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Ind vs NZ WTC Final, Day 3: भारत की पहली पारी 217 रनों पर सिमटी, न्यूजीलैंड ने दो विकेट के नुकसान पर 101 रन बनाए, कोनवे का अर्धशतक

Ind vs NZ WTC Final, Day 3: भारत की पहली पारी 217 रनों पर सिमटी, न्यूजीलैंड ने दो विकेट के नुकसान पर 101 रन बनाए, कोनवे का अर्धशतक

हाईलाइट

  • भारत और न्यूजीलैंड के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल
  • भारत की पहली पारी 217 रनों पर सिमटी
  • न्यूजीलैंड ने एक विकेट के नुकसान पर 70+ रन बनाए

डिजिटल डेस्क, साउथम्पटन। भारत और न्यूजीलैंड के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल साउथैम्पटन में खेला जा रहा है। मैच के तीसरे दिन न्यूजीलैंड ने अपनी पहली पारी में 2 विकेट गंवाकर 101 रन बना लिए है। न्यूजीलैंड की टीम भारत से 116 रन पीछे है। न्यूजीलैंड का पहला विकेट 70 रन के स्कोर पर गिरा। रविचंद्रन अश्विन ने टॉम लाथम को आउट कर न्यजीलैंड को ये झटका दिया। डेवॉन कोनवे ने 54 रन की पारी खेली। उन्हें ईशांत ने शमी के हाथों कैच कराया। केन विलियम्सन (12*) और रॉस टेलर (2*) नाबाद पवेलियन लौटे। इससे पहले भारतीय टीम ने दूसरे दिन के स्कोर 3 विकेट पर 146 रन के स्कोर से आगे खेलना शुरू किया और पूरी टीम 217 रन पर ऑलआउट हो गई। 

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भारत की तरफ से कप्तान विराट कोहली ने 44 और उपकप्तान अजिंक्य रहाणे ने 49 रन की पारी खेली। रोहित शर्मा ने 34, शुभमन गिल ने 28, रविचंद्रन अश्विन ने 22 रन बनाए। न्यूजीलैंड की ओर से काइल जैमिसन ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 31 रन देकर 5 विकेट चटकाए। काइल जेमिसन ने टेस्ट करियर में 5वीं बार 5 विकेट झटके हैं। उन्होंने रोहित, विराट, ऋषभ पंत, ईशांत और बुमराह को शिकार बनाया। नील वेगनर और ट्रेंट बोल्ट ने दो-दो विकेट लिए जबकि टिम साउदी को एक विकेट मिला है।

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न्यूजीलैंड की पहली पारी:
भारत के 217 रन के जवाब में न्यूजीलैंड को ओपनरों ने सधी हुई शुरुआत की। टॉम लाथम और डेवॉन कोनवे ने 34.2 ओवर में 70 रन जोड़े। कोहली के हाथों कैच कराकर रविचंद्रन अश्विन ने इस पार्टनरशिप को तोड़ा। लाथम ने 104 गेंदों में 30 रन बनाए। अपनी इस पारी में उन्होंने 3 चौके भी लगाए। लाथम के आउट होने के बाद डेवॉन कोनवे का साथ देने कप्तान केन विलियम्सन आए। हालांकि कोनवे भी 54 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उन्हें ईशांत ने शमी के हाथों कैच कराया। केन विलियम्सन (12*) और रॉस टेलर (2*) नाबाद पवेलियन लौटे। न्यूजीलैंड की टीम भारत से 116 रन पीछे है।

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भारत की पारी:
इससे पहले, बारिश के कारण तीसरे दिन का खेल थोड़ी देर से शुरू हुआ। तीसरे दिन भारत ने तीन विकेट पर 146 रन से आगे खेलना शुरू किया और कप्तान विराट कोहली ने 44 और उपकप्तान अजिंक्य रहाणे ने 29 रन से पारी आगे बढ़ाई। हालांकि, कोहली ज्यादा देर नहीं टिक सके और जैमिसन ने पगबाधा कर उन्हें आउट किया। कोहली जिन्होंने आज टेस्ट क्रिकेट में 10 साल पूरे किए हैं वह 132 गेंदों पर एक चौके के सहारे 44 रन बनाकर आउट हुए।

नए बल्लेबाज के रूप में उतरे ऋषभ पंत को भी जैमिसन ने अपना शिकार बनाया। पंत ने 22 गेंदों पर एक चौके की मदद से चार रन बनाए। रहाणे ने इसके बाद जिम्मेदारी संभाली और अर्धशतक की ओर बढ़ने लगे, लेकिन वेगनर ने फिफ्टी जड़ने से पहले ही रहाणे को आउट कर भारतीय पारी को बैकफुट पर ला दिया। रहाणे ने 117 गेंदों पर पांच चौकों के सहारे 49 रन बनाए।

इसके बाद साउदी ने रविचंद्रन अश्विन को आउट किया जिन्होंने 27 गेंदों पर तीन चौकों की मदद से 22 रन बनाए। भारत ने लंच तक सात विकेट पर 211 रन बनाए थे और लंच के बाद भारत ने मात्र छह रन के अंतराल पर इशांत शर्मा (4), जसप्रीत बुमराह (0) और रवींद्र जडेजा (53 गेंदों पर दो चौके की मदद से 15 रन) के विकेट गंवाए।

बारिश से धुला पहला दिन, दूसरे दिन हुआ टॉस
WTC फाइनल का पहला दिन बारिश से धुल गया था। इसके बाद दूसरे दिन शनिवार को टॉस हुआ। न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर टीम इंडिया को बल्लेबीजा के लिए आमंत्रित किया। भारत ने मैच के दूसरे दिन पहले बल्लेबाजी करते हुए 3 विकेट गंवाकर 146 रन बनाए। ओपनर रोहित शर्मा ने 34, शुभमन गिल ने 28 और चेतेश्वर पुजारा ने 8 रन बनाए। कीवी टीम के लिए ट्रेंट बोल्ट, काइल जेमिसन और नील वैगनर ने 1-1 विकेट लिया।

रिजर्व डे का हो सकता है इस्तेमाल
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले के पहले दिन बारिश ने मुश्किल खड़ी कर दी हैं। अगर पहला दिन धुलने के बाद के चार दिन में नतीजा नहीं निकला तो रिजर्व डे का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका ऐलान मैच अंपायर टेस्ट मैच के पांचवे दिन के खत्म होने से एक घंटे पहले करेंगे। दरअसल, ICC बारिश की वजह से हुए नुकसान की भरपाई रिजर्व डे से करेगा। जितने समय का नुकसान होगा, रिजर्व डे पर उतना ज्यादा समय बढ़ाया जाएगा।

टेस्ट चैंपियनशिप का प्राइज मनी
विजेता टीम-11.71 करोड़ 
उपविजेता टीम-05.85 करोड़
इसके अलावा विजेता टीम को ट्रॉफी के तौर पर चैंपियनशिप गदा भी मिलेगी।

प्लेइंग XI:
भारत: विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा, शुभमन गिल, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), रविंद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन, ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह

न्यूजीलैंड: केन विलियम्सन (कप्तान), टॉम लाथम, डेवॉन कोनवे, रॉस टेलर, हेनरी निकोल्स, बीजे वाटलिंग, कोलिन डि ग्रैंडहोम, काइल जेमिसन, टिम साउदी, नील वैगनर और ट्रेंट बोल्ट
 

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।