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कामदा एकादशी: इस योग में करें शुभ और मांगलिक कार्य, जानें पूजा की विधि

कामदा एकादशी: इस योग में करें शुभ और मांगलिक कार्य, जानें पूजा की विधि

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को खास माना गया है। इसका बड़ा कारण हिंदू संवत्सर की पहली एकादशी होना है। इसे कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल यह एकादशी 23 अप्रैल, शुक्रवार को पड़ रही है। कामदा एकादशी बहुत ही फलदायी होती है, इसलिए इसे फलदा एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि कामदा एकादशी का व्रत रखने से प्रेत योनि से भी मुक्ति मिलती है। 

इस एकादशी पर कई शुभ योग बन रहे हैं। शुक्रवार के दिन एकादशी की तिथि होने के कारण इस दिन मां लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलेगा। वहीं इस दिन शुभ और मांगलिक कार्य कर सकते हैं। आइए जानते हैं कामदा एकादशी की व्रत कथा व पूजा विधि के बारे में।

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कामदा एकादशी का शुभ मुहूर्त 
तिथि प्रारम्भ: 22 अप्रैल रात 11 बजकर 37 मिनट से  
तिथि समापन: 23 अप्रैल रात 9 बजकर 47 मिनट तक

कामदा एकादशी पूजा विधि
- ब्रह्ममुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करें।
- इसके बाद व्रत का संकल्प लें। 
- श्री हरि यानि विष्णु भगवान की पूजा करें। 
- फल, फूल, दूध, तिल, पंचामृत इत्यादि सामग्री अर्पित करें।
- घी का दीप जलाएं। 
- 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें।
- एकादशी की रात्रि प्रभु भक्ति में जागरण करें, उनके भजन गाएं। भगवान विष्णु की कथाओं का पाठ करें।  
- एकादशी व्रत की कथा सुननी चाहिए।

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रात्रि में भगवान का भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना चाहिए। द्वादशी के दिन ब्राह्मण या किसी भूखे गरीब को भोजन करवाकर, दान-दक्षिणा देकर संतुष्ट करने पर ही स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए। अगर द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो रही हो तो सूर्योदय के बाद ही पारण करने का विधान है।

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