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राक्षस योनि में जन्मा था महापंडित रावण, जानें पांच अच्छाईयां

राक्षस योनि में जन्मा था महापंडित रावण, जानें पांच अच्छाईयां

डिजिटल डेस्क।  हम बचपन से रामायण सुनते या टीवी पर देखते हुए आ रहे हैं। रामायण की कहानी भी सभी को पता है कि रावण ने सीता माता का अपहरण किया था। राम ने रावण का वध किया उस दिवस को दशहरा पर्व के रूप में मनाया जाता है। दशहरे को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक कहा जाता है। हर साल भारत में रावण को बुराई का प्रतीक मानकर उसका पुतला दहन किया जाता है। लेकिन रावण में कई अच्छाईयां भी थी, जिसका हर मनुष्य को पालन करना चाहिए। आइए जानते हैं रावण की पांच अच्छाईयां। 

1) राम का विजय के लिए किया था हवन
जब राम वानरों की सेना को लेकर समुद्र तट पर पहुंचे थे। तब राम रामेश्वरम के पास गए और विजय यज्ञ की तैयारी शुरू करने को कहा। हवन के पूर्णाहुति के लिए गुरू बृहस्पति को बुलाया गया, लेकिन वह नहीं आए। तब राम ने सुग्रीव को रावण को बुलाने के लिए भेज दिया। सुग्रीव राम के आदेश का पालन कर लंकापति रावण के पास गए। यज्ञ को पूर्ण कर रावण आने के लिए तैयार हो गया। रावण पुष्पक विमान में माता सीता को साथ लेकर गए और सीता को राम के पास बैठा कर यज्ञ पूर्ण किया। रावण ने राम को विजय होने का आशीर्वाद दिया और सीता को लेकर लंका चला गया। रावण से जब पूछा गया कि आपने राम को विजय होने का आशीर्वाद क्यों दिया। तब रावण ने कहा कि, आशीर्वाद महापंडित रावण ने दिया है, राजा रावण ने नहीं। 

2) शिव भक्त का रावण
एक बार रावण अपने पुष्पक विमान से यात्रा कर रहा था। रास्तें में वन क्षेत्र के पहाड़ पर भगवान शिव ध्यान कर रहे थे। शिव के गण नंदी ने रावण आगे जाने से रोक दिया। नंदी ने कहा कि इधर से गुजरना निषिद्ध है, क्योंकि शिव तप में मग्न है। यह सुन रावण को काफी गुस्सा आया और जिस पहाड़ पर शिव तपस्या कर रहे थे, उसे उठाने लगा। यह देख शिव ने अपने अंगूठे से पर्वत को दबा दिया जिस कारण रावण का हाथ दब गया। काफी कोशिश के बाद भी रावण अपना हाथ निकाल नहीं पाया तब शिव से प्रार्थना करने लगा। रावण ने तांडव स्त्रोत पढ़ा। तब भगवान शिव ने रावण को मुक्त कर दिया, जिसके बाद रावण शिव भक्त हो गया। 

3) मृत्यु अवस्था में दिया ज्ञान
जब रावण मृत्यु अवस्था में तब राम ने लक्ष्मण को ज्ञान लेने रावण के पास भेजा था। तब लक्ष्मण रावण के सिर की ओर बैठ गए तब रावण ने कहा कि सीखने के लिए सिर की तरफ नहीं, पैरों की ओर बैठना चाहिए।  रावण ने शिव तांडव स्तोत्र की अलावा कई ग्रंथों की रचना की है। लाल किताब भी रावण संहिता का अंश है। 

4) कई शास्त्रों की रचयिता
रावण काफी ज्ञानी था। रावण ने शिव की स्तुति में तांडव स्तोत्र लिखा था। इसके अलावा रावण ने अंक प्रकाश, इंद्रजाल, कुमारतंत्र, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, ऋग्वेद भाष्य, रावणीयम, नाड़ी परीक्षा आदि पुस्तकों की रचना की थी। 

5) बहन के लिए किया अपहरण
रावण अपने परिजनों से काफी प्यार करता थे। रावण एक अच्छे भाई का उदाहरण है। लक्ष्मण ने रावण की बहन शूर्पणखा की नाक काट दी थी। तब रावण ने अपनी बहन के अपमान का बदला लेने सीता के अपहरण की योजना बनाई थी। अपहरण के बाद रावण ने माता सीता को लंकानगरी के अशोक वाटिका में रखा था। जहां त्रिजटा के नेतृत्व में कुछ राक्षसियों को सीता की देखभाल के लिए रखा गया था। 


 

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