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पौष मास की चतुर्थी व्रत से दूर होते हैं विघ्न

December 26th, 2018 12:16 IST
पौष मास की चतुर्थी व्रत से दूर होते हैं विघ्न

डिजिटल डेस्क । पौष मास की चतुर्थी विघ्नविनाशिनी होती है। ये बड़े-से-बड़े संकट को भी दूर करती है। इस व्रत के प्रभाव से प्रभावशाली व्यक्ति भी वशीभूत हो जाते हैं। ये सभी विघ्न, बाधाओं को दूर करता है। इस तिथि को गणेश जी के ‘लम्बोदर’ रूप की पूजा की जाती है। पौष संकष्टी चतुर्थी व्रत तिथि इस बार 25 दिसम्बर 2018 दिन मंगलवार को है। जो भी इस व्रत को श्रध्दा पूर्वक करता है उसे सफलता अवश्य प्राप्त होती हैं। पौष मास की चतुर्थी पर विघ्नेश्वर का व्रत-पूजन कर दान-दक्षिणा देने से धन का अभाव नहीं रहता है।

पूजन सामग्री

गणेश जी की प्रतिमा, धूप, दीप, नैवेद्य (मोदक तथा अन्य ऋतुफल), अक्षत, फूल, कलश, चंदन, केसरिया, रोली, कपूर, दुर्वा, पंचमेवा, गंगाजल, वस्त्र(2- कलश और गणेश जी के लिये), अक्षत, घी, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, गुड़, पंचामृत (कच्चा दूध,दही,शहद,शर्करा,घी)


हवन के लिए:-

दूध की खीर, घी

पौष संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि:-

प्रात: काल उठकर नित्य कर्म से निवृत हो, शुद्ध हो कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। श्री गणेश जी का पूजन पंचोपचार (धूप, दीप, नैवेद्य, अक्षत, फूल) विधि से करें। इसके बाद हाथ में जल तथा दूर्वा लेकर मन-ही-मन श्री गणेश का ध्यान करते हुये व्रत का संकल्प करें। पूरे दिन श्री गणेशजी के मंत्र का स्तवन करें। संध्या को दुबारा स्नान कर शुद्ध हो जायें। 

श्री गणेश जी के सामने सभी पूजन सामग्री के साथ बैठ जायें। विधि-विधान से गणेश जी का पूजन करें। वस्त्र अर्पित करें। नैवेद्य के रूप में लड्डु अर्पित करें। चंद्रमा के उदय होने पर चंद्रमा की पूजा कर अर्घ्य अर्पण करें। इसके बाद गणेश जी की आरती करें। 

अंगारकी चतुर्थी पूजा विधि - विधि विधान से 

पूजन सामग्री 

1. गणेश जी की प्रतिमा 2. धूप 3. दीप 4. नैवेद्य(लड्डु तथा अन्य ऋतुफल) 5. अक्षत 6. फूल 7. कलश 8. चंदन केसरिया 9. रोली 10. कपूर 11. दुर्वा 11. पंचमेवा 12. गंगाजल 13. वस्त्र (2 – एक कलश के लिये- एक गणेश जी के लिये) 14. अक्षत 15. घी 16. पान 17. सुपारी . लौंग 19. इलायची 20. गुड़ 21. पंचामृत (कच्चा दूध, दही,शहद, शर्करा, घी)


ध्यानं करें – दोनो हाथ जोड़कर हाथ में पुष्प लेकर गणेश जी का ध्यान करें। उसके बाद गणेश चतुर्थी की कथा सुने अथवा सुनाये। दूध की खीर व घी से गणपति मंत्र के द्वारा हवन करें।

पौष गणेश चौथ व्रत कथा 

एक समय रावण ने स्वर्ग के सभी देवताओं को जीत लिया संध्या करते हुए बाली को पीछे से जाकर पकड़ लिया . वानरराज बाली रावण को अपनी बगल (कांख) में दबाकर किष्किन्धा नगरी ले आये और अपने पुत्र अंगद को खेलने के लिए खिलौना दे दिया अंगद रावण को खिलौना समझकर रस्सी से बांधकर इधर उधर घुमाते थे।

  • इससे रावण को बहुत कष्ट और दु:ख प्राप्त हुआ | रावण ने दु:खी मन से अपने पितामह पुलस्त्य जी को याद किया।
  • रावण की इस दशा को देखकर पुलस्त्य ने विचारा की रावण की यह दशा क्यों हुई ? 
  • अभिमान हो जाने पर देव, मनुष्य, असुर, सभी की यही गति होती है।
  • पुलस्त्य ऋषि ने रावण से पूछा तुमने मुझे क्यों याद किया है ?
  • रावण बोला- पितामह मैं बहुत दु:खी हूं, यह नगरवासी मुझे धिक्कारते हैं अब ही आप मेरी रक्षा करें।

रावण के मुखं ऐसे वचनों को सुनकर पुलस्त्य बोले 

रावण तुम डरों नहीं तुम इस बन्धन से जल्दी ही मुक्त होगे तुम विघ्नविनाशक गणेशजी का व्रत करो। पूर्वकाल में वृत्रासुर की हत्या से छुटकारा पाने के लिए इंद्र देव ने इस व्रत को किया था। इस लिए तुम भी इस व्रत को करो। रावण ने भक्तिपूर्वक इस व्रत को किया और बन्धन रहित हो अपने राज्य को प्राप्त किया, जो भी इस व्रत को श्रद्धा-पूर्वक करता हैं उसे सफलता अवश्य प्राप्त होती हैं।

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