं था और इग्लैड के बल्लेबाज उन्हे आसानी से खेल पा रहे थे, लेकिन इशांत ने इस ओवर में  क्रमश: इयॉन मॉर्गन और रवि बोपारा को आउट कर मैच का रुख भारत की तरफ मोड़ दिया। भारत ने इस रोमांचक मुकाबले को 5 रन से अपने नाम कर आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।