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गुरु पूर्णिमा आज - पड़ेगा सदी का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण, जानिए क्या होंगे इसके मायने

July 27th, 2018 00:12 IST

डिजिटल डेस्क ।  गुरु पूर्णिमा पर्व इस बार हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को आज मनाया जाएगा। ये पर्व जीवन में गुरु की महत्ता और महर्षि वेद व्यास को समर्पित है। वैसे तो भारतवर्ष में कई महान विद्वान गुरु हुए हैं, किन्तु महर्षि वेद व्यास प्रथम विद्वान थे, जिन्होंने सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) के चारों वेदों की व्याख्या की थी। सिख धर्म में भी गुरु को भगवान स्वरूप माना जाता है इस कारण गुरु पूर्णिमा सिख धर्म का भी विशेष पर्व बन चुका है। जीवन में गुरु और शिक्षक के महत्व को आने वाली पीढ़ी को बताने के लिए यह पर्व एक आदर्श है। गुरु पूर्णिमा अंधविश्वास के आधार पर नहीं अथवा श्रद्धाभाव से मनाया जाता है । 

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गुरु का आशीर्वाद सबके लिए कल्याणकारी और  ज्ञानवर्धक होता है, इसलिए इस दिन गुरु पूजन के उपरांत अपने  गुरु का आशीर्वाद विशेष रूप से प्राप्त करना चाहिए। इस बार गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण पड़ रहा है । जो सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा और जो सम्पूर्ण भारत में दिखाई देगा। ये  ग्रहण रात 11:54 से आरंभ होकर रात 3:49 बजे समाप्त होगा। 3 घंटे 55 मिनट चलने वाला है इस ग्रहण को सहजता से बिना किसी उपकरण की सहायता से देखा जा सकेगा। 

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इस दिन गुरू पूर्णिमा होने के कारण पूजा ग्रहण के सूतक काल लगने से पहले की जा सकती है। चंद्र ग्रहण से पहले सूतक दोपहर 2 बजे से शुरू हो जाएंगे और इस दिन धर्म शास्त्र की मानें तो चंद्रग्रहण के समय भोजन करने से बचना चाहिए। वहीं, सुईं और नुकीली चीजों का भी उपयोग नहीं करना चाहिए। सुतक लगने से पहले खाने-पीने की चीजों में कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं, वे चीजें ग्रहण के कारण दूषित नहीं होती। ग्रहण के समय अगर घर में पका हुआ खाना रखना है तो ग्रहण समाप्ति के बाद ये खाना गाय या कुत्ते को खिलाना चाहिए। अपने लिए ताजा खाना बनाना श्रेष्ठ रहता है।

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आम दिनों की अपेक्षा इस बार चंद्र ग्रहण के समय किया गया पुण्यकर्म जेसे - जाप,तप, ध्यान, तीर्थ स्नान और दान का कई गुणा अधिक फल प्रदान करगा। जिस किसी ने गुरु मंत्र ले रखा है, उन्हें ग्रहण के समय गुरु मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। ग्रहण काल में गुरु मंत्र का जाप न करने से मंत्र की शक्ति घटती है।

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जिन लोगों की कुंडली में राहु-चंद्रमा दोनों ग्रह एक साथ एक ही भाव में हैं तो उन्हें ग्रहण काल में ग्रहण योग की शांति अवश्य करवानी चाहिए। इससे कुंडली के दोष दूर होते हैं। ग्रहण वाले दिन अगर संभव हो सके तो किसी गरीब को काला कंबल और अनाज दान में अवश्य दें। इस बार गुरु पूर्णिमा के दिन भोजन में केसर का प्रयोग करें और स्नान के बाद नाभि तथा मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं।

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साधु,संत या विशेष ब्राह्मण एवं पीपल के वृक्ष की पूजा करें। गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान के जल में नागरमोथा नामक वनस्पति डालकर स्नान करें जो आपको जड़ी-बूटी की दूकान पर मिल जाएगी। पीले रंग के फूलों के पौधे अपने घर में लगाएं,पीली वस्तु या पीला रंग उपहार में दें।

  • केले के दो पौधे विष्णु भगवान के मंदिर में लगाएं।
  • गुरु पूर्णिमा के दिन साबूत मूंग मंदिर में दान करें और 12 वर्ष से छोटी कन्याओं के चरण स्पर्श करके उनसे आशीर्वाद लें।
  • चांदी का दुकड़ा अपने घर की भूमि में दबाएं और साधु संतों का सम्मान करें अपमान नहीं करें।
  • जिस पलंग पर आप सोते हैं, उसके चारों कोनों में सोने की कील अथवा सोने का तार लगाएं ।
  • जो छात्र शिक्षा संबंधी बाधा से परेशान चल रहै है। उन्हैं गुरु पूर्णिमा के दिन गीता का पाठ कर भगवान श्री कृष्ण का पूजन और गाय की सेवा अवश्य करनी चाहिए।
  • अगर भाग्योदय नहीं हो पा रहा है, कारोबार धीमा चल रहा है, तो ऐसे में किसी भी सुयोग्य पात्र को पीले अनाज, वस्त्र और पीली मिठाई का दान करना चाहिए।
 
 
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