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कालाष्टमी: ऐसे करें पूजन, इस मंत्र का करें जाप

कालाष्टमी: ऐसे करें पूजन, इस मंत्र का करें जाप

डिजिटल डेस्क। अगहन या मार्गशीर्ष का महीना अत्यंत पवित्र होता है, इस माह में वैसे तो कई व्रत और पर्व आते हैं, लेकिन कृष्ण पक्ष अष्टमी की तिथि को आने वाली कालाष्टमी का पर्व खास होता है, जो कि इस बार 19 नवंबर मंगलवार को है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रुप काला भैरव की पूजा की जाती है। इस दिन का व्रत रखने से सभी नकारात्मक शक्तियां खत्म हो जाती हैं।

शिव पुराण में बताया गया है कि शिवजी हर कण में विराजमान हैं, इस वजह से शिवजी ही इन तीन गुणों के नियंत्रक माने गए हैं। शिवजी को आनंद स्वरूप में शंभू, विकराल स्वरूप में उग्र और सत्व स्वरूप में सात्विक भी पुकारा जाता है।  

मान्यता
मान्यताओं के अनुसार शिव के अपमान स्वरूप मार्गशीर्ष महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान शंकर के अंश से भैरव की उत्पत्ति हुई थी। इसलिए इस तिथि को कालभैरव अष्टमी नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि भगवान शिव ने पापियों को दंड देने के लिए रौद्र रुप धारण किया था। 

भगवान शिव के दो रुप हैं एक बटुक भैरव और दूसरा काल भैरव। बटुक भैरव रुप अपने भक्तों को सौम्य प्रदान करते हैं और वहीं काल भैरव अपराधिक प्रवृत्तयों पर नियंत्रण करने वाले प्रचंड दंडनायक हैं। इस दिन व्रत और पूजा करने से घर में कभी भूत-पिशाच या किसी बुरी नजर का साया नहीं पड़ता है।

पूजा विधि और व्रत रखने के फायदे?

- भैरव बाबा की उपासना षोड्षोपचार पूजन सहित करनी चाहिए और रात्री में जागरण करना चाहिए। 
रात में भजन कीर्तन करते हुए भैरव कथा व आरती करने से विशेष लाभ मिलता है।  
भैरव अष्टमी के दिन व्रत और पूजा उपासना करने से शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का नाश हो जाता है। 
इस दिन भैरव बाबा की विशेष पूजा अर्चना करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है।
इस तिथि पर श्री कालभैरव जी का दर्शन- पूजन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए काले कुत्ते को मीठा भोजन कराना चाहिए।
इस दिन काल भैरव के दर्शन करने से भूत पिशाच का डर खत्म हो जाता है।

इस मंत्र का करें जाप

अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्,
भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!!

 
 
 

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