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गांगुली होंगे BCCI के नए अध्यक्ष, 23 अक्टूबर को होगी आधिकारिक घोषणा

गांगुली होंगे BCCI के नए अध्यक्ष, 23 अक्टूबर को होगी आधिकारिक घोषणा

हाईलाइट

  • सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के नए अध्यक्ष चुने गए
  • BCCI के पूर्व सदस्य राजीव शुक्ला ने कहा, गांगुली के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा 23 अक्टूबर को होगी

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के नए अध्यक्ष चुने गए हैं। BCCI के पूर्व सदस्य राजीव शुक्ला ने कहा कि, हमने सौरव गांगुली को BCCI अध्यक्ष के रूप में चुना है। जिसकी आधिकारिक घोषणा 23 अक्टूबर को की जाएगी। 

वहीं जय शाह और अरुण धूमल क्रमशः बीसीसीआई सचिव और कोषाध्यक्ष पदों के लिए निर्विरोध चुने गए हैं। राष्ट्रीय निकाय 23 अक्टूबर को ही आधिकारिक तौर पर गांगुली की टीम नियुक्त करेगी।

सौरव गांगुली ने मुंबई में बीसीसीआई के अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करने के बाद कहा कि, एक ऐसा पद जहां मैं टीम के साथ अंतर कर सकता हूं, बेहद संतोषजनक होगा। उम्मीद है कि, अगले कुछ महीनों में हम भारतीय क्रिकेट में सामान्य स्थिति ला सकते हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गांगुली को सोशल मीडिया पर बधाई दी है। ममता बनर्जी ने ट्वीट करते हुए लिखा, "सर्वसम्मति से बीसीसीआई का अध्यक्ष चुने जाने पर सौरव गांगुली को बहुत-बहुत बधाई। आपको इस कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं। आपने भारत और बंगाल को गर्व के पल दिए हैं। हमें सीएबी अध्यक्ष के रूप में आपके कार्यकाल पर गर्व है। नई पारी शानदार रहने की उम्मीद है।

इससे पहले गांगुली सोमवार दोपहर को मुंबई स्थित कार्यालय में BCCI अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करने के लिए पहुंचे थे। गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह भी BCCI सचिव के पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करने के लिए उपस्थित रहे। इन दोनों के अलावा पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन और पूर्व आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला भी मौजूद रहे। बता दें कि, रविवार को हुई बैठक में बीसीसीआई के अगले अध्यक्ष पद के लिए गांगुली के नाम पर मुहर लगा दी गई थी।

गांगुली का मानना है कि, क्रिकेट जगत के सबसे बड़े संगठन के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालना उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने कहा, होने वाली नियुक्ति से मैं खुश हूं। क्योंकि यह वह समय है जब बीसीसीआई की छवि लगातार खराब हो रही है और यह मेरे लिए कुछ करने का अच्छा मौका है। आप चाहे निर्विरोध चुने गए हों या नहीं, लेकिन यह एक बड़ी जिम्मेदारी है क्योंकि यह क्रिकेट की दुनिया का सबसे बड़ा संगठन है। क्रिकेट के क्षेत्र में भारत एक शक्तिशाली देश है और यह एक बड़ी चुनौती होगी। 

इसके अलावा पूर्व भारतीय बल्लेबाज बृजेश पटेल आईपीएल के अगले चेयरमैन होंगे। इस पद का प्रस्ताव पहले गांगुली को दिया गया था, लेकिन उन्होंने यह पद संभालने से मना कर दिया था। 47 वर्षीय गांगुली का कार्यकाल एक साल से भी कम समय के लिए ही होगा क्योंकि नए नियमों के मुताबिक, अगले साल जुलाई के बाद वह कूलिंग ऑफ पीरियड में चले जाएंगे। वह फिलहाल बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष के पद पर काम कर रहे हैं।

बीसीसीआई के नए नियमों के अनुसार, एक प्रशासक लगातार केवल छह साल तक ही अपनी सेवाएं दे सकता है। गांगुली ने कहा, यह नियम है, इसलिए हमें इसका पालन करना होगा। मेरी पहली प्राथमिकता प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों पर ध्यान देने की होगी। क्रिकेटरों के वित्तीय हित का ध्यान रखने के लिए रणजी ट्रॉफी क्रिकेट पर भी ध्यान दिया जाएगा।

सौरव गांगुली ने भारत के लिए 113 टेस्ट मैच खेले हैं और उसमें 7212 रन बनाए हैं। वहीं 311 वनडे में सौरव गांगुली ने 11363 रनों का योदगान दिया है। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने विश्वकप के फाइनल तक का सफर तय किया था। 

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।